{"_id":"66f304d53117daede905e0e6","slug":"people-face-the-problems-almora-news-c-232-1-alm1004-117734-2024-09-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Almora News: स्याल्दे आईटीआई में युवाओं के भविष्य से हो रहा खिलवाड़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Almora News: स्याल्दे आईटीआई में युवाओं के भविष्य से हो रहा खिलवाड़
Tue, 24 Sep 2024 11:58 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Tue, 24 Sep 2024 11:58 PM IST
विज्ञापन
भिकियासैंण (अल्मोड़ा)। प्रदेश सरकार पर्वतीय जिलों में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के तमाम दावे क्यों ना करें। लेकिन वास्तविकता यह है कि यहां के तकनीकी संस्थान लगातार सरकारी तंत्र की उपेक्षा का शिकार हो रहे हैं। इसकी बानगी अल्मोड़ा जिले के स्याल्दे विकास खंड स्थित राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान की है। जो शुरू तो पांच ट्रेड़ों के साथ हुआ लेकिन वर्तमान में यहां महज एक ट्रेड संचालित हो रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को तकनीकी शिक्षा देकर स्वराेजगार से जोड़ा जा सके। इसके लिए वर्ष 1987 में स्याल्दे विकास खंड में राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना की गई थी। शुरुआत में यह संस्थान वेल्डर, इलेक्ट्राॅनिक, सिलाई कढ़ाई, वायरमैन और हिंदी आशुलिपि जैसे पांच टेड्रों के साथ शुरू हुआ। कुछ ही सालों में करोड़ों रुपये की लागत से आईटीआई के भवन का निर्माण भी हो गया। लेकिन धीरे धीरे यह संस्थान सरकारी उपेक्षा की भेंट चढ़ गया।
वर्तमान में यह संस्थान उपनल के चार कर्मचारियों व एक अटैच कर्मचारी के सहारे चल रहा है। संस्थान में न कोई फोरमैन है और न ही कोई रेगुलर स्टाफ। कुछ समय पहले विभाग ने एक साथ यहां से तीन अनुदेशकों के एक साथ स्थानांतरण कर दिए। वर्तमान में संस्थान के भंडार कक्ष में कई मशीनें जंक खा रही हैं। यहां सिर्फ एकमात्र कोपा ट्रेड संचालित हो रहा है। इसमें 15 छात्र अध्ययन कर रहे हैं। ऐसी हालत में ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को कैसे तकनीकी शिक्षा मिल पाएगी, कहा नहीं जा सकता।
विज्ञापन
अनुदेशकों के स्थानांतरण का मामला निदेशालय स्तर का है। हमारे स्तर से रिक्त पदों के संबंध में कई बार पत्राचार किया गया है। - फुलेराज सिंह, प्रधानाचार्य, आईटीआई, अल्मोड़ा
स्याल्दे आईटीआई में अनुदेशकों की कमी का मामला संज्ञान है। इस मामले में उच्च अधिकारियों से वार्ता की जा रही है। जल्द ही यहां अनुदेशकों की तैनाती कराई जाएगी। - महेश जीना, विधायक, सल्ट
विज्ञापन
ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को तकनीकी शिक्षा देकर स्वराेजगार से जोड़ा जा सके। इसके लिए वर्ष 1987 में स्याल्दे विकास खंड में राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना की गई थी। शुरुआत में यह संस्थान वेल्डर, इलेक्ट्राॅनिक, सिलाई कढ़ाई, वायरमैन और हिंदी आशुलिपि जैसे पांच टेड्रों के साथ शुरू हुआ। कुछ ही सालों में करोड़ों रुपये की लागत से आईटीआई के भवन का निर्माण भी हो गया। लेकिन धीरे धीरे यह संस्थान सरकारी उपेक्षा की भेंट चढ़ गया।
विज्ञापन
वर्तमान में यह संस्थान उपनल के चार कर्मचारियों व एक अटैच कर्मचारी के सहारे चल रहा है। संस्थान में न कोई फोरमैन है और न ही कोई रेगुलर स्टाफ। कुछ समय पहले विभाग ने एक साथ यहां से तीन अनुदेशकों के एक साथ स्थानांतरण कर दिए। वर्तमान में संस्थान के भंडार कक्ष में कई मशीनें जंक खा रही हैं। यहां सिर्फ एकमात्र कोपा ट्रेड संचालित हो रहा है। इसमें 15 छात्र अध्ययन कर रहे हैं। ऐसी हालत में ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को कैसे तकनीकी शिक्षा मिल पाएगी, कहा नहीं जा सकता।
विज्ञापन
अनुदेशकों के स्थानांतरण का मामला निदेशालय स्तर का है। हमारे स्तर से रिक्त पदों के संबंध में कई बार पत्राचार किया गया है। - फुलेराज सिंह, प्रधानाचार्य, आईटीआई, अल्मोड़ा
स्याल्दे आईटीआई में अनुदेशकों की कमी का मामला संज्ञान है। इस मामले में उच्च अधिकारियों से वार्ता की जा रही है। जल्द ही यहां अनुदेशकों की तैनाती कराई जाएगी। - महेश जीना, विधायक, सल्ट