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जनजातियों की कला संस्कृति के संरक्षण पर जोर
ब्यूरो /अमर उजाला, अल्मोड़ा
Updated Tue, 06 Oct 2015 10:36 PM IST
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एसएसजे परिसर अल्मोड़ा के चित्रकला विभाग में आयोजित तीन दिवसीय जनजातीय कला विषय पर सेमिनार के समापन पर मुख्य अतिथि जीबी पंत संस्थान कोसी कटारमल के प्रभारी निदेशक एसके नंदी ने कहा कि आधुनिक दौर में जनजातियों की कला विलुप्ति के कगार पर है। इसके संरक्षण के लिए प्रयास किए जाने चाहिए।
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मुख्य अतिथि ने प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए। सेमिनार में ललित आर्या, रघुवीर रौकली, पवनेश ठकुराठी, डा. वीडीएस नेगी, मनोहर आर्या, पल्लवी लोहानी, अवंतिका पराशर, कला जोशी, आयुशी वर्मा, रूचिका श्रीवास्तव, डा. सरोज भार्गव, राजीव मंडल, डा. सोनिका, फारूक अहमद, रंजना बोनाल, अब्दुल हजीज, प्रवीण पांडे, दीपिका कांडपाल ने जन जातियों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर आलेख प्रस्तुत किए।
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प्रो. शेखर जोशी ने सभी का आभार जताया। कार्यक्रम में डा. नमिता त्यागी, डा. रीना सिंह, प्रो. सुनील कुमार, प्रो. एससी जोशी, डा. संजीव आर्या, डा. सोनू द्विवेदी, प्रो. भूषण रावत, मीता खन्ना, डा. कुसुमलता, प्रो. केसी जोशी, कनक बिष्ट, नेहा बिष्ट, रजनी, सोनम, डा. तेजपाल सिंह, प्रकाश भट्ट, रघुवीर रौकली, सागर भैसोड़ा, योगेश कुमार, दीपक कनवाल, मनीष जोशी, रुचि मर्तोलिया, रीता तिवारी, सुनीता भौर्याल, नाजिम अली आदि मौजूद थे। संचालन डा. संजीव आर्या ने किया।
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