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संसाधनों के अभाव में पिछड़ती जा रही रीठागाड़ की उपजाऊ घाटी
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भैंसियाछाना विकासखंड की रीठागाड़ घाटी
- फोटो : ALMORA
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धौलछीना (अल्मोड़ा)। भैसियाछाना विकासखंड के सरयू क्षेत्र में स्थित तल्ला रीठागाड़ घाटी संसाधनों के अभाव में पिछड़ती जा रही है। उत्पादन की दृष्टि से यह क्षेत्र बेहद महत्वपूर्ण है। इसके बाद भी यहां के गांवों में सिंचाई सुविधा नहीं है। शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं से भी यहां के लोग वंचित हैं। इसी कारण यहां से लोग पलायन कर रहे हैं। नाली जिंगल सरयू नहर से मात्र पांच किमी दूरी पर स्थित नाली गांव तक ही सिंचाई हो पा रही है।
साल, चीड़, आंवला, बेल, मालू, सागौन, खैरा, आदि उपयोगी वन संपदा वाले वृक्षों से घिरी इस हरी-भरी सरयू घाटी में गेहूं, धान, मक्का, उड़द, गहत, गडेरी, आम, नाशपाती, अमरूद, केला, पपीता, लीची आदि का उत्पादन प्रचुर मात्रा में होता है लेकिन जरूरी सुविधाओं के अभाव के कारण यह क्षेत्र उपेक्षित है। सिंचाई सुविधा न होना इस क्षेत्र की बड़ी समस्या है। आवागमन की सुविधा न होने से भी उत्पादन प्रभावित होता है। आठ साल से निर्माणाधीन सेरघाट-कुंज किमौला सड़क पर पुल न बनने से मुख्य सड़क तक रोड नहीं जुड़ सकी है। इससे स्थानीय ग्रामीण अपने उत्पादों का निर्यात स्थानीय बाजारों तक नहीं कर पा रहे हैं। सड़क निर्माण के नाम पर बरती गई लापरवाही से गांव के आंतरिक मार्ग, पेयजल योजनाएं, सिंचाई की गूल और उपजाऊ खेत भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं। लोग सिर पर सामान ढोने के लिए मजबूर हैं। अधिक दूरी के लिए खच्चरों का सहारा लेना पड़ता है। आधुनिक कृषि विधियों का अभाव और बीज, खाद, बागवानी की उचित व्यवस्था न होने से भी यहां की खेती पिछड़ रही है, जिसका सीधा असर क्षेत्र के उत्पादन और किसानों पर पड़ रहा है।
फार्मासिस्ट के भरोसे एकमात्र स्वास्थ्य उपकेंद्र
धौलछीना। तल्ली नाली में एकमात्र स्वास्थ्य उपकेंद्र फार्मासिस्ट के भरोसे संचालित है। सेराघाट के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में जरूरी संसाधन नहीं हैं। तत्ला रीठागाड़ क्षेत्र में आपातकालीन उपचार के लिए कोई सुविधा नहीं है। कभी यहां पर मरीजों को 108 सेवा का भी लाभ नहीं मिल पाता हैै। इससे मरीजों को इलाज के लिए बड़े शहरों की दौड़ लगानी पड़ती है।
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नेटवर्क समस्या से लोग परेशान
धौलछीना। डिजिटल इंडिया के इस दौर में भी इस विकासखंड के लोग नेटवर्क की समस्या से परेशान हैं। लोगों के पास दूरसंचार के संसाधन तो हैं लेकिन कमजोर नेटवर्क के कारण उसका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। घाटी के कई क्षेत्रों में आज भी मोबाइल के नेटवर्क काम नहीं कर पाते, जिससे लोगों की अपने परिचितों से दूरी बनी है। क्षेत्र में बिजली की सुविधा तो है लेकिन लोवोल्टेज और रोजाना होने वाली आंच मिचौली से लोग परेशान हैं।
दूरस्थ क्षेत्र होने के कारण कई गांवों में समस्याएं हैं लेकिन ब्लॉक स्तर पर निस्तारण की जाने वाली समस्याओं का समाधान का प्रयास किया जा रहा है। ब्लॉक स्तर पर मनरेगा आदि योजनाओं से ग्रामीणों को जोड़ने का प्रयास भी किया गया है। गांवों में चौपाल, शिविर लगाकर समस्याएं सुनी जा रहीं हैं। - कृपाल सिंह भोज, बीडीओ, भैसियाछाना।
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साल, चीड़, आंवला, बेल, मालू, सागौन, खैरा, आदि उपयोगी वन संपदा वाले वृक्षों से घिरी इस हरी-भरी सरयू घाटी में गेहूं, धान, मक्का, उड़द, गहत, गडेरी, आम, नाशपाती, अमरूद, केला, पपीता, लीची आदि का उत्पादन प्रचुर मात्रा में होता है लेकिन जरूरी सुविधाओं के अभाव के कारण यह क्षेत्र उपेक्षित है। सिंचाई सुविधा न होना इस क्षेत्र की बड़ी समस्या है। आवागमन की सुविधा न होने से भी उत्पादन प्रभावित होता है। आठ साल से निर्माणाधीन सेरघाट-कुंज किमौला सड़क पर पुल न बनने से मुख्य सड़क तक रोड नहीं जुड़ सकी है। इससे स्थानीय ग्रामीण अपने उत्पादों का निर्यात स्थानीय बाजारों तक नहीं कर पा रहे हैं। सड़क निर्माण के नाम पर बरती गई लापरवाही से गांव के आंतरिक मार्ग, पेयजल योजनाएं, सिंचाई की गूल और उपजाऊ खेत भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं। लोग सिर पर सामान ढोने के लिए मजबूर हैं। अधिक दूरी के लिए खच्चरों का सहारा लेना पड़ता है। आधुनिक कृषि विधियों का अभाव और बीज, खाद, बागवानी की उचित व्यवस्था न होने से भी यहां की खेती पिछड़ रही है, जिसका सीधा असर क्षेत्र के उत्पादन और किसानों पर पड़ रहा है।
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फार्मासिस्ट के भरोसे एकमात्र स्वास्थ्य उपकेंद्र
धौलछीना। तल्ली नाली में एकमात्र स्वास्थ्य उपकेंद्र फार्मासिस्ट के भरोसे संचालित है। सेराघाट के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में जरूरी संसाधन नहीं हैं। तत्ला रीठागाड़ क्षेत्र में आपातकालीन उपचार के लिए कोई सुविधा नहीं है। कभी यहां पर मरीजों को 108 सेवा का भी लाभ नहीं मिल पाता हैै। इससे मरीजों को इलाज के लिए बड़े शहरों की दौड़ लगानी पड़ती है।
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नेटवर्क समस्या से लोग परेशान
धौलछीना। डिजिटल इंडिया के इस दौर में भी इस विकासखंड के लोग नेटवर्क की समस्या से परेशान हैं। लोगों के पास दूरसंचार के संसाधन तो हैं लेकिन कमजोर नेटवर्क के कारण उसका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। घाटी के कई क्षेत्रों में आज भी मोबाइल के नेटवर्क काम नहीं कर पाते, जिससे लोगों की अपने परिचितों से दूरी बनी है। क्षेत्र में बिजली की सुविधा तो है लेकिन लोवोल्टेज और रोजाना होने वाली आंच मिचौली से लोग परेशान हैं।
दूरस्थ क्षेत्र होने के कारण कई गांवों में समस्याएं हैं लेकिन ब्लॉक स्तर पर निस्तारण की जाने वाली समस्याओं का समाधान का प्रयास किया जा रहा है। ब्लॉक स्तर पर मनरेगा आदि योजनाओं से ग्रामीणों को जोड़ने का प्रयास भी किया गया है। गांवों में चौपाल, शिविर लगाकर समस्याएं सुनी जा रहीं हैं। - कृपाल सिंह भोज, बीडीओ, भैसियाछाना।