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ताड़ीखेत ब्लाक के गांवों में छाया पेयजल संकट
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। गर्मी बढ़ने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की समस्या गहराने लगी हैं। बारिश नहीं होने के कारण पारंपरिक पेयजल स्रोत लगभग सूखने की कगार पर हैं। ताड़ीखेत विकासखंड के गांव भी पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। पांडेकोटा, डौरब, तौड़ा, पथुली, सिमोली क्षेत्र में पानी का संकट दूर नहीं हो सका है। पर्याप्त आपूर्ति नहीं होने के कारण हजार से 1200 की आबादी को दूर दराज के पारंपरिक स्रोतों पर निर्भर होना पड़ रहा है। स्रोतों का जलस्तर घटने से भी दिक्कतें बढ़ रही हैं। समस्या को देखते हुए जल संस्थान ने किराए पर टैंकर लेकर पानी बांटने का निर्णय लिया है।
ताड़ीखेत विकासखंड मुख्यालय से लगे पांडेकोटा, डौरब, तौड़ा, नावली, बजीना, ऐराडी, सिमोली, पथुली, पपना आदि क्षेत्रों में लोगों की पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पा रही है। बताया जा रहा है कि दो से तीन दिन छोड़कर पानी उपलब्ध हो रहा है। पानी के लिए ग्रामीण पारंपरिक स्रोतों का रुख कर रहे हैं। स्रोतों का जलस्तर घट रहा है। ऐसे में उनके सम्मुख भारी दिक्कतें खड़ी हो रही हैं। बजीना के पूर्व प्रधान गोपाल सिंह देव ने बताया कि स्रोतों पर जलस्तर कम होने से भी आपूर्ति नहीं हो पा रही है। टैंकर से भी दूर दराज के गांवों में कैसे आपूर्ति हो पाएगी। कई गांवों में ग्रामीणों का पूरा दिन पेयजल जुटाने में व्यतीत हो रहा है। छोटे-छोटे बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं दिन भर पानी की जुगत में लगे हैं। रात में भी प्राकृतिक जल स्रोतों पर पानी के लिए लोग दिखाई दे रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि शीघ्र आपूर्ति बहाल नहीं हुई तो आंदोलन शुरू किया जाएगा।
- बारिश नहीं होने के कारण जल स्रोत सूख गए हैं। स्रोतों पर बेहद कम पानी है। कल एक अप्रेल से किराए के कुछ टैंकर लिए जाएंगे। उनसे आपूर्ति कर व्यवस्था बनाई जाएगी।- सुरेश ठाकुर, ईई, जल संस्थान रानीखेत।
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ताड़ीखेत विकासखंड मुख्यालय से लगे पांडेकोटा, डौरब, तौड़ा, नावली, बजीना, ऐराडी, सिमोली, पथुली, पपना आदि क्षेत्रों में लोगों की पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पा रही है। बताया जा रहा है कि दो से तीन दिन छोड़कर पानी उपलब्ध हो रहा है। पानी के लिए ग्रामीण पारंपरिक स्रोतों का रुख कर रहे हैं। स्रोतों का जलस्तर घट रहा है। ऐसे में उनके सम्मुख भारी दिक्कतें खड़ी हो रही हैं। बजीना के पूर्व प्रधान गोपाल सिंह देव ने बताया कि स्रोतों पर जलस्तर कम होने से भी आपूर्ति नहीं हो पा रही है। टैंकर से भी दूर दराज के गांवों में कैसे आपूर्ति हो पाएगी। कई गांवों में ग्रामीणों का पूरा दिन पेयजल जुटाने में व्यतीत हो रहा है। छोटे-छोटे बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं दिन भर पानी की जुगत में लगे हैं। रात में भी प्राकृतिक जल स्रोतों पर पानी के लिए लोग दिखाई दे रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि शीघ्र आपूर्ति बहाल नहीं हुई तो आंदोलन शुरू किया जाएगा।
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- बारिश नहीं होने के कारण जल स्रोत सूख गए हैं। स्रोतों पर बेहद कम पानी है। कल एक अप्रेल से किराए के कुछ टैंकर लिए जाएंगे। उनसे आपूर्ति कर व्यवस्था बनाई जाएगी।- सुरेश ठाकुर, ईई, जल संस्थान रानीखेत।
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