जन्म से पहले ही जीवन बचाने की चुनौती: इस महीने होने हैं 250 से ज्यादा प्रसव, इस वजह से प्रशासन की बढ़ी चिंता
अल्मोड़ा जिले के सभी 11 विकासखंडों में इस महीने करीब 250 से ज्यादा प्रसव होने हैं लेकिन इनमें से अधिकतर गर्भवतियां ऐसे क्षेत्रों में हैं जिनके रास्ते अभी बारिश से प्रभावित हैं। ऐसे में इसकी व्यवस्था कराना प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती बन गया है।
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अल्मोड़ा में दो दिन हुई भारी बारिश ने कई तरह की चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। अधिकतर क्षेत्रों में बारिश से प्रभावित हुई सड़कों को खोलने का प्रयास लगातार जारी है। कई जगह मकान क्षतिग्रस्त हो गए हैं। जिले के सभी 11 विकासखंडों में इस महीने करीब 250 से ज्यादा प्रसव होने हैं लेकिन इनमें से अधिकतर गर्भवतियां ऐसे क्षेत्रों में हैं जिनके रास्ते अभी बारिश से प्रभावित हैं। उनकी नियमित जांचें, उपचार और सही तरीके से प्रसव हो सके इसकी व्यवस्था कराना प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती बन गया है।
जिले में औसतन हर महीने करीब 500 प्रसव होते हैं। इनमें से करीब 250 प्रसव अभी तक सुरक्षित हो चुके हैं लेकिन करीब 250 प्रसव होने अभी बाकी हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतर संपर्क मार्ग अभी भी आपदा से प्रभावित हैं। जिन्हें खोलने के प्रयास चल रहे हैं। वैसे तो स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत कार्य करने वाली आशा और एएनएम इस बात की पूरी देखरेख कर रहती रहती हैं कि किसी गर्भवती को कोई परेशानी न हो।
बृहस्पतिवार और शुक्रवार को हुई बारिश के कारण बने आपदा के हालात ने विभाग की चिंता बढ़ा दी है। सूत्रों ने बताया कि जिन करीब 250 गर्भवतियों का प्रसव होना है उनमें से कई से संपर्क नहीं हो पा रहा है। ऐसे में प्रशासन किसी भी अनहोनी की आशंका को टालने के लिए सतर्कता बरत रहा है।
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बारिश के बाद बने हालात को देखते हुए सभी आशा और एएनएम वर्करों को निर्देशित किया गया है कि वे गर्भवतियों और उनके परिजन से संपर्क करें। यह सुनिश्चित करें कि उनका प्रसव सुरक्षित हो। जहां कहीं भी संपर्क नहीं हो पा रहा है उनसे व्यक्तिगत संपर्क करें। उन्हें तत्काल अस्पतालों में लाकर सुरक्षित भर्ती करा दें। इस मामले में कहीं कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
- डॉ. आरसी पंत, सीएमओ अल्मोड़ा।
तीन दिन में महिला चिकित्सालय में हुए 13 प्रसव
बारिश के बाद तीन दिन में महिला चिकित्सालय अल्मोड़ा में 13 महिलाओं के प्रसव सफलतापूर्वक किए गए हैं। स्त्री रोग विशेषज्ञ डाॅ. हेमा रावत ने बताया कि मरीजों को लेकर आने वाले लोग आपदा की परिस्थितियों से काफी घबराए हुए थे लेकिन चिकित्सा कर्मियों ने उन्हें समुचित उपचार उपलब्ध कराया।