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नाम पर्यटन नगरी पर यहां नहीं है सीवर लाइन

Wed, 30 Nov 2016 11:10 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो अल्मोड़ा
अमर उजाला ब्यूरो अल्मोड़ा Updated Wed, 30 Nov 2016 11:10 PM IST
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The name is not on the tourist city sewer line
इस तरह गंदगी से बजबजा रहे हैं रानीखेत के खुले नाले - फोटो : अमर उजाला

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पर्यटन नगरी को वर्षों बाद भी सीवर लाइन नसीब नहीं हो सकी है। कई इलाकों में मल निस्तारण की उचित व्यवस्था नहीं है। इन लोगों के शौचालय खुले नालों से जुड़े हुए हैं। जिसके चलते अधिकांश बड़े नाले गंदगी से पटे रहते हैं। ऐसे लोगों के लिए पक्के पिटों की व्यवस्था भी अभी तक पूरी नहीं हो सकी है। कुछ लोगों के लिए सार्वजनिक पिट बन चुके हैं।


 मालूम हो कि नगर में सीवर लाइन की मांग वर्षों से चली आ रही है। 1988 में नगर में मिनी सीवर लाइन स्वीकृत हुई। पांच लाख की धनराशि से छोटी योजना बनी, लेकिन इस योजना में होटल व्यवसायी और कुछ अन्य लोगों को ही जोड़ा गया। छावनी उपाध्यक्ष मोहन नेगी का कहना है कि लंबे समय से संघर्ष करने के बाद भी सीवर लाइन नहीं बन पाना दुर्भाग्यपूर्ण है। पर्यटन नगरी होने के कारण पर्यटक कड़वे अनुभव लेकर लौटते हैं।
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कहा कि कैंट बोर्ड को मल निस्तारण पिट निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध करानी चाहिए। इधर,  नगर के हंडिया मोहल्ला, कुरेशियन मोहल्ला आदि स्थानों पर पक्के पिटों की व्यवस्था नहीं होने के कारण इन लोगों के शौचालय पिट सीधे नालों से जुड़े हुए हैं। गत वर्ष कैंट ने इसके खिलाफ अभियान चलाकर नालों से जुड़े कुछ पाइप लाइनों को ध्वस्त किया था। छावनी परिषद ने कहा था कि जिन लोगों के पास अपनी जमीन है वह पक्के पिट बनवाएं, जिसके पास भूमि का अभाव है उसके लिए पांच छह मवासों के लिए सामूहिक पक्का पिट बनेगा। हालांकि कुछ लोगों के लिए सामूहिक पिट बन चुके हैं, लेकिन पक्के पिट बनाने की योजना अभी तक परवान नहीं चढ़ सकी है।
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कोट---
 2003-04 में सीवर लाइन के लिए पांच करोड़ का प्रस्ताव निदेशालय को भेजा गया था, लेकिन मंजूरी नहीं मिली। अब पुन: कैंट सीवर लाइन के लिए शीघ्र आर्केटेक्ट से सर्वे कराने पर विचार कर रही है। सरकार के आदेशों के बाद कच्चे शौचालय हटाने का निर्णय हुआ था, कुछ लोगों को सामूहिक पिट से जोड़ दिया गया है, कुछ पक्के पिट बनने हैं। बड़े नालों में पहले से अधिक सुधार है।
पीएस फर्त्याल, स्वच्छता अधीक्षक कैंट बोर्ड

 
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