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मानसिक अस्वस्थ व्यक्ति की जिंदगी बदल रहे सिपाही दिलीप
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मानसिक अस्वस्थ की सेवा में जुटे सिपाही दिलीप कुमार।
- फोटो : RANIKHET
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। कोरोना महामारी के दौर में कानून व्यवस्था संभालने के साथ ही पुलिस कई सकारात्मक कार्य भी कर रही है। रानीखेत में सिपाही दिलीप कुमार एक मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति की जिंदगी बदल रहे हैं। इसी कारण दुनिया से बेखबर यह व्यक्ति भी अब समाज को पहचानने लगा है।
रानीखेत में मानसिक रूप से कई अस्वस्थ लोग घूमते हैं। इन्हीं में से एक है विजय। वह वर्षों से गांधी चौक पर खुले आसमान के नीचे रहता है। लॉकडाउन के चलते ऐसे लोगों के सम्मुख भोजन का संकट खड़ा हो गया था। इसी बीच विजय गिरकर घायल हो गया और उसका पैर बुरी तरह से जख्मी हो गया। पुलिस सिपाही दिलीप कुमार अपने निजी खर्चे से विजय के उपचार में जुट गए।
कंपाउंडर का काम करने वाली इरम के साथ मिलकर वह नियमित रूप से उसके पैर की ड्रेसिंग करते रहे। अब उसे नियमित रूप से अस्पताल ले जाकर उसका उपचार कर रहे हैं। लंबी दाड़ी, लंबे बाल वाले विजय को अब नए रूप में देखा जा सकता है। सिपाही दिलीप ने जैसे-तैसे बाल और दाड़ी कटवाई। चौक के पास ही छावनी परिषद के नल से उसे प्रतिदिन नहलाया भी जाता है। विजय को सिपाही दिलीप ने ही लोगों को पहचानना सिखाया। अब विजय समाज को भी पहचानने लगा है। सिपाही दिलीप की इस सेवा भाव की स्थानीय लोगों ने सराहना की है। विजय अब पहले से कहीं अधिक खुश दिखाई दे रहा है। भोजन करने के बाद वह प्लेट कूड़ेदान में डालना नहीं भूलता।
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रानीखेत में मानसिक रूप से कई अस्वस्थ लोग घूमते हैं। इन्हीं में से एक है विजय। वह वर्षों से गांधी चौक पर खुले आसमान के नीचे रहता है। लॉकडाउन के चलते ऐसे लोगों के सम्मुख भोजन का संकट खड़ा हो गया था। इसी बीच विजय गिरकर घायल हो गया और उसका पैर बुरी तरह से जख्मी हो गया। पुलिस सिपाही दिलीप कुमार अपने निजी खर्चे से विजय के उपचार में जुट गए।
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कंपाउंडर का काम करने वाली इरम के साथ मिलकर वह नियमित रूप से उसके पैर की ड्रेसिंग करते रहे। अब उसे नियमित रूप से अस्पताल ले जाकर उसका उपचार कर रहे हैं। लंबी दाड़ी, लंबे बाल वाले विजय को अब नए रूप में देखा जा सकता है। सिपाही दिलीप ने जैसे-तैसे बाल और दाड़ी कटवाई। चौक के पास ही छावनी परिषद के नल से उसे प्रतिदिन नहलाया भी जाता है। विजय को सिपाही दिलीप ने ही लोगों को पहचानना सिखाया। अब विजय समाज को भी पहचानने लगा है। सिपाही दिलीप की इस सेवा भाव की स्थानीय लोगों ने सराहना की है। विजय अब पहले से कहीं अधिक खुश दिखाई दे रहा है। भोजन करने के बाद वह प्लेट कूड़ेदान में डालना नहीं भूलता।
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