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Almora News: जंगलों बै गुणीं-बानर ऐगिना, खेती- पाति चौपट...

Sun, 05 Apr 2026 11:22 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा Updated Sun, 05 Apr 2026 11:22 PM IST
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The monkeys and the hyenas are roaming in the forests, agriculture is ruined...
द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक जब एक ही घेरे में झोड़ा गाते हैं तो यह नजारा कुमाऊं की आत्मा को जीवंत कर देता है। पहाड़ों में झोड़ा गायन लोक जीवन, आस्था और सामाजिक एकता का सबसे मजबूत प्रतीक बना हुआ है। द्वाराहाट विकासखंड के विभिन्न क्षेत्रों में ग्रामीणों ने झोड़ा गायन की परंपरा को जीवंत रखा है।
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झोड़ा गायन से पलायन से वीरान हो रहे गांवों में सांस्कृतिक विरासत मजबूत हो रही है। चैत्र मास की संक्रांति (फूलदेई) से विजयपुर, असगोली, धन्यारी आदि क्षेत्रों में कुमाऊंनी झोड़ा गायन की शुरूआत हुई। पाली पछाऊं के ऐतिहासिक स्याल्दे विखोती मेले के समापन तक झोड़ा गायन किया जाएगा। वैशाख के अंतिम सोमवार तक मासी में आहूत सोमनाथ मेले तक भी झोड़ों का गायन गांवों में होता है।
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बता दें कि कुमाऊं में गाए जाने वाले झोडों का सूत्र भी यही से शुरू होता है। झोडों में खोल दे माता खोल भवानी धार मा केवाड़ा..., शराब न पीने की अपील करते हुए जब थैलियों में शराब आती थी तब लोगों को इस तरह जागृत किया जाता था पहाड़ा का दाज्यू न पियो शराबा लाल लाल थैली नाम गुलाबा...। वहीं अब लाल बोतल शराबा तू छै बड़ी खराबा... के साथ ही अन्य झोडों का गायन किया जाता है। झोडा गायन ऐतिहासिक स्याल्दे मेला 15 अप्रैल तक जारी रहेगा।
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झोडों में उत्तराखंड राज्य बनने के बाद पहाडों की स्थिति को बयां करते हुए उत्तराखंड राज्य बणी बे खालि है गिना गौं, बाघ बानरा बौई रईं हम कथा हूं जूं., गौंनू गौंनू शराब पुजिगे पांणि कि हैगे पट्ट, जंगलों बै गुणीं बानर ऐगिना खेती पाति चौपट... झोड़े गाए जा रहे हैं। पलायन के बाद गांवों की हालत को प्रदर्शित करता बहू सास संवाद की एक बानगी इस झोड़े में दिखती है घर धुरी में बानरा भैरीं स्यारी में सुवंरा यति हिट वे सासु दिल्ली नैह जूलों फसका मारियै वती। पलायन पर आधारित झोड़
बागा उड्यार बनिगे बाखई जभै गजोरू बलि, टूटि खानरी त्वी रौ सासु मीं नैहै जानूं तली..खूब गाया जाता है।

गांव में पानी की कमी लेकिन शराब की बहुतायत व आग लगने से जंगल जलने के बाद नौकरशाहों की मौज पर गोंनू में हैगे पांणी की पटा शराबै की धका धकी धुर जंगला आग लागि गो सैपूं की चकाचक...गायन गाया।


स्याल्दे विखोती मेले में जाने की तैयारी और महिलाओं की भूमिका पर द्वारहाटा विखोती म्यल लागी रौ, धर अनुली चहा कितली -खित शेरूआ पति, मैंसों हैबेरा सैंणी होश्यारा, बणगीं सभापति... आदि झोडों की झंकार जारी है।


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