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Almora News: सांस्कृतिक रंग में रंगा स्याल्दे बिखौती मेले
Mon, 13 Apr 2026 11:17 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Mon, 13 Apr 2026 11:17 PM IST
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द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। पाली पछांऊ क्षेत्र के ऐतिहासिक स्याल्दे बिखौती मेले का शुभारंभ सोमवार को उत्तराखंड की काशी के नाम से विख्यात विभांडेश्वर मंदिर से हुआ। इस अवसर पर विभिन्न सांस्कृतिक टीमों एवं विद्यालयों ने रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए।
राजकीय इंटर कॉलेज बटुलिया, आदर्श इंटर कॉलेज सुरईखेत, राजकीय प्राथमिक विद्यालय विभांडेश्वर, राजकीय जूनियर हाईस्कूल विभांडेश्वर, सिमलगांव एवं बेढूली ग्राम पंचायत के बच्चों ने आंचलिक संस्कृति से जुड़े कार्यक्रमों की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं।
समारोह में वक्ताओं ने मेलों को संस्कृति का ध्वजवाहक बताते हुए कहा कि यह हमारी परंपराओं और विरासत को जीवित रखने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। गुप्त सरस्वती, सुरभि एवं नन्दिनी की त्रिवेणी संगम स्थल पर आयोजित इस चार दिवसीय मेले का उद्घाटन मुख्य पुजारी हरीश चंद्र पुजारी तथा मुख्य अतिथि ब्लॉक प्रमुख डॉ. आरती किरौला ने किया।
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वहां विधायक मदन बिष्ट, पूर्व विधायक पुष्पेश त्रिपाठी, महेश नेगी, मेला समिति अध्यक्ष हेम रावत, विखोती मेला अध्यक्ष रमेश पुजारी, नगर पंचायत अध्यक्ष संगीता आर्या, भुवन कठायत, आशुतोष शाही आदि थे।
ढोल-नगाड़ों के साथ ग्रामीणों ने की परिक्रमा
स्याल्दे बिखौती मेला उद्घाटन के अवसर पर रंणा गांव के ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों, निशानों के साथ मंदिर की परिक्रमा की। पर्यावरण बचाने के लिए सरकारी जंगल लछिमा बाजा नि काटा, लछिमा बाजा नि काटा, जै शिवा शंकर, कैलाशा वासी आदि का गायन किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम देर रात तक जारी रहे।
कवि सम्मेलन का हुआ आयोजन
द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। स्याल्दे बिखौती मेले के अवसर पर बालप्रहरी, सृजन संस्था और भारत ज्ञान विज्ञान समिति के संयुक्त तत्वावधान में नगर पंचायत द्वाराहाट के सभागार में कवि सम्मेलन आयोजित किया गया जिसमें कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से सामाजिक, सांस्कृतिक और समसामयिक विषयों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
शंकरदत्त तिवारी ने अपनी कविता में कहा कि सोती सुंदरी को जगाने 100 साल बाद आएगा फिर एक राजकुमार। वहीं वरिष्ठ बाल साहित्यकार रमेश पंत ने रेत में कश्ती चलाना चाहते हैं के माध्यम से अपनी बात रखी। कार्यक्रम का संचालन भारत ज्ञान विज्ञान समिति के ब्लॉक अध्यक्ष गिरीश मठपाल ने किया। वहां वरिष्ठ पत्रकार चारू तिवारी, केपीएस अधिकारी, बीएस अधिकारी, दिनेश रावत, नवल सिंह अधिकारी, प्रकाश जोशी, प्रमोद कांडपाल सहित कई रचनाकारों ने कविताएं पेश कीं।
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राजकीय इंटर कॉलेज बटुलिया, आदर्श इंटर कॉलेज सुरईखेत, राजकीय प्राथमिक विद्यालय विभांडेश्वर, राजकीय जूनियर हाईस्कूल विभांडेश्वर, सिमलगांव एवं बेढूली ग्राम पंचायत के बच्चों ने आंचलिक संस्कृति से जुड़े कार्यक्रमों की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं।
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समारोह में वक्ताओं ने मेलों को संस्कृति का ध्वजवाहक बताते हुए कहा कि यह हमारी परंपराओं और विरासत को जीवित रखने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। गुप्त सरस्वती, सुरभि एवं नन्दिनी की त्रिवेणी संगम स्थल पर आयोजित इस चार दिवसीय मेले का उद्घाटन मुख्य पुजारी हरीश चंद्र पुजारी तथा मुख्य अतिथि ब्लॉक प्रमुख डॉ. आरती किरौला ने किया।
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वहां विधायक मदन बिष्ट, पूर्व विधायक पुष्पेश त्रिपाठी, महेश नेगी, मेला समिति अध्यक्ष हेम रावत, विखोती मेला अध्यक्ष रमेश पुजारी, नगर पंचायत अध्यक्ष संगीता आर्या, भुवन कठायत, आशुतोष शाही आदि थे।
ढोल-नगाड़ों के साथ ग्रामीणों ने की परिक्रमा
स्याल्दे बिखौती मेला उद्घाटन के अवसर पर रंणा गांव के ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों, निशानों के साथ मंदिर की परिक्रमा की। पर्यावरण बचाने के लिए सरकारी जंगल लछिमा बाजा नि काटा, लछिमा बाजा नि काटा, जै शिवा शंकर, कैलाशा वासी आदि का गायन किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम देर रात तक जारी रहे।
कवि सम्मेलन का हुआ आयोजन
द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। स्याल्दे बिखौती मेले के अवसर पर बालप्रहरी, सृजन संस्था और भारत ज्ञान विज्ञान समिति के संयुक्त तत्वावधान में नगर पंचायत द्वाराहाट के सभागार में कवि सम्मेलन आयोजित किया गया जिसमें कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से सामाजिक, सांस्कृतिक और समसामयिक विषयों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
शंकरदत्त तिवारी ने अपनी कविता में कहा कि सोती सुंदरी को जगाने 100 साल बाद आएगा फिर एक राजकुमार। वहीं वरिष्ठ बाल साहित्यकार रमेश पंत ने रेत में कश्ती चलाना चाहते हैं के माध्यम से अपनी बात रखी। कार्यक्रम का संचालन भारत ज्ञान विज्ञान समिति के ब्लॉक अध्यक्ष गिरीश मठपाल ने किया। वहां वरिष्ठ पत्रकार चारू तिवारी, केपीएस अधिकारी, बीएस अधिकारी, दिनेश रावत, नवल सिंह अधिकारी, प्रकाश जोशी, प्रमोद कांडपाल सहित कई रचनाकारों ने कविताएं पेश कीं।
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