सियासत: छात्रसंघ चुनाव के नतीजों ने बढ़ाई विस चुनाव से पहले सियासी हलचल, बीजेपी में उत्साह; कांग्रेस में टेंशन
अल्मोड़ा के एसएसजे विश्वविद्यालय समेत जिले के विभिन्न महाविद्यालयों में एबीवीपी, एनएसयूआई, यूएसएफ और निर्दलीय प्रत्याशियों के बीच मुकाबला हुआ।
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आगामी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले जिले भर के महाविद्यालयों में संपन्न हुए छात्रसंघ चुनाव के नतीजों ने राजनीतिक दलों में भी हलचल तेज कर दी है। अल्मोड़ा के एसएसजे विश्वविद्यालय समेत जिले के अलग-अलग महाविद्यालयों में एबीवीपी, एनएसयूआई, यूएसएफ और निर्दलीय प्रत्याशियों के बीच मुकाबला रहा। इन नतीजों को युवा मतदाताओं के बीच राजनीतिक संगठनों की पकड़ और सक्रियता के लिटमस टेस्ट के रूप में देखा जा रहा है।
एबीवीपी का दबदबा, दन्या में पूरा पैनल निर्विरोध
चुनावी नतीजों में एबीवीपी का प्रदर्शन सबसे शानदार रहा। अल्मोड़ा एसएसजे परिसर, सोमेश्वर महाविद्यालय, गुरुड़ाबांज और दन्या महाविद्यालय में एबीवीपी के प्रत्याशियों ने अध्यक्ष पद पर परचम लहराया। दन्या महाविद्यालय में एबीवीपी ने क्लीन स्वीप करते हुए पूरे पैनल को निर्विरोध निर्वाचित कराने में सफलता हासिल की।
एनएसयूआई को मिली सीमित सफलता, निर्दलियों और यूएसएफ का भी चला जोर
कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई को इन चुनावों में सीमित सफलता से ही संतोष करना पड़ा। एनएसयूआई समर्थित प्रत्याशी ने केवल शीतलाखेत महाविद्यालय में अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की। दूसरी ओर निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी अपनी ताकत का अहसास कराया। रानीखेत, द्वाराहाट, सल्ट और लमगड़ा समेत कई महाविद्यालयों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने बाजी मारकर प्रमुख छात्र संगठनों के समीकरण बिगाड़ दिए। वहीं, चौखुटिया और स्याल्दे में उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) की छात्र इकाई ''यूएसएफ'' के प्रत्याशियों ने अध्यक्ष पद जीतकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।
विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों की बढ़ी नजरें
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन नतीजों का असर स्थानीय राजनीति पर साफ दिखेगा। खासकर अल्मोड़ा, सोमेश्वर और जागेश्वर विधानसभा क्षेत्रों में एबीवीपी की जीत से भाजपा खेमे में जबरदस्त उत्साह है जबकि सीमित सफलता ने कांग्रेस की चिंताएं बढ़ा दी हैं। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए राजनीतिक दलों की नजर अब युवाओं और छात्र संगठनों की गतिविधियों पर रहेगी। हालांकि छात्रसंघ चुनाव कॉलेज स्तर के मुद्दों और स्थानीय समीकरणों पर भी निर्भर करते हैं, इसलिए इनके नतीजों को विधानसभा चुनाव का सीधा संकेत मानना जल्दबाजी होगी।