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Ranikhet Bhalu Dam: सैलानियों को आकर्षित कर सकता है भालू डैम, जानिए खासियत
Sat, 21 Oct 2023 02:48 PM IST
हीरा मेहरा
अमर उजाला नेटवर्क, अल्मोड़ा
अमर उजाला नेटवर्क, अल्मोड़ा
Published by: हीरा मेहरा
Updated Sat, 21 Oct 2023 02:48 PM IST
सार
रानीखेत क्षेत्र में भालू डैम कृत्रिम झील है। यह पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इसकी लंबाई 70 मीटर, चौड़ाई 6.6 मीटर और गहराई करीब नौ मीटर बताई जाती है। बांज, बुरांश और देवदार के घने जंगलों के बीच बने इस डैम की खूबसूरती देखते ही बनती है।
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Bhalu Dam
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
रानीखेत क्षेत्र में पर्यटन विकास की अपार संभावनाएं हैं लेकिन नए पर्यटन स्थलों का विकास तो दूर अंग्रेजों के बनाए गए पर्यटक स्थल भी भुला दिए गए हैं। इन्हीं में से एक प्रमुख पर्यटक स्थल भालू डैम भी उपेक्षा की मार झेल रहा है।
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वर्ष 1903 में अंग्रेजों ने चौबटिया गार्डन से तीन किमी दूर अर्ध-गोलाकार डैम का निर्माण कराया था। वे वहां नौकायन करते थे। आजादी के बाद इस डैम का सौंदर्यीकरण नहीं हो सका। भालू डैम कृत्रिम झील है। यह पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इसकी लंबाई 70 मीटर, चौड़ाई 6.6 मीटर और गहराई करीब नौ मीटर बताई जाती है। बांज, बुरांश और देवदार के घने जंगलों के बीच बने इस डैम की खूबसूरती देखते ही बनती है।
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यहां सफारी, फोटोग्राफी और ट्रैकिंग रूट विकसित किए जा सकते हैं जो पर्यटन कारोबार को रफ्तार देंगे लेकिन इसे धरोहर के रूप में नहीं सहेजा गया है। इसके विकास की मांग वर्षों से की जा रही है लेकिन ऐसा नहीं हो सका है, इससे यहां पहुंचने वाले पर्यटकों की संख्या लगातार घटना चिंता का विषय है।
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भालू डैम का विकास होना चाहिए। इससे क्षेत्र के पर्यटन कारोबार को गति मिलेगी और कई जरूरतमंद युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। - दीपक पंत, व्यापारी।
पहले चौबटिया से भालू डैम तक रोपवे की मांग भी उठी थी। कुछ लोगों ने तीन किमी का ट्रैकिंग रूट निर्माण का सुझाव दिया था। - मनीष चौधरी, अध्यक्ष व्यापार मंडल।
यहां नए पर्यटक स्थल तो छोड़िए, पुराने स्थलों का भी विकास नहीं किया जा रहा है। यही कारण है कि पर्यटक कौसानी या नैनीताल चले जा रहे हैं। - राहुल बिष्ट छात्रसंघ अध्यक्ष, रानीखेत महाविद्यालय।
इस डैम को नैनीताल झील की तर्ज पर विकसित किया जा सकता है। इसके सौंदर्यीकरण से पर्यटन बढ़ता। - हिमांशु उपाध्याय, अध्यक्ष होटल एसोसिएशन।
भालू डैम की सफाई और पानी की आपूर्ति का कार्य एमईएस की तरफ से किया जाता है। आसपास के क्षेत्र का सौंदर्यीकरण छावनी की तरफ से होता है। इसे विकसित करने के प्रयास किए जाएंगे। -मनोज कुमार मोगरा, सहायक गैरीसन इंजीनियर एमईएस, रानीखेत।
ये भी जानें : भालू डैम जाने के लिए रानीखेत से 10 किमी दूर चौबटिया गार्डन जाना पड़ता है। उसके बाद गार्डन से तीन किमी तक पैदल चलकर भालू डैम पहुंचा जा सकता है। s