{"_id":"6186cecbd91e7036066aa1c4","slug":"roaming-cattle-in-ranikhet-ranikhet-news-hld4437374119","type":"story","status":"publish","title_hn":"लावारिस जानवरों के आतंक से कब मिलेगी निजात","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लावारिस जानवरों के आतंक से कब मिलेगी निजात
विज्ञापन
कुंपुर लालकुर्ती की बाजार में पसरे लावारिस जानवर। संवाद
- फोटो : RANIKHET
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रानीखेत (अल्मोड़ा)। तमाम दावों के बावजूद नगरवासियों को लावारिस जानवरों के उत्पात से निजात नहीं मिल पा रही है। अनुपयोगी जानवरों को लोग छोड़ दे रहे हैं, यही जानवर बाजार में आकर तमाम तरह की समस्याएं खड़ी कर दे रहे हैं। नगर के अलावा घिंघारीखाल, कुंपुर लालकुर्ती में लावारिश जानवरों का अड्डा बना हुआ है। यह जानवर कई लोग गंभीर रूप से चोटिल कर चुके हैं। कई वाहनों को भी लावारिस जानवर तोड़ चुके हैं। इसके बावजूद छावनी परिषद इन्हें गोसदन नहीं भेज पा रही है।
दुकानदारों की दुकानों को नुकसान, सब्जियां बरबाद कर दे रहे हैं। बाजार के बीचों बीच विचरण करने से कई वाहन चालक गिरकर चोटिल तक हो चुके हैं। इधर, कैंट के स्वच्छता निरीक्षक एपी सिंह ने बताया कि पालतू पशुओं को लावारिस छोड़ने वालों के खिलाफ भी पूर्व में अभियान चलाया गया था। लेकिन कई ग्रामीण बाज नहीं आ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के यह जानवर बाजार पहुंच जाते हैं। उन्होंने बताया कि बाजपुर गोसदन केंद्र में इसके लिए वार्ता की गई है। शीघ्र ही लावारिस जानवरों को गोसदन भेजा जाएगा। कुंपुर लालकुर्ती में भी सांड़ों और लावारिस गोवंशीय पशुुओं ने जीना मुहाल किया हुआ है।
पूर्व छावनी उपाध्यक्ष संजय पंत ने बताया कि उन्होंने इस मसले को कई बार छावनी परिषद की बैठकों में भी उठाया, लेकिन आज तक गोसदन भेजने की कार्रवाई नहीं हो सकी है। लालकुर्ती के सामाजिक कार्यकर्ता रामेश्वर गोयल ने बताया कि लावारिस जानवरों ने लोगों की नाक में दम किया हुआ है। नगरपालिका चिलियानौला, गनियाद्योली आदि कस्बों में भी यही हाल हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
दुकानदारों की दुकानों को नुकसान, सब्जियां बरबाद कर दे रहे हैं। बाजार के बीचों बीच विचरण करने से कई वाहन चालक गिरकर चोटिल तक हो चुके हैं। इधर, कैंट के स्वच्छता निरीक्षक एपी सिंह ने बताया कि पालतू पशुओं को लावारिस छोड़ने वालों के खिलाफ भी पूर्व में अभियान चलाया गया था। लेकिन कई ग्रामीण बाज नहीं आ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के यह जानवर बाजार पहुंच जाते हैं। उन्होंने बताया कि बाजपुर गोसदन केंद्र में इसके लिए वार्ता की गई है। शीघ्र ही लावारिस जानवरों को गोसदन भेजा जाएगा। कुंपुर लालकुर्ती में भी सांड़ों और लावारिस गोवंशीय पशुुओं ने जीना मुहाल किया हुआ है।
विज्ञापन
पूर्व छावनी उपाध्यक्ष संजय पंत ने बताया कि उन्होंने इस मसले को कई बार छावनी परिषद की बैठकों में भी उठाया, लेकिन आज तक गोसदन भेजने की कार्रवाई नहीं हो सकी है। लालकुर्ती के सामाजिक कार्यकर्ता रामेश्वर गोयल ने बताया कि लावारिस जानवरों ने लोगों की नाक में दम किया हुआ है। नगरपालिका चिलियानौला, गनियाद्योली आदि कस्बों में भी यही हाल हैं।
विज्ञापन