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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Almora News ›   The rules and regulations of the government are heavy on the life of the child

सरकार के नियम और कानून बच्ची की जिंदगी पर भारी

Tue, 13 Jun 2017 10:31 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो अल्मोड़ा।
अमर उजाला ब्यूरो अल्मोड़ा। Updated Tue, 13 Jun 2017 10:31 PM IST
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प्रदेश में बनाए गए नियम, कानून जनता पर भारी पड़ रहे हैं। शासन द्वारा नामित कार्डियोलाजिस्ट से आपरेशन का स्वीकृति पत्र नहीं मिलने पर राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत ओपन हार्ट सर्जरी के लिए फोर्टिस अस्पताल देहरादून भेजी गई बीपीएल परिवार की 13 वर्षीय बालिका को बिना आपरेशन किए ही लौटना पड़ा है। यहीं नहीं खुशियों की सवारी वाहन ने बालिका और उसके परिजनों को घर के समीप रोड हेड तक पहुंचाने के बजाए हल्द्वानी बस स्टेशन पर ही उतार दिया। इसके बाद परिजन टैक्सी से गंभीर रूप से बीमार बालिका को देवड़ा गांव ले आए हैं।      

आरबीएसके के तहत सरकारी स्कूलों में कक्षा एक से आठवीं तक पढ़ने वाले बच्चों को सरकार निशुल्क स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराती है। कार्यक्रम के तहत डाक्टरों ने अप्रैल में भैंसियाछाना ब्लॉक के आदर्श जूनियर हाईस्कूल चंद्रकोट देवड़ा में बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। कक्षा आठ की छात्र ज्योति आर्या (13) स्व. रमेश राम (देवड़ा गांव) गंभीर हृदय रोग से पीड़ित मिली। परिजन उसे कार्यक्रम के बेस अस्पताल स्थित डिस्ट्रिक अरली इंफोरमेशन सेंटर (डीईआईसी) लाए। सेंटर ने सात जून को खुशियों की सवारी वाहन से ज्योति को फोर्टिस अस्पताल देहरादून भेजा। परिजन आठ जून को ज्योति को लेकर फोर्टिस अस्पताल पहुंचे और डाक्टर को दिखाया। डाक्टरों के मुताबिक ज्योति की ओपन हार्ट सर्जरी होनी है, लेकिन अस्पताल ने ज्योति को भर्ती नहीं किया। 
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अस्पताल प्रशासन ने शासन द्वारा पैनल में नामित कार्डियोलॉजिस्ट से स्वीकृति पत्र लाने के बाद ही भर्ती करने की बात कही। जब ज्योति के परिजनों ने संबंधित डाक्टर की तलाश की तो पता चला कि शासन द्वारा नामित कार्डियोलाजिस्ट का तबादला बीडी पांडे अस्पताल नैनीताल हो गया है। डाक्टर का स्वीकृति पत्र नहीं मिलने से अस्पताल ने ज्योति को भर्ती करने में असमर्थता जता दी। 10 जून को खुशियों की सवारी वाहन से परिजन ज्योति को लेकर वापस घर की ओर रवाना हुए। ज्योति के ताऊ दीवान राम ने बताया कि खुशियों की सवारी वाहन ने उन्हें घर पहुंचाने के बजाए सायं पांच बजे हल्द्वानी बस स्टेशन में ही छोड़ दिया। जबकि नियमानुसार देवड़ा गांव के समीप रोड हेड तक मरीज को पहुंचाया जाना चाहिए था। इसके बाद दीवान राम टैक्सी से ज्योति को घर लाए। गंभीर बीमार ज्योति को उपचार नहीं मिलने से उसकी हालत खराब हो रही है। उसे जल्द उपचार की जरूरत है।       

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