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पहाड़ की धाविका संगीता ने नेपाल में स्वर्ण जीत कर लहराया तिरंगा
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संगीता किरौला
- फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा। पहाड़ की धाविका संगीता किरौला ने नेपाल में आयोजित पांचवीं इंडो नेपाल चैंपियनशिप में 1500 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीता है।
द्वाराहाट के मल्ली किरौली निवासी संगीता किरौला ने नेपाल में हुई पांचवीं इंडो नेपाल अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप के 1500 मीटर की दौड़ में स्वर्ण पदक जीता है। भारतीय शांति खेल महासंघ (इंडियन पैसिफिक स्पोर्ट्स फेडरेशन) की ओर से 28 से 31 जनवरी तक नेपाल में हुई पांचवीं इंडो नेपाल अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई किया था। 1500 मीटर की दौड़ के फाइनल तक पहुंचने के बाद दोनों देशों की आठ धाविकाओं ने हिस्सा लिया। संगीता को इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए माता पिता की अहम भूमिका रही है। संगीता के पिता हरी सिंह किरौला वन विभाग से सेवानिवृत्त हैं। माता हंसी देवी गृहणी है। दोनों ने बेटी को खेलने के प्रेरित करने के साथ ही हरसंभव सहायता की। संगीता ने अपनी उपलब्धि का श्रेय माता, पिता, कोच को दिया है।
बेटियां अपने को किसी से कमजोर न समझे : संगीता
अल्मोड़ा। संगीता किरौला को बचपन से ही खेलों से बेहद लगाव रहा है। संगीता एक अच्छी एथलीट होने के साथ ही ताईक्वांडों की भी बेहतरीन खिलाड़ी है। लंबी दौड़ और ताइक्वांडों में संगीता अब तक कई पदक जीत चुकी है। संगीता ने 12वीं की पढ़ाई जीआईसी रानीखेत से की। वर्तमान में दिल्ली विश्वविद्यालय में बीए द्वितीय वर्ष में पढ़ती हैं। संगीता वर्ष 2018 और 2019 में भी प्रदेश, राष्ट्रीय स्तर की एथलीट, ताइक्वांडो प्रतियोगिताओं में 50 से अधिक पदक जीत चुकी है। संगीता ने कहा कि बेटियां आज हर क्षेत्र में कामयाबी की बुलंदियों तक पहुंच रही है। माता पिता बेटों की तरह ही बेटियों को भी शिक्षा दिलाएंगे तो एक दिन वह जरूर उनका नाम रोशन करेंगी। संगीता ने कहा कि उत्तराखंड की बेटियां प्रतिभावान है। बेटियां अपने को किसी से कमजोर नहीं समझे। कठिन परिश्रम करने से लक्ष्य में सफलता मिल ही जाती है। उन्होंने कहा कि बेटियां खेलों में भी अपना भविष्य संवार सकती हैं।
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द्वाराहाट के मल्ली किरौली निवासी संगीता किरौला ने नेपाल में हुई पांचवीं इंडो नेपाल अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप के 1500 मीटर की दौड़ में स्वर्ण पदक जीता है। भारतीय शांति खेल महासंघ (इंडियन पैसिफिक स्पोर्ट्स फेडरेशन) की ओर से 28 से 31 जनवरी तक नेपाल में हुई पांचवीं इंडो नेपाल अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई किया था। 1500 मीटर की दौड़ के फाइनल तक पहुंचने के बाद दोनों देशों की आठ धाविकाओं ने हिस्सा लिया। संगीता को इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए माता पिता की अहम भूमिका रही है। संगीता के पिता हरी सिंह किरौला वन विभाग से सेवानिवृत्त हैं। माता हंसी देवी गृहणी है। दोनों ने बेटी को खेलने के प्रेरित करने के साथ ही हरसंभव सहायता की। संगीता ने अपनी उपलब्धि का श्रेय माता, पिता, कोच को दिया है।
बेटियां अपने को किसी से कमजोर न समझे : संगीता
अल्मोड़ा। संगीता किरौला को बचपन से ही खेलों से बेहद लगाव रहा है। संगीता एक अच्छी एथलीट होने के साथ ही ताईक्वांडों की भी बेहतरीन खिलाड़ी है। लंबी दौड़ और ताइक्वांडों में संगीता अब तक कई पदक जीत चुकी है। संगीता ने 12वीं की पढ़ाई जीआईसी रानीखेत से की। वर्तमान में दिल्ली विश्वविद्यालय में बीए द्वितीय वर्ष में पढ़ती हैं। संगीता वर्ष 2018 और 2019 में भी प्रदेश, राष्ट्रीय स्तर की एथलीट, ताइक्वांडो प्रतियोगिताओं में 50 से अधिक पदक जीत चुकी है। संगीता ने कहा कि बेटियां आज हर क्षेत्र में कामयाबी की बुलंदियों तक पहुंच रही है। माता पिता बेटों की तरह ही बेटियों को भी शिक्षा दिलाएंगे तो एक दिन वह जरूर उनका नाम रोशन करेंगी। संगीता ने कहा कि उत्तराखंड की बेटियां प्रतिभावान है। बेटियां अपने को किसी से कमजोर नहीं समझे। कठिन परिश्रम करने से लक्ष्य में सफलता मिल ही जाती है। उन्होंने कहा कि बेटियां खेलों में भी अपना भविष्य संवार सकती हैं।
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