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‘आतंकवाद नहीं आध्यात्मवाद है जीवन जीने का रास्ता’
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
Updated Thu, 06 Oct 2016 11:13 PM IST
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जागेश्वर में ध्यानस्थ योग साधक।
- फोटो : अमर उजाला
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जागेश्वर पहुंचे विदेशी मेहमानों समेत परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के स्वामी चिदानंद महाराज मानते हैं कि जागेश्वर शांति का धाम है। यहां से लौटकर वह लोग दुनिया को बताएंगे कि आतंकवाद नहीं आध्यात्मवाद है जीवन जीने का असली रास्ता। सभी का मानना है कि विश्वभर में शांति स्थापित करने में योग महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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जागेश्वर में हो रहे तीन दिवसीय योग महोत्सव के दूसरे दिन अमर उजाला से बातचीत करते हुए परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के स्वामी चिदानंद महाराज का कहना है कि दृष्टि बदलने से सृष्टि बदलती है। लड़कर थोड़ी जमीन तो जीत सकते हैं, लेकिन आध्यात्म पथ पर चलकर हम लोगों का जमीर तक बदल सकते हैं। उन्होंने बताया कि अगली बार योग महोत्सव को पांच दिन बढ़ाने पर विचार होगा। इंग्लैंड की एलीस पहली बार जागेश्वर पहुंची हैं। उन्होंने बताया कि वह पिछले तीन चार साल से योग सीख रही हैं। उनके देश में लोग कमरों के अंदर कुछ घंटे योग सीखते हैं, लेकिन भारत में 24 घंटे योग होता है। उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा आध्यात्मिक अनुभव उन्हें मेडिटेशन से मिलता है। जिसका अनुभव उन्हें जागेश्वर धाम आकर ही मिला।
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आस्ट्रेलिया निवासी 50 वर्षीय जान दूसरी बार जागेश्वर पहुंचे हैं। उन्होंने बातचीत में बताया कि योग शारीरिक, मानसिक और आत्मा में बदलाव लाता है। वह 35 सालों से योग कर रहे हैं और उनके देश आस्ट्रेलिया में भी पिछले 10 सालों में योग के प्रति क्रेज बढ़ा है। परमार्थ निकेतन की साध्वी भगवती सरस्वती जिन्होंने कई साल पहले भारत आकर अपना जीवन योग को समर्पित कर दिया, का कहना है कि इन 20 सालों में उन्हें योग से वह सब कुछ मिला जो जीवन जीने के लिए जरूरी है।
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