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Almora News: 24 गांवों की सड़क मानकों में फेल, 692 लाख की योजना पर सवाल

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Mon, 20 Jul 2026 10:57 PM IST
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Roads in 24 villages fail to meet standards, raising questions over Rs 692 lakh scheme
मौलेखाल (अल्मोड़ा)। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी झिमार से गुलार-भीताकोट तक बनी सड़क ग्रामीणों के लिए सुविधा के बजाय परेशानी का कारण बन गई है। 24 से अधिक गांवों और करीब 10 हजार की आबादी को जोड़ने वाली यह सड़क परिवहन विभाग की रिपोर्ट में मानकों पर खरी नहीं उतर सकी। इस मार्ग पर बस सेवा बंद कर दी गई है।
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झिमार-गुलार-भीताकोट मोटर मार्ग पहले प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत था। प्रारंभिक कटिंग का कार्य होने के बाद परियोजना को कार्यदायी संस्था एनपीसीसी को हस्तांतरित किया गया। इसके बाद सड़क के स्टेज-2 निर्माण का जिम्मा नैनी वैली कंस्ट्रक्शन को दिया गया। इस कार्य पर 692.27 लाख रुपये खर्च किए गए। इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बाद भी सड़क निर्माण में कई खामियां बनी रहीं। ग्रामीणों के अनुसार कई स्थानों पर सुरक्षा दीवारें क्षतिग्रस्त हैं। नालियां बंद पड़ी हैं। सड़क पर मलबा जमा होने से आवाजाही प्रभावित हो रही है। संवाद
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ऐसी सड़क बना दी कि बसें खराब होने लगीं
ग्रामीणों के अनुसार सड़क बनने के बाद पिछले वर्ष आदर्श मोटर कंपनी ने इस मार्ग पर बस सेवा शुरू की थी। इससे क्षेत्र के लोगों को बड़ी राहत मिली थी लेकिन कुछ ही समय बाद सड़क की तकनीकी कमियों और सुरक्षा संबंधी समस्याओं के कारण बस संचालन रोकना पड़ा। आदर्श मोटर कंपनी के सचिव सुंदर सिंह ने बताया कि सड़क की खराब स्थिति के कारण बस चालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा था। उन्होंने कहा कि सड़क ठीक होने और परिवहन विभाग की अनुमति मिलने के बाद ही दोबारा बस सेवा शुरू की जा सकती है।
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गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल
परिवहन विभाग के सर्वे में सड़क को बस संचालन के लिए अनुपयुक्त पाए जाने के बाद इस मार्ग के निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सड़क निर्माण के दौरान गुणवत्ता की जांच और निगरानी सही तरीके से हुई होती तो 692 लाख रुपये खर्च करने के बाद भी यह स्थिति नहीं होती। ग्रामीणों को आवाजाही के लिए निजी वाहनों व जोखिम भरे सफर का सहारा लेना पड़ रहा है।

चौड़ाई, सुरक्षा और जल निकासी की दिक्कतें
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में बरती गई लापरवाही का खामियाजा आज भी लोगों को भुगतना पड़ रहा है। हाल ही में क्षेत्रीय विधायक महेश जीना की पहल पर करीब 20 लाख रुपये की लागत से कॉजवे की मरम्मत कराई गई लेकिन इसके बाद भी सड़क की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं आया। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क के कई हिस्सों में चौड़ाई, सुरक्षा और जल निकासी से जुड़ीं समस्याएं अब भी बनी हुई हैं।


कोट
झिमार से गुलार-भीताकोट तक बनी सड़क के कुछ हिस्से अभी बस संचालन के लिए सुरक्षित नहीं हैं। कई स्थानों पर तीन से चार मीटर तक वाइंडिंग का कार्य शेष है। संयुक्त निरीक्षण की रिपोर्ट संभागीय परिवहन प्राधिकरण को भेजी जाएगी जिसके आधार पर बस संचालन पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। -पंकज श्रीवास्तव, एआरटीओ, रामनगर
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