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Almora News: ई-कचरे के निस्तारण के लिए अनुसंधान को मंजूरी

Sun, 24 May 2026 09:59 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा Updated Sun, 24 May 2026 09:59 PM IST
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Research approved for disposal of e-waste
अल्मोड़ा। भारत में सोलर ऊर्जा और इलेक्ट्रिक उपकरणों के बढ़ते उपयोग के साथ लीथियम आयन बैटरियों की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसके साथ ही इन बैटरियों से निकलने वाले ई-कचरे के सुरक्षित प्रबंधन की चुनौती भी सामने आने लगी है। इसी दिशा में गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान के राष्ट्रीय हिमालयी अध्ययन मिशन की ओर से एक विशेष अनुसंधान परियोजना को मंजूरी दी गई है।
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इस अनुसंधान में लीथियम आयन बैटरियों के कचरे का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन कर उसमें मौजूद उपयोगी तत्वों को फिर से प्राप्त करने के प्रयास किए जाएंगे।



विशेषज्ञों के अनुसार बैटरियों में मौजूद लीथियम, निकिल, कोबाल्ट और लीथियम मैग्नीज ऑक्साइड जैसे तत्वों को अलग कर दोबारा उपयोग में लाने की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है। वैज्ञानिक ऐसे विशेष जेल विकसित कर रहे हैं जो बैटरियों के इलेक्ट्रोड की मरम्मत और उन्हें फिर से चार्ज करने में सहायक होंगे। इससे पुरानी बैटरियों को दोबारा उपयोग योग्य बनाया जा सकेगा। यह अनुसंधान प्रोफेसर दीपक पंत के नेतृत्व में केंद्रीय विश्व विद्यालय हिमाचल प्रदेश में संचालित किया जा रहा है।
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पिथौरागढ़ निवासी प्रो. पंत पिछले एक दशक से विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में अपनी विशेष पहचान बना चुके हैं। प्रो. पंत का कहना है कि लीथियम आयन बैटरियों के बेहतर प्रबंधन से न केवल बहुमूल्य संसाधनों का फिर से उपयोग संभव होगा बल्कि हिमालयी नदियों और पर्यावरण को प्रदूषण से भी बचाया जा सकेगा।
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उन्होंने बताया कि उत्तर-पूर्वी राज्यों, हिमाचल प्रदेश और जम्मू क्षेत्र में हर वर्ष 500 टन से अधिक मोबाइल बैटरियों का कचरा उत्पन्न हो रहा है जो भविष्य में गंभीर पर्यावरणीय समस्या बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह अनुसंधान सफल रहा तो भविष्य में इसे औद्योगिक स्तर पर विकसित कर ई-कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में नई दिशा दी जा सकेगी। संवाद


कोट



जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान के तहत राष्ट्रीय हिमालयी अध्ययन मिशन से मंजूर इस विशेष अनुसंधान परियोजना पर कार्य कर रहा हूं। यह परियोजना बेकार लिथियम-आयन बैटरियों से कीमती सामग्री की सुरक्षा, रिकवरी और दोबारा इस्तेमाल पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य बैटरी की उम्र बढ़ाने और इलेक्ट्रॉनिक कचरा कम करने के लिए टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल समाधान विकसित करना है। - प्रो. दीपक पंत, डीन, पृथ्वी और पर्यावरण विज्ञान, केंद्रीय विवि हिमाचल प्रदेश
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