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Almora News: हिमालय की गोद में सौंग के जंगल बने दुर्लभ तितलियों का सुरक्षित बसेरा

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Fri, 29 May 2026 11:42 PM IST
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The Song forests nestled in the Himalayas are a safe haven for rare butterflies.

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बागेश्वर। हिमालय की वादियों में बसे कपकोट के सौंग-मुनार क्षेत्र के जंगल इन दिनों रंग-बिरंगी तितलियों की उड़ान से खुशनुमा बने हुए हैं। घने उतीस के जंगलों और स्वच्छ वातावरण के बीच यहां दुर्लभ तितलियों ने अपना सुरक्षित ठिकाना बना लिया है। पिछले दो वर्षों की खोजबीन में यहां छह ऐसी दुर्लभ तितलियां मिली हैं जिनका अब तक जिले में कोई रिकॉर्ड नहीं था।



रानीखेत डिग्री कॉलेज के प्राध्यापक डॉ. शंकर कुमार और कपकोट डिग्री कॉलेज के प्राध्यापक दीपक कुमार ने दो साल तक सौंग के जंगलों में तितलियों की प्रजातियों का अध्ययन किया। इस दौरान उन्हें एज्योर सैफायर, हिमालयन पॉपिनजै, कॉमन सेलर, कॉमन जेस्टर, रेड एडमिरल, ब्लू एडमिरल और ऑरेंज टिप जैसी सामान्य तितलियों के साथ कई दुर्लभ प्रजातियां भी दिखाई दीं।
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खोज के दौरान टाउनी राजाह, रेडब्रेस्ट, टेललेस पुशब्लू, डस्की बुशब्लू, सिक्स-बार स्वॉर्डटेल और कॉमन मॉटल जैसी दुर्लभ तितलियां अलग-अलग समय पर रिकॉर्ड की गईं। फरवरी से नवंबर के बीच इनकी गतिविधियां सबसे अधिक देखी गईं। विशेषज्ञों के अनुसार यह खोज सौंग क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता और स्वस्थ वन पारितंत्र का बड़ा संकेत मानी जा रही है।
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कई खूबियों से परिपूर्ण हैं दुर्लभ तितलियां



सौंग क्षेत्र में मिली टाउनी राजाह तितली वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची-II में संरक्षित है। किसी क्षेत्र में इसका मिलना वहां के बेहतर वन पारितंत्र का संकेत माना जाता है। रेडब्रेस्ट आकर्षक और बेहद कम दिखाई देने वाली स्वॉलोटेल तितली है, जबकि टेललेस पुशब्लू सीमित दायरे में मिलने वाली दुर्लभ प्रजाति है। डस्की बुशब्लू सामान्य तौर पर बेहद कम दिखाई देती है। वहीं सिक्स-बार स्वॉर्डटेल अपनी खूबसूरत बनावट और दुर्लभता के कारण खास मानी जाती है। कॉमन मॉटल भी सूक्ष्म आकार की कम दिखाई देने वाली तितली है।

कोट

तितलियों की अलग-अलग प्रजाति भिन्न-भिन्न पेड़ों की पत्तियों पर अंडे देती हैं। भोजन में भी वह अलग-अलग फूलों का रस ग्रहण करती हैं। सौंग क्षेत्र में होस्ट और नेक्टर पौधों की बहुतायत के चलते तितलियों को सुरक्षित आवास और भरपूर भोजन मिलता है। इसी कारण सौंग में तितलियों की कई प्रजातियां एक साथ पाई जा रही हैं।



डाॅ. शंकर कुमार, खोजकर्ताप्राध्यापक, डिग्री कॉलेज रानीखेत

कोट

सौंग में उतीस का घना जंगल होने के कारण वातावरण में कार्बन की उपस्थिति कम है। यहां पूरे जिले की सर्वाधिक तितलियां पाई जाती हैं। दुर्लभ तितलियों का यहां पाया जाना पारिस्थितिकी तंत्र के लिए सुखद संकेत है। अगर क्षेत्र में विशेषज्ञों के माध्यम से गणना कराई जाए तो शायद कई दुर्लभ तितलियां और मिलेंगी।




दीपक कुमार, खोजकर्ताप्राध्यापक, डिग्री कॉलेज कपकोट

कोट

जिले में दुर्लभ तितलियों का मिलना यहां की जैव विधिवता के लिए अच्छे संकेत हैं। विभाग की ओर से सौंग क्षेत्र में पाई जाने वाली तितलियों की गणना कराने का प्रयास किया जाएगा।



आदित्य रत्न, डीएफओ, बागेश्वर


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