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सीतापुर नेत्र अस्पताल की खाली भूमि पर नहीं बन सका कमर्शियल कॉम्प्लेक्स
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खंडहर में तब्दील सीतापुर नेत्र अस्पताल का भवन। संवाद
- फोटो : RANIKHET
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। शिव मंदिर के पास स्थित सीतापुर नेत्र अस्पताल की खाली पड़ी भूमि पर अभी तक छावनी परिषद कमर्शियल कांप्लेक्स का निर्माण नहीं कर पाया है। अस्पताल प्रबंधन पूर्व में ही भूमि छावनी परिषद को हस्तांतरित कर चुका है। देखरेख के अभाव में अस्पताल का भवन जीर्णशीर्ण हाल में पहुंच गया है। यह भवन अराजक तत्वों का अड्डा बने हुए है।
छावनी परिषद की इस भूमि पर 1960 से पूर्व सामान्य अस्पताल था, 1962 में छावनी परिषद ने यहां प्राइमरी स्कूल की स्थापना की। कुछ साल तक स्कूल चला। 1965 में सीतापुर अस्पताल प्रबंधन ने छावनी परिषद से 3.5 एकड़ भूमि 30 साल के लिए लीज पर ली। भूमि को भवन सहित लीज पर लेकर यहां आंखों का बड़ा अस्पताल खुला।
उस वक्त आंखों के अस्पताल बहुत कम थे, भतरौंजखान, भिकियासैंण, सल्ट, चौखुटिया, द्वाराहाट सहित पूरे उपमंडल के नेत्र रोगी यहां इलाज को आते थे। तब यहां डॉक्टर, फार्मेसिस्ट, वार्ड ब्वाय सहित भरा पूरा स्टाफ था। आंखों के ऑपरेशन भी यहीं होते थे। 1969 में यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रभानु गुप्ता ने इस स्थान पर डॉक्टरों के आवास के लिए भवन बनवाया।
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अब देखरेख के अभाव में यह भवन जर्जर है। यहां असामाजिक तत्वों का अड्डा रहता है। जिसके चलते आस पड़ोस के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। 1980 के बाद कई स्थानों पर आंख के अस्पताल खुले, लैंस प्रक्रिया शुरू हो गई, तो सीतापुर अस्पताल में रोगियों की संख्या कम हो गई है। जिस कारण अस्पताल को कुछ साल पहले बंद कर दिया गया है। दूसरी तरफ 1995 में भूमि की लीज भी खत्म हो चुकी थी, जिसे अस्पताल प्रबंधन ने कुछ साल पहले छावनी परिषद को हस्तांतरित कर दी थी।
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छावनी परिषद की इस भूमि पर 1960 से पूर्व सामान्य अस्पताल था, 1962 में छावनी परिषद ने यहां प्राइमरी स्कूल की स्थापना की। कुछ साल तक स्कूल चला। 1965 में सीतापुर अस्पताल प्रबंधन ने छावनी परिषद से 3.5 एकड़ भूमि 30 साल के लिए लीज पर ली। भूमि को भवन सहित लीज पर लेकर यहां आंखों का बड़ा अस्पताल खुला।
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उस वक्त आंखों के अस्पताल बहुत कम थे, भतरौंजखान, भिकियासैंण, सल्ट, चौखुटिया, द्वाराहाट सहित पूरे उपमंडल के नेत्र रोगी यहां इलाज को आते थे। तब यहां डॉक्टर, फार्मेसिस्ट, वार्ड ब्वाय सहित भरा पूरा स्टाफ था। आंखों के ऑपरेशन भी यहीं होते थे। 1969 में यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रभानु गुप्ता ने इस स्थान पर डॉक्टरों के आवास के लिए भवन बनवाया।
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अब देखरेख के अभाव में यह भवन जर्जर है। यहां असामाजिक तत्वों का अड्डा रहता है। जिसके चलते आस पड़ोस के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। 1980 के बाद कई स्थानों पर आंख के अस्पताल खुले, लैंस प्रक्रिया शुरू हो गई, तो सीतापुर अस्पताल में रोगियों की संख्या कम हो गई है। जिस कारण अस्पताल को कुछ साल पहले बंद कर दिया गया है। दूसरी तरफ 1995 में भूमि की लीज भी खत्म हो चुकी थी, जिसे अस्पताल प्रबंधन ने कुछ साल पहले छावनी परिषद को हस्तांतरित कर दी थी।