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Almora News: सड़क की खामियों ने ली सात जिंदगियां, सामने आए कई गंभीर कारण
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भिकियासैंण (अल्मोड़ा)। विनायक-भिकियासैंण मोटर मार्ग पर हुए दर्दनाक बस हादसे के पीछे सिर्फ एक चूक नहीं बल्कि सड़क और सुरक्षा से जुड़ी कई गंभीर खामियां सामने आ रही हैं। प्रारंभिक जानकारी और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के कम से कम पांच बड़े कारण बताए जा रहे हैं जिन्होंने इस दुर्घटना को भयावह बना दिया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हादसे वाली जगह पर सड़क पर गहरे गड्ढे बने हुए हैं। बस जैसे ही गड्ढे पर गई, चालक का संतुलन बिगड़ गया। इसके बाद स्थिति इसलिए और बिगड़ गई क्योंकि सड़क के किनारे सुरक्षा गार्डर (क्रैश बैरियर) नहीं थे। घटना स्थल पर मौजूद स्थानीय निवासी दीपक रिखाड़ी ने बताया कि बस के गड्ढे में जाने के बाद बस का स्टेयरिंग सिस्टम फेल हो गया। बताया जा रहा है कि झटके के कारण स्टेयरिंग का नट गिर गया जिससे चालक चाहकर भी वाहन को नियंत्रित नहीं कर सका और स्टेयरिंग नहीं कट पाई। इसके अलावा जिस स्थान पर हादसा हुआ वहां सड़क अत्यंत संकरी है और उसी बिंदु पर लगभग 45 डिग्री का अंधा मोड़ मौजूद है। मोड़ पर न तो पर्याप्त संकेतक लगे हैं और न ही सुरक्षा के अन्य इंतजाम जिससे हादसे की आशंका पहले से बनी रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि वह लंबे समय से इस मार्ग की बदहाल स्थिति को लेकर प्रशासन को अवगत कराते रहे हैं लेकिन समय रहते सुधार नहीं किया गया। अब इस लापरवाही की कीमत लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। हादसे के बाद एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा, रखरखाव और परिवहन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि दोषियों की जिम्मेदारी तय की जाए और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
रेस्क्यू दल से पहले ग्रामीण बने फरिश्ते, स्थानीय लोगों ने खुद चलाया बचाव अभियान
भिकियासैंण (अल्मोड़ा)। विनायक-भिकियासैंण मोटर मार्ग पर हुए दर्दनाक बस हादसे के बाद प्रशासनिक रेस्क्यू दल के पहुंचने से पहले ही स्थानीय ग्रामीणों ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए खुद मोर्चा संभाल लिया। हादसे की खबर मिलते ही आसपास के गांवों से लोग मौके पर पहुंचे और बिना किसी संसाधन के अपने स्तर से राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बस के खाई में गिरते ही अफरा-तफरी मच गई थी। ऐसे कठिन हालात में स्थानीय लोगों ने साहस दिखाते हुए खाई में उतरकर घायलों को बाहर निकालना शुरू किया और उन्हें सड़क तक पहुंचाया। इसके बाद निजी वाहनों और एंबुलेंस की मदद से सभी घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भिकियासैंण पहुंचाया गया। कुछ समय बाद मौके पर पहुंचे रेस्क्यू दल को बस के नीचे दबे दो लोगों के शव निकालने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। रेस्क्यू टीम ने रस्सियों की मदद से बस को दूसरी ओर खिसकाया जिसके बाद दोनों शवों को बाहर निकाला जा सका। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ग्रामीण मौके पर न पहुंचते तो घायलों की हालत और गंभीर हो सकती थी। ग्रामीणों की तत्परता और साहस से कई जिंदगियां बचाई जा सकीं। संवाद
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खेतों में हेलीकॉप्टर उतारकर गंभीर घायलों को पहुंचाया गया ऋषिकेश एम्स
भिकियासैंण (अल्मोड़ा)। विनायक-भिकियासैंण मोटर मार्ग पर हुए भीषण बस हादसे के बाद गंभीर रूप से घायल मरीजों को समय पर बेहतर इलाज दिलाने के लिए प्रशासन ने त्वरित कदम उठाए। सड़क मार्ग की दुर्गमता और समय की नाजुकता को देखते हुए खेतों में हेलीकॉप्टर उतारकर दो गंभीर घायलों को एयरलिफ्ट किया गया। जानकारी के अनुसार, दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल नंदा बल्लभ पंत और हंसी देवी को प्राथमिक उपचार के बाद हेली एंबुलेंस से ऋषिकेश स्थित एम्स भेजा गया। हेली सेवा के लिए पास के समतल खेतों का अस्थायी हेलीपैड के रूप में उपयोग किया गया। कांग्रेस नेता दीपक करगेती का कहना है कि सरकार और जिला प्रशासन को भिकियासैंण में स्थायी हेलीपैड बनाना चाहिए। अगर स्थायी हेलीपैड होगा तो आपात स्थिति में रेस्क्यू आदि के दौरान राहत मिलेगी। संवाद
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स्थानीय लोगों का कहना है कि हादसे वाली जगह पर सड़क पर गहरे गड्ढे बने हुए हैं। बस जैसे ही गड्ढे पर गई, चालक का संतुलन बिगड़ गया। इसके बाद स्थिति इसलिए और बिगड़ गई क्योंकि सड़क के किनारे सुरक्षा गार्डर (क्रैश बैरियर) नहीं थे। घटना स्थल पर मौजूद स्थानीय निवासी दीपक रिखाड़ी ने बताया कि बस के गड्ढे में जाने के बाद बस का स्टेयरिंग सिस्टम फेल हो गया। बताया जा रहा है कि झटके के कारण स्टेयरिंग का नट गिर गया जिससे चालक चाहकर भी वाहन को नियंत्रित नहीं कर सका और स्टेयरिंग नहीं कट पाई। इसके अलावा जिस स्थान पर हादसा हुआ वहां सड़क अत्यंत संकरी है और उसी बिंदु पर लगभग 45 डिग्री का अंधा मोड़ मौजूद है। मोड़ पर न तो पर्याप्त संकेतक लगे हैं और न ही सुरक्षा के अन्य इंतजाम जिससे हादसे की आशंका पहले से बनी रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि वह लंबे समय से इस मार्ग की बदहाल स्थिति को लेकर प्रशासन को अवगत कराते रहे हैं लेकिन समय रहते सुधार नहीं किया गया। अब इस लापरवाही की कीमत लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। हादसे के बाद एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा, रखरखाव और परिवहन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि दोषियों की जिम्मेदारी तय की जाए और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
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रेस्क्यू दल से पहले ग्रामीण बने फरिश्ते, स्थानीय लोगों ने खुद चलाया बचाव अभियान
भिकियासैंण (अल्मोड़ा)। विनायक-भिकियासैंण मोटर मार्ग पर हुए दर्दनाक बस हादसे के बाद प्रशासनिक रेस्क्यू दल के पहुंचने से पहले ही स्थानीय ग्रामीणों ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए खुद मोर्चा संभाल लिया। हादसे की खबर मिलते ही आसपास के गांवों से लोग मौके पर पहुंचे और बिना किसी संसाधन के अपने स्तर से राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बस के खाई में गिरते ही अफरा-तफरी मच गई थी। ऐसे कठिन हालात में स्थानीय लोगों ने साहस दिखाते हुए खाई में उतरकर घायलों को बाहर निकालना शुरू किया और उन्हें सड़क तक पहुंचाया। इसके बाद निजी वाहनों और एंबुलेंस की मदद से सभी घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भिकियासैंण पहुंचाया गया। कुछ समय बाद मौके पर पहुंचे रेस्क्यू दल को बस के नीचे दबे दो लोगों के शव निकालने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। रेस्क्यू टीम ने रस्सियों की मदद से बस को दूसरी ओर खिसकाया जिसके बाद दोनों शवों को बाहर निकाला जा सका। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ग्रामीण मौके पर न पहुंचते तो घायलों की हालत और गंभीर हो सकती थी। ग्रामीणों की तत्परता और साहस से कई जिंदगियां बचाई जा सकीं। संवाद
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खेतों में हेलीकॉप्टर उतारकर गंभीर घायलों को पहुंचाया गया ऋषिकेश एम्स
भिकियासैंण (अल्मोड़ा)। विनायक-भिकियासैंण मोटर मार्ग पर हुए भीषण बस हादसे के बाद गंभीर रूप से घायल मरीजों को समय पर बेहतर इलाज दिलाने के लिए प्रशासन ने त्वरित कदम उठाए। सड़क मार्ग की दुर्गमता और समय की नाजुकता को देखते हुए खेतों में हेलीकॉप्टर उतारकर दो गंभीर घायलों को एयरलिफ्ट किया गया। जानकारी के अनुसार, दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल नंदा बल्लभ पंत और हंसी देवी को प्राथमिक उपचार के बाद हेली एंबुलेंस से ऋषिकेश स्थित एम्स भेजा गया। हेली सेवा के लिए पास के समतल खेतों का अस्थायी हेलीपैड के रूप में उपयोग किया गया। कांग्रेस नेता दीपक करगेती का कहना है कि सरकार और जिला प्रशासन को भिकियासैंण में स्थायी हेलीपैड बनाना चाहिए। अगर स्थायी हेलीपैड होगा तो आपात स्थिति में रेस्क्यू आदि के दौरान राहत मिलेगी। संवाद