{"_id":"5da1c52e8ebc3e93a3344211","slug":"the-life-of-the-villagers-of-pestaudavar-is-really-like-a-mountain-ranikhet-news-hld3600770178","type":"story","status":"publish","title_hn":"पस्तौड़ावार के ग्रामीणों की जिंदगी सचमुच पहाड़ जैसी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पस्तौड़ावार के ग्रामीणों की जिंदगी सचमुच पहाड़ जैसी
विज्ञापन
पस्तौड़ावार के दुर्गम पैदल रास्ते से डोली में रखकर सड़क तक गर्भवती को लाते ग्रामीण। अमर उजाला
- फोटो : RANIKHET
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रानीखेत (अल्मोड़ा)। तहसील के सुदूरवर्ती पस्तौड़ावार के ग्रामीणों की जिंदगी सचमुच पहाड़ जैसी ही है। शुक्रवार को पंचायत चुनाव का बहिष्कार करने के बाद गांव की एक महिला को प्रसव पीड़ा हुई। जिससे ग्रामीणों के हाथ-पांव फूल गए। आनन-फानन में डोली का इंतजाम कर ग्रामीणों ने महिला को रात्रि में गांव से चार किमी पैदल ले जाकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया। यहां से एंबुलेंस से उसे राजकीय अस्पताल लाए।
पस्तौड़ावार के ग्रामीण ड्योड़ाखाल मोटर मार्ग के किमी 10 से गांव के लिए सड़क मार्ग की मांग पिछले तीन दशकों से कर रहे हैं, लेकिन आज तक हर बार वह झूठे आश्वासनों के माध्यम से छले जाते रहे हैं। बताया जा रहा है कि गांव के लिए मार्ग स्वीकृत है, लेकिन वित्तीय स्वीकृति नहीं मिल पा रही है, इसके लिए ग्रामीण मुख्यमंत्री से भी मिल चुके हैं। 2017 में ग्रामीणों ने विधानसभा चुनाव का बहिष्कार किया था, इस बार पंचायत चुनाव में भी गांव से एक वोट नहीं पड़ा।
ग्रामीणों के अनुसार शुक्रवार की रात्रि आठ बजे श्याम सुंदर की पत्नी आरती को तेज प्रसव पीड़ा हुई। ग्रामीणों की सतर्कता से चलते महिला को समय पर अस्पताल पहुंचा दिया गया। ग्रामीणों को महिला को डोली में रखकर चार किमी की पैदल दूरी नापनी पड़ी। ग्रामीणों ने बताया कि इससे पहले समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण ग्रामीण खुशाल सिंह की मौत हो गई। महिला को डोली में लाने वालों में कुंदन सिंह, वीरेंद्र सिंह, उमेश, गुड्डू, नीरज, रवि, लक्ष्मण सिंह आदि शामिल हैं। ग्रामीणों ने कहा कि सड़क बनने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
पस्तौड़ावार के ग्रामीण ड्योड़ाखाल मोटर मार्ग के किमी 10 से गांव के लिए सड़क मार्ग की मांग पिछले तीन दशकों से कर रहे हैं, लेकिन आज तक हर बार वह झूठे आश्वासनों के माध्यम से छले जाते रहे हैं। बताया जा रहा है कि गांव के लिए मार्ग स्वीकृत है, लेकिन वित्तीय स्वीकृति नहीं मिल पा रही है, इसके लिए ग्रामीण मुख्यमंत्री से भी मिल चुके हैं। 2017 में ग्रामीणों ने विधानसभा चुनाव का बहिष्कार किया था, इस बार पंचायत चुनाव में भी गांव से एक वोट नहीं पड़ा।
विज्ञापन
ग्रामीणों के अनुसार शुक्रवार की रात्रि आठ बजे श्याम सुंदर की पत्नी आरती को तेज प्रसव पीड़ा हुई। ग्रामीणों की सतर्कता से चलते महिला को समय पर अस्पताल पहुंचा दिया गया। ग्रामीणों को महिला को डोली में रखकर चार किमी की पैदल दूरी नापनी पड़ी। ग्रामीणों ने बताया कि इससे पहले समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण ग्रामीण खुशाल सिंह की मौत हो गई। महिला को डोली में लाने वालों में कुंदन सिंह, वीरेंद्र सिंह, उमेश, गुड्डू, नीरज, रवि, लक्ष्मण सिंह आदि शामिल हैं। ग्रामीणों ने कहा कि सड़क बनने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
विज्ञापन