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Almora News: आंदोलनकारियों ने तहसील प्रशासन का वार्ता का न्योता ठुकराया
Sat, 29 Mar 2025 11:21 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Sat, 29 Mar 2025 11:21 PM IST
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। ग्रामीण क्षेत्रों में शराब की दुकानें खोलने के विरोध में बिनसर महादेव के निकट सोनी में कृषक कृषि बागवानी और उद्यमी संगठन के महासचिव दीपक करगेती के नेतृत्व में चल रहे क्रमिक अनशन पर आंदोलनकारी डटे हैं। इधर, शनिवार को रानीखेत के संयुक्त मजिस्ट्रेट ने आंदोलकारियों को वार्ता के लिए आमंत्रित किया तो उन्होंने साफ इंकार कर दिया।
आंदोलनकारी दीपक करगेती ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक शासन स्तर से प्रस्तावित शराब की दुकानों के निरस्तीकरण का आदेश नहीं आता, तब तक किसी भी स्तर पर वार्ता नहीं की जाएगी। ऐसी वार्ता का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि अब जनजागरण अभियान चलाते हुए आंदोलन को हर गांव और ब्लॉक तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि धार्मिक स्थलों के पास शराब की दुकानें खोलकर जन आस्थाओं को नशे से जोड़ने का कार्य कर रहा है जो पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रदेश में कृषि, बागवानी, पर्यटन और पशुपालन जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा देने की बजाय शासन और प्रशासन केवल शराब और खनन से राजस्व बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। करगेती ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही दुकानें निरस्त नहीं की गईं तो आंदोलन को उग्र रूप दिया जाएगा और व्यापक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। आंदोलन स्थल पर हेमंत रौतेला, हिमांशु आर्या, दीपक बिष्ट, गीता पंवार, देव सिंह, कैलाश, जानकी उपाध्याय आदि मौजूद रहे।
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आंदोलनकारी दीपक करगेती ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक शासन स्तर से प्रस्तावित शराब की दुकानों के निरस्तीकरण का आदेश नहीं आता, तब तक किसी भी स्तर पर वार्ता नहीं की जाएगी। ऐसी वार्ता का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि अब जनजागरण अभियान चलाते हुए आंदोलन को हर गांव और ब्लॉक तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि धार्मिक स्थलों के पास शराब की दुकानें खोलकर जन आस्थाओं को नशे से जोड़ने का कार्य कर रहा है जो पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रदेश में कृषि, बागवानी, पर्यटन और पशुपालन जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा देने की बजाय शासन और प्रशासन केवल शराब और खनन से राजस्व बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। करगेती ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही दुकानें निरस्त नहीं की गईं तो आंदोलन को उग्र रूप दिया जाएगा और व्यापक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। आंदोलन स्थल पर हेमंत रौतेला, हिमांशु आर्या, दीपक बिष्ट, गीता पंवार, देव सिंह, कैलाश, जानकी उपाध्याय आदि मौजूद रहे।
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