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वेद पुराणों में समाया है ज्ञान-विज्ञान का असीमित भंडार:डॉ. रावत
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वअल्मोड़ा। एसएसजे विश्वविद्यालय के योग विज्ञान विभाग और विज्ञान भारती उत्तराखंड की ओर से मंगलवार को ‘स्वामी विवेकानंद एक विज्ञान दृष्टा’ विषय पर राष्ट्रीय वेब व्याख्यानमाला आयोजित की गई। बतौर मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कार्यक्रम में ऑनलाइन े शिरकत की। कार्यक्रम में एसएसजे विवि के कुलपति प्रो. एनएस भंडारी ने मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. रावत और मुख्य वक्ता विज्ञान भारती के राष्ट्रीय सचिव जयंत सहस्त्रबुद्धे का स्वागत किया। उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. रावत ने कहा स्वामी विवेकानंद ने उत्तराखंड में चरण रखे।हमारे वेद, पुराण, उपनिषद और संहिताओं में ज्ञान-विज्ञान का असीमित भंडार समाया है। हमारे युगदृष्टा ऋषि-मुनियों और वैज्ञानिकों ने इस ज्ञान का उपयोग विश्व के कल्याण के लिए किया है।
मुख्य वक्ता विज्ञान भारती के राष्ट्रीय सचिव सहस्त्रबुद्धे ने व्याख्यानमाला में भारतीय ऋषियों, संत-महात्माओं और वैज्ञानिकों द्वारा विश्व के कल्याण में दिए गए अविस्मरणीय योगदान पर प्रकाश डाला। व्याख्यानमाला के संरक्षक और कार्यक्रम के अध्यक्ष कुलपति प्रो. एनएस भंडारी ने कहा कि यह भूमि ऋषि-मुनि और तपस्वियों की साधना स्थली रही है। इस भूमि में स्वामी विवेकानंद ने अपनी साधना की है। समाज को स्वामी जी के चिंतन और आदर्शों की आवश्यकता है।
कार्यक्रम का संचालन संयोजक डॉ. नवीन भट्ट और प्रो. हेमवती नंदन पांडे ने किया। कार्यक्रम में उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय हरिद्वार कुलपति प्रो. डीपी त्रिपाठी, यूओयू कुलपति प्रो. ओपीएस नेगी, उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक डॉ. राजेंद्र डोभाल, श्रीदेव सुमन विवि कुलपति डॉ. पीपी ध्यानी, डॉ. आरएस रावल, कुलसचिव डॉ. बिपिन जोशी, कुमाऊं विवि कुलपति प्रो. केएस राणा, डॉ. ममता असवाल, डॉ. देवेंद्र सिंह बिष्ट, डॉ. रजनी नौटियाल, डॉ. विनोद नौटियाल, डॉ. ललित जोशी, रजनीश जोशी, गिरीश अधिकारी, डॉ. ललित चंद्र जोशी, विनीत कांडपाल, प्रमिला विश्वास, डॉ. रविंद्र चौधरी, लल्लन सिंह, डॉ. दीपाली कनवाल आदि ने हिस्सा लिया।
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मुख्य वक्ता विज्ञान भारती के राष्ट्रीय सचिव सहस्त्रबुद्धे ने व्याख्यानमाला में भारतीय ऋषियों, संत-महात्माओं और वैज्ञानिकों द्वारा विश्व के कल्याण में दिए गए अविस्मरणीय योगदान पर प्रकाश डाला। व्याख्यानमाला के संरक्षक और कार्यक्रम के अध्यक्ष कुलपति प्रो. एनएस भंडारी ने कहा कि यह भूमि ऋषि-मुनि और तपस्वियों की साधना स्थली रही है। इस भूमि में स्वामी विवेकानंद ने अपनी साधना की है। समाज को स्वामी जी के चिंतन और आदर्शों की आवश्यकता है।
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कार्यक्रम का संचालन संयोजक डॉ. नवीन भट्ट और प्रो. हेमवती नंदन पांडे ने किया। कार्यक्रम में उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय हरिद्वार कुलपति प्रो. डीपी त्रिपाठी, यूओयू कुलपति प्रो. ओपीएस नेगी, उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक डॉ. राजेंद्र डोभाल, श्रीदेव सुमन विवि कुलपति डॉ. पीपी ध्यानी, डॉ. आरएस रावल, कुलसचिव डॉ. बिपिन जोशी, कुमाऊं विवि कुलपति प्रो. केएस राणा, डॉ. ममता असवाल, डॉ. देवेंद्र सिंह बिष्ट, डॉ. रजनी नौटियाल, डॉ. विनोद नौटियाल, डॉ. ललित जोशी, रजनीश जोशी, गिरीश अधिकारी, डॉ. ललित चंद्र जोशी, विनीत कांडपाल, प्रमिला विश्वास, डॉ. रविंद्र चौधरी, लल्लन सिंह, डॉ. दीपाली कनवाल आदि ने हिस्सा लिया।
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