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Almora News: .कैदी ने इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से किन लोगों से संपर्क किया, इसकी जांच में जुटी पुलिस
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अल्मोड़ा। अल्मोड़ा जिला कारागार में कैदी के पास इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस ( स्मार्ट वॉच और केबल) बरामदगी के मामले में पुलिस गहराई से जांच में जुटी है। कैदी के पास इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जेल के अंदर कैसे पहुंची। इसके जरिये उसने किन लोगों से संपर्क किया, इसकी भी पुलिस जांच कर रही है।
जांच में अब तक सामने आया है कि गैंगस्टर इससे पहले सितारगंज जेल में सजा काट रहा था। वहां भी उसने जेल के अंदर रहते हुए अपना नेटवर्क तैयार कर लिया था। जेल के भीतर नेटवर्क बनाने के चलते कैदी को बीते सितंबर में सितारगंज जेल से स्थानांतरित कर अल्मोड़ा जेल लाया गया था। अल्मोड़ा जेल में भी कैदी के पास इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बरामद होना जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर रहा है। इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जेल के अंदर कैसे पहुंची, इसके जरिये किन लोगों से संपर्क किया गया, इन सवालों पर पुलिस की जांच जारी है।
पुलिस के मुताबिक, कुख्यात गैंगस्टर प्रवीण वाल्मीकि के खिलाफ उत्तराखंड के रुड़की-हरिद्वार क्षेत्र में हत्या, जमीन कब्जा, रंगदारी और फर्जी दस्तावेज जैसे गंभीर अपराध दर्ज हैं। वह कुख्यात सुनील राठी गिरोह का सक्रिय सदस्य भी था। कुछ समय बाद उसने अपना अलग आपराधिक गिरोह खड़ा किया। वर्ष 2018 में जमीन विवाद के मामले में हुई हत्या के बाद वाल्मीकि गैंग की हिंसक गतिविधियां खुलकर सामने आईं। तब उत्तराखंड एसटीएफ ने गैंग के खिलाफ अभियान चलाकर इसके कई सक्रिय सदस्यों और सहयोगियों को गिरफ्तार किया था। तब से वह जेल में सजा काट रहा है। पुलिस की जांच जारी है। संवाद
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जांच में अब तक सामने आया है कि गैंगस्टर इससे पहले सितारगंज जेल में सजा काट रहा था। वहां भी उसने जेल के अंदर रहते हुए अपना नेटवर्क तैयार कर लिया था। जेल के भीतर नेटवर्क बनाने के चलते कैदी को बीते सितंबर में सितारगंज जेल से स्थानांतरित कर अल्मोड़ा जेल लाया गया था। अल्मोड़ा जेल में भी कैदी के पास इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बरामद होना जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर रहा है। इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जेल के अंदर कैसे पहुंची, इसके जरिये किन लोगों से संपर्क किया गया, इन सवालों पर पुलिस की जांच जारी है।
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पुलिस के मुताबिक, कुख्यात गैंगस्टर प्रवीण वाल्मीकि के खिलाफ उत्तराखंड के रुड़की-हरिद्वार क्षेत्र में हत्या, जमीन कब्जा, रंगदारी और फर्जी दस्तावेज जैसे गंभीर अपराध दर्ज हैं। वह कुख्यात सुनील राठी गिरोह का सक्रिय सदस्य भी था। कुछ समय बाद उसने अपना अलग आपराधिक गिरोह खड़ा किया। वर्ष 2018 में जमीन विवाद के मामले में हुई हत्या के बाद वाल्मीकि गैंग की हिंसक गतिविधियां खुलकर सामने आईं। तब उत्तराखंड एसटीएफ ने गैंग के खिलाफ अभियान चलाकर इसके कई सक्रिय सदस्यों और सहयोगियों को गिरफ्तार किया था। तब से वह जेल में सजा काट रहा है। पुलिस की जांच जारी है। संवाद
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