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शोध निष्कर्षों को नीतिगत दस्तावेजीकरण के लिए प्रभावी तरीकों से उपयोग में लाएं
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जीबी पंत संस्थान अल्मोड़ा की वैज्ञानिक सलाहकार समिति की 9वीं समीक्षा बैठक। संवाद
- फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा। शोध कार्यों के निष्कर्षों को अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग में लाने की जरूरत है। प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण और पुनरुत्थान के कार्य भी वक्त की मांग है। प्रभावी तरीके से हिमालयी जन समुदाय में कौशल वृद्धि होनी चाहिए।
यह बातें गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान कोसी-कटारमल में दो दिवसीय वैज्ञानिक सलाहकार समिति की समीक्षा बैठक में कही गई। वैज्ञानिक सलाहकार समिति के अध्यक्ष डॉ. एकलब्य शर्मा ने संस्थान के शोध, विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए संस्थान की कार्यो की सराहना की। हिमालयी क्षेत्र के पर्यावरण संतुलन, स्थानीय जनसमुदाय की भागीदारी से प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, आजीविका वृद्धि संबंधित मुख्य मुद्दों पर भी मंथन किया गया।
संस्थान के निदेशक डॉ. सुनील नौटियाल ने शोध और विकास संबंधी कार्यों की जानकारी दी। युवा वैज्ञानिकों और शोधार्थियों ने भविष्य की चुनौतियों के लिए रणनीति पर प्रस्तुतीकरण दिया।
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संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक किरीट कुमार ने वैज्ञानिक सलाहकार समिति के सदस्यों का आभार जताया। इस मौके पर असम विश्वविद्यालय सिलचर के कुलपति डॉ. राजीव मोहन पंत, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी रुड़की के प्रो. अरुन कुमार सराफ, डॉ. जेसी कुनियाल, डॉ. जीसीएस नेगी, डॉ. आईडी भट्ट आदि मौजूद थे।
इन विषयों पर भी हुई चर्चा
हिमालय में जल स्थिरता का मानचित्रीकरण, आजीविका वृद्धि के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के माध्यम से मॉडल गांवों का विकास, वन संपदा के संवर्धन, संरक्षण, संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण, संरक्षण और विकास के लिए जैव विविधता डेटाबेस, पर्यावरणीय सांस्कृतिक आजीविका को बढ़ाना आदि।
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यह बातें गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान कोसी-कटारमल में दो दिवसीय वैज्ञानिक सलाहकार समिति की समीक्षा बैठक में कही गई। वैज्ञानिक सलाहकार समिति के अध्यक्ष डॉ. एकलब्य शर्मा ने संस्थान के शोध, विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए संस्थान की कार्यो की सराहना की। हिमालयी क्षेत्र के पर्यावरण संतुलन, स्थानीय जनसमुदाय की भागीदारी से प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, आजीविका वृद्धि संबंधित मुख्य मुद्दों पर भी मंथन किया गया।
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संस्थान के निदेशक डॉ. सुनील नौटियाल ने शोध और विकास संबंधी कार्यों की जानकारी दी। युवा वैज्ञानिकों और शोधार्थियों ने भविष्य की चुनौतियों के लिए रणनीति पर प्रस्तुतीकरण दिया।
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संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक किरीट कुमार ने वैज्ञानिक सलाहकार समिति के सदस्यों का आभार जताया। इस मौके पर असम विश्वविद्यालय सिलचर के कुलपति डॉ. राजीव मोहन पंत, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी रुड़की के प्रो. अरुन कुमार सराफ, डॉ. जेसी कुनियाल, डॉ. जीसीएस नेगी, डॉ. आईडी भट्ट आदि मौजूद थे।
इन विषयों पर भी हुई चर्चा
हिमालय में जल स्थिरता का मानचित्रीकरण, आजीविका वृद्धि के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के माध्यम से मॉडल गांवों का विकास, वन संपदा के संवर्धन, संरक्षण, संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण, संरक्षण और विकास के लिए जैव विविधता डेटाबेस, पर्यावरणीय सांस्कृतिक आजीविका को बढ़ाना आदि।