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लोगों ने छोड़ा घरबार: पलायन न करें तो क्या करें...जंगली पशुओं का आतंक, कहा- खेत हैं पर खेती कर नहीं सकते
Tue, 24 Oct 2023 01:45 PM IST
हीरा मेहरा
अमर उजाला नेटवर्क, रानीखेत
अमर उजाला नेटवर्क, रानीखेत
Published by: हीरा मेहरा
Updated Tue, 24 Oct 2023 01:45 PM IST
सार
रानीखेत के उरोली गांव के ग्रामीणों का कहना है कि पलायन न करें तो क्या करें जंगली जानवरों के आतंक से खेती कर नहीं सकते हैं। कमाई का कोई दूसरा साधन है नहीं तो रोजगार के लिए पलायन मजबूरी है।
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लोगों ने छोड़ा घरबार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जंगली जानवरों की वजह से अब पहाड़ में खेती घाटे का सौदा होकर रह गई है। बारिश पर निर्भर खेती के लिए किसान जी जान लगाकर मेहनत करता है लेकिन उसकी सारी मशक्कत उस समय जाया हो जाती है जब जंगली जानवर पूरे खेत को बंजर कर देते हैं। यही वजह है कि रानीखेत क्षेत्र के उरोली गांव के तोक कारखेत के लोगों ने घर-बार छोड़कर पलायन की राह चुन ली है। गांव से बीते एक दशक में 50 प्रतिशत लोग पलायन कर गए हैं। गांव में एक भी युवा नजर नहीं आ रहा है। यहां बुजुर्ग रह रहे हैं।
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ग्रामीणों का कहना है कि पलायन न करें तो क्या करें जंगली जानवरों के आतंक से खेती कर नहीं सकते हैं। कमाई का कोई दूसरा साधन है नहीं तो रोजगार के लिए पलायन मजबूरी है। गांव में रहने वाले बुजुर्ग बताते हैं कि यहां मडुआ, गेहूं, भट, धान की खेती सहित सब्जी उत्पादन भी बहुतायत में होता था। जंगली सुअर, बारहसिंगा, बंदर सहित अन्य जंगली जानवर ने उनकी मेहनत को बेकार करना शुरू कर दिया। रोजगार के अवसर बंद हो गए और युवाओं को गांव छोड़कर मैदानी क्षेत्रों का रुख करना पड़ा है। एक दशक पूर्व 50 परिवारों के खुशहाल गांव में अब महज 20 परिवार शेष रह गए हैं और घरों और बाखलियों में वीरानी की मार पड़ी है।
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पीने को पानी तक नहीं, नौले-धारों से बुझ रही प्यास
भले ही देश में जल जीवन मिशन योजना का संचालन कर हर घर नल से जल पहुंचाने के दावे किए जा रहे हैं। कारखेत गांव में घरों में लगे पुराने नल सूखे हैं। ग्रामीण और जनप्रतिनिधि बताते हैं कि गांव में पानी के लिए अब तक कोई योजना नहीं बन सकी है। नलों में पानी नहीं आता और प्राकृतिक जल स्रोतों से प्यास बुझ रही है। गांव में मूलभूत सुविधाओं के अभाव में लोग पलायन कर रहे हैं।
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निश्चित तौर पर गांव में जंगली जानवरों के आतंक के चलते पूरी जमीन बंजर हो चुकी है। गांव का युवा वर्ग रोजगार के लिए मैदानी क्षेत्रों का रुख कर चुका है और गांव में केवल बुजुर्ग हैं। इन समस्याओं के समाधान के प्रयास होते तो निश्चित तौर पर गांव से पलायन रुकता। -विनीता बोहरा, ग्राम प्रधान, उरोली।
उरोली, कारखेत में जंगली जानवरों का आतंक है। इस मामले में मैंने कई बार अधिकारियों से पत्राचार कर इनके आतंक से मुक्ति दिलाने की मांग की है। गांव में पेयजल संकट भी है। ऐसे में लोग खेती छोड़ रोजगार के लिए पलायन करने के लिए मजबूर हैं। -अंजू राणा, जिला पंचायत सदस्य, डीडा।
जंगली जानवरों से निजात दिलाने के होंगे प्रयास तो रुकेगा पलायन
रानीखेत। कारखेत गांव के ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने कहा कि गांवों से पलायन रोकने के लिए कई योजनाएं संचालित की गई हैं। उनके गांव तक अब तक कोई योजना नहीं पहुंची। उन्होंने कहा कि यदि सरकार पेयजल, सिंचाई नहरों की व्यवस्था करने के साथ ही कृषि भूमि पर सोलर फैंसिंग, तारबाड़ करे तो इसका लाभ गांव वालों को मिलेगा। बंजर होती जमीन पर फिर से हरियाली लौटती और युवाओं को रोजगार के लिए मैदानी क्षेत्रों का रुख नहीं करना पड़ता।