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Almora News: आभा कार्ड किया जरूरी, बनवाने के लिए दर-दर भटकने की मजबूरी

Wed, 16 Apr 2025 11:41 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा Updated Wed, 16 Apr 2025 11:41 PM IST
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People face the problems.
अल्मोड़ा। भले ही आयुष्मान योजना के तहत आभा कार्ड बनवाना जरूरी कर दिया हो मगर इसे बनवाने के लिए इलाज करा रहे लोग परेशान हैं। मरीज अपनी बीमारी से संबंधित जांच रिपोर्ट और उपचार संबंधी कागजात लेकर आभा आईडी लेने के लिए चक्कर काटने को मजबूर हैं। दूसरी तरफ आभा कार्ड बनवाने की गति बहुत धीमी है। योजना से तहत छह लाख के लक्ष्य के सापेक्ष अभी तक जिले में महज 3,85,416 लोगों की आभा आईडी बन सकी है। इससे विभाग की किरकिरी हो रही है।
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स्वास्थ्य विभाग ने आयुष्मान योजना के तहत आभा कार्ड में प्रत्येक व्यक्ति का अपना स्वास्थ्य खाता तैयार करने के लिए योजना की शुरू की। इसके तहत जिले में छह लाख कार्ड बनाए जाने हैं लेकिन इस काम में सुस्ती नजर आ रही है। बीते एक वर्ष में जिले में मात्र 10 फीसदी यानी 60 हजार के आसपास आभा कार्ड बन पाए हैं। जिला अस्पताल, बेस अस्पताल, सीएचसी स्तर पर आभा कार्ड बनाने का कार्य हो रहा है। अगर आभा कार्ड बनाने की यही रफ्तार रही तो लक्ष्य हासिल करने में लंबा वक्त लगने के आसार हैं।
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क्या है आभा कार्ड
अल्मोड़ा। आभा कार्ड को आम भाषा में हेल्थ आईडी कार्ड भी कहा जा सकता है जिसमें संबंधित व्यक्ति के उपचार का रिकॉर्ड रहता है। इससे पता चलता है कि व्यक्ति कब बीमार हुआ, क्या इलाज चला, किस डॉक्टर ने उपचार दिया, कौन-कौन सी जांचें हुईं, कौन-कौन सी दवाएं लिखी गईं। इसमें पर्चे की जरूरत नहीं होती है। इस कार्ड में पूरी जानकारी मौजूद रहती है। देश के कोई भी डॉक्टर आभा कार्ड देखकर पुराने इलाज को परखते हुए उपचार शुरू कर सकता है।
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लोगों की पीड़ा
आयुष्मान योजना के तहत आभा कार्ड नहीं बनने से काफी परेशानी का समाना करना पड़ रहा हैं। चिकित्सक को दिखाने के लिए बार-बार जांच और दवाओं की पर्चियां साथ ले जानी पड़ रही हैं।

राम सिंह, हवालबाग
दो-तीन बार बेस अस्पताल गए लेकिन पोर्टल का सर्वर डाउन होने के कारण हर बार खाली हाथ लौटना पड़ा। अब तक आभा कार्ड नहीं बन पाया। इस कारण योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहा हूं।
सुरेश सिंह, लमगड़ा
लोगों में अभी आभा आईडी की जानकारी का अभाव है। योजना के प्रचार प्रसार के लिए विभाग लगातार प्रयास कर रही है।
— डॉ. आरसी पंत, सीएमओ, अल्मोड़ा।
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