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मानसून सीजन पास, फिर भी सड़कों की हालत नहीं खास
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अल्मोड़ा/धौलछीना/मौलेखाल/ कौसानी। मानसून सीजन निकट है, लेकिन जिले में सड़कों की स्थिति ठीक नहीं है। कई स्थानों पर सड़कों के किनारे नालियां मलबे से पटी हैं। वहीं बंद पड़े कल्वर्टों को भी विभाग नहीं खोल सका है। जिससे बारिश होने पर सड़कें तालाब बन जाती हैं। बरसाती पानी निचले क्षेत्रों में पहुंचता है और खेती के साथ ही मकानों को भी नुकसान पहुंचने की संभावना रहती है। विभाग मानसून सत्र से पहले हर बार कल्वर्ट खोलने और नालियां साफ करने के दावे करता है, लेकिन जिले में कई स्थानों पर सड़कों की हालत खराब बनी हुई है।
बाड़ेछीना-सेराघाट सड़क करीब 48 किमी लंबी है। सड़क की देखरेख के लिए विभाग ने मात्र तीन गैंग कर्मी तैनात कर रखे हैं, जिनमें से दो महिलाएं हैं। इस सड़क पर कई स्थानों पर किनारे बनी नालियां मलबे से पटी हैं। कल्वर्टों की भी सफाई नहीं की जा सकी है। धौलछीना के पास कल्वर्टों में कूड़े का ढ़ेर पड़ा हुआ है। बारिश होने पर गंदा पानी सड़क में बहता है और निचले क्षेत्रों में नुकसान पहुंचाता है। यही हाल अल्मोड़ा-कौसानी मार्ग का है। सोमेश्वर से आगे मार्ग में टोटासिलिंग में कल्वर्ट टूटा पड़ा है, वहीं चनौदा, पेट्रोल पंप के समीप कल्वर्ट अधूरे बने हैं। पानी निकासी के लिए नालियों की भी सफाई नहीं की गई है। कौसानी-कांटली सड़क में कल्वर्ट मलबे से भरे हुए हैं। बारिश का पानी सड़क पर बहता है और गड्ढों में भरा रहता है।
रामनगर-मरचूला सड़क की दशा भी ठीक नहीं है। इस मार्ग पर झड़गांव के पास करीब दो साल से सड़क की दीवार क्षतिग्रस्त है। मार्ग संकरा बना हुआ है। जगह-जगह कल्वर्ट बंद हैं। नालियां मलबे से पटी हैं पर कोई इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। वहीं अल्मोड़ा-रानीखेत मार्ग पर भी कई स्थानों पर सड़क किनारे नालियां नहीं खुली हैं। इससे बारिश होने पर गंदा पानी सड़क पर बहते रहता है। वहीं निचले इलाकों में खतरा भी बना रहता है।
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सभी विभागीय अधिकारियों को मानसून से पूर्व सड़क किनारे नालियां और कल्वर्ट खोलने के निर्देश दिए गए हैं। जिन सड़कों में भी नालियां और कल्वर्ट बंद हैं उन्हें जल्द खुलवाया जाएगा। - प्रमोद कुमार, मुख्य अभियंता, लोक निर्माण विभाग।
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बाड़ेछीना-सेराघाट सड़क करीब 48 किमी लंबी है। सड़क की देखरेख के लिए विभाग ने मात्र तीन गैंग कर्मी तैनात कर रखे हैं, जिनमें से दो महिलाएं हैं। इस सड़क पर कई स्थानों पर किनारे बनी नालियां मलबे से पटी हैं। कल्वर्टों की भी सफाई नहीं की जा सकी है। धौलछीना के पास कल्वर्टों में कूड़े का ढ़ेर पड़ा हुआ है। बारिश होने पर गंदा पानी सड़क में बहता है और निचले क्षेत्रों में नुकसान पहुंचाता है। यही हाल अल्मोड़ा-कौसानी मार्ग का है। सोमेश्वर से आगे मार्ग में टोटासिलिंग में कल्वर्ट टूटा पड़ा है, वहीं चनौदा, पेट्रोल पंप के समीप कल्वर्ट अधूरे बने हैं। पानी निकासी के लिए नालियों की भी सफाई नहीं की गई है। कौसानी-कांटली सड़क में कल्वर्ट मलबे से भरे हुए हैं। बारिश का पानी सड़क पर बहता है और गड्ढों में भरा रहता है।
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रामनगर-मरचूला सड़क की दशा भी ठीक नहीं है। इस मार्ग पर झड़गांव के पास करीब दो साल से सड़क की दीवार क्षतिग्रस्त है। मार्ग संकरा बना हुआ है। जगह-जगह कल्वर्ट बंद हैं। नालियां मलबे से पटी हैं पर कोई इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। वहीं अल्मोड़ा-रानीखेत मार्ग पर भी कई स्थानों पर सड़क किनारे नालियां नहीं खुली हैं। इससे बारिश होने पर गंदा पानी सड़क पर बहते रहता है। वहीं निचले इलाकों में खतरा भी बना रहता है।
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सभी विभागीय अधिकारियों को मानसून से पूर्व सड़क किनारे नालियां और कल्वर्ट खोलने के निर्देश दिए गए हैं। जिन सड़कों में भी नालियां और कल्वर्ट बंद हैं उन्हें जल्द खुलवाया जाएगा। - प्रमोद कुमार, मुख्य अभियंता, लोक निर्माण विभाग।