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धूराफाट में बेमौसमी कटहल के उत्पादन से काश्तकारों में कौतूहल
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धूराफाट के विशालकोट में पेड़ पर लदे बेमौसमी कटहल। संवाद
- फोटो : RANIKHET
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। रानीखेत के धूराफाट क्षेत्र में बेमौसमी कटहल कौतूहल का कारण बने हुए हैं। क्षेत्र के विशालकोट, हल्द्यानी, मल्ला मयूं आदि क्षेत्र सब्जी उत्पादक बेल्ट के रूप में मशहूर है। पहली बार बेमौसम कटहल उगने से काश्तकार हैरत में है। उद्यान विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण इस तरह की परिस्थितियां बन रही हैं। वैज्ञानिक इस पर शोध करेंगे।
आम, काफल सहित तमाम फलों के बेमौसमी उत्पादन के बाद अब बेमौसमी कटहल भी इस पंक्ति में शामिल हो गया है। विशालकोट निवासी काश्तकार दीवान सिंह के पेड़ में कटहल उग आए हैं। वहीं, काश्तकार प्रकाश करायत ने बताया कि वे अपने खेत में आलू देखने गए थे। उन्होंने भी बेमौसमी कटहल देखा तो अचरज में पड़ गए। यह पेड़ किस प्रजाति का है यह सफल होगा या नहीं यह शोध का विषय है।
ग्रामीणाें ने बताया कि इस क्षेत्र के लोग पहले सब्जी उत्पादन के माध्यम से गुजर बसर करते थे। यहां बेमौसमी सब्जियों का भी खूब उत्पादन होता था। विशालकोट, हल्द्यानी, बाग्वान, तल्ला मयूं के लोग चौबटिया छावनी और नैनीताल में सब्जियां बेचकर अच्छा मुनाफा कमाते थे। धीरे-धीरे सरकार ने भी नीति नहीं बनाई। इसके बाद बंदर और सुअरों के आतंक के चलते लोगों ने उत्पादन भी छोड़ दिया है।
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-ग्लोबल वार्मिंग के कारण कटहल का बेमौसम उत्पादन हुआ है। इस प्रजाति को फरवरी-मार्च का क्लाइमेट मिल रहा है। इस दौरान बौर आता है। अच्छी फसल आती है तो किसानों के लिए यह फायदे का सौदा होगा। विभाग की तरफ से शोध किया जाएगा।
-भूपाल सिंह बिष्ट, ज्येष्ठ उद्यान निरीक्षक, उद्यान विभाग।
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आम, काफल सहित तमाम फलों के बेमौसमी उत्पादन के बाद अब बेमौसमी कटहल भी इस पंक्ति में शामिल हो गया है। विशालकोट निवासी काश्तकार दीवान सिंह के पेड़ में कटहल उग आए हैं। वहीं, काश्तकार प्रकाश करायत ने बताया कि वे अपने खेत में आलू देखने गए थे। उन्होंने भी बेमौसमी कटहल देखा तो अचरज में पड़ गए। यह पेड़ किस प्रजाति का है यह सफल होगा या नहीं यह शोध का विषय है।
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ग्रामीणाें ने बताया कि इस क्षेत्र के लोग पहले सब्जी उत्पादन के माध्यम से गुजर बसर करते थे। यहां बेमौसमी सब्जियों का भी खूब उत्पादन होता था। विशालकोट, हल्द्यानी, बाग्वान, तल्ला मयूं के लोग चौबटिया छावनी और नैनीताल में सब्जियां बेचकर अच्छा मुनाफा कमाते थे। धीरे-धीरे सरकार ने भी नीति नहीं बनाई। इसके बाद बंदर और सुअरों के आतंक के चलते लोगों ने उत्पादन भी छोड़ दिया है।
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-ग्लोबल वार्मिंग के कारण कटहल का बेमौसम उत्पादन हुआ है। इस प्रजाति को फरवरी-मार्च का क्लाइमेट मिल रहा है। इस दौरान बौर आता है। अच्छी फसल आती है तो किसानों के लिए यह फायदे का सौदा होगा। विभाग की तरफ से शोध किया जाएगा।
-भूपाल सिंह बिष्ट, ज्येष्ठ उद्यान निरीक्षक, उद्यान विभाग।