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Almora News: दूसरे हड्डी रोग विशेषज्ञ ने भी दी इस्तीफे की चेतावनी
Sun, 07 Jan 2024 12:00 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Sun, 07 Jan 2024 12:00 AM IST
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बागेश्वर। जिला अस्पताल में निश्चेतक की तैनाती नहीं होने से चिकित्सकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। अब अस्पताल के दूसरे हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. आशीष परगई ने भी नौकरी छोड़ने की चेतावनी दी है। एक दिन पूर्व ही जिला अस्पताल के पहले हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. गिरिजा शंकर जोशी इस्तीफा देने की चेतावनी दे चुके हैं।
जिला अस्पताल में बीते छह अक्तूबर से निश्चेतक का पद खाली चल रहा है। ऑपरेशन वाले मरीजों को हायर सेंटर रेफर करना पड़ रहा है। शुक्रवार रात को अस्पताल में सिरकोट निवासी सात साल की रुचि पांडेय घायल होकर आई थीं। छत से गिरने के कारण उसके हाथ में फ्रैक्चर हो गया था। डॉ. परगई ने बताया कि हाथ में कई स्थान पर फ्रैक्चर होने से बच्ची के हाथ की उंगलियों ने काम करना बंद कर दिया था। ऐसी हालत में आपातकालीन ऑपरेशन करना पड़ता है लेकिन जिला अस्पताल में निश्चेतक नहीं होने से बच्ची को हायर सेंटर रेफर करना पड़ा।
उनका कहना है कि वह ऋषिकेश एम्स से यहां पहाड़ के लोगों की सेवा करने और अच्छा काम करने के लिए आए हैं। अस्पताल में निश्चेतक नहीं होनेे के कारण मुझे अपना काम करने में दिक्कत हो रही है। लोगों को सुविधा नहीं मिल रही है, ऐसे में उनके रहने का कोई लाभ नहीं है। अगर एक सप्ताह में निश्चेतक की तैनाती नहीं होती है तो वह इस्तीफा दे देंगे। अक्तूबर से जिला अस्पताल में ऑपरेशन नहीं हो रहे हैं। प्रशासन और सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। इसको लेकर जनता में नाराजगी है।
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रोजाना रेफर हो रहे आठ से दस मरीज
बागेश्वर। डॉ. आशीष परगई का कहना है कि जिला अस्ताल में रोजाना औसतन हड्डी के आठ से दस छोटे-बड़े ऑपरेशन किए जाते हैं। अक्तूबर से निश्चेतक नहीं होने से रोजाना मरीजों को हायर सेंटर रेफर किया जा रहा है।
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जिला अस्पताल में बीते छह अक्तूबर से निश्चेतक का पद खाली चल रहा है। ऑपरेशन वाले मरीजों को हायर सेंटर रेफर करना पड़ रहा है। शुक्रवार रात को अस्पताल में सिरकोट निवासी सात साल की रुचि पांडेय घायल होकर आई थीं। छत से गिरने के कारण उसके हाथ में फ्रैक्चर हो गया था। डॉ. परगई ने बताया कि हाथ में कई स्थान पर फ्रैक्चर होने से बच्ची के हाथ की उंगलियों ने काम करना बंद कर दिया था। ऐसी हालत में आपातकालीन ऑपरेशन करना पड़ता है लेकिन जिला अस्पताल में निश्चेतक नहीं होने से बच्ची को हायर सेंटर रेफर करना पड़ा।
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उनका कहना है कि वह ऋषिकेश एम्स से यहां पहाड़ के लोगों की सेवा करने और अच्छा काम करने के लिए आए हैं। अस्पताल में निश्चेतक नहीं होनेे के कारण मुझे अपना काम करने में दिक्कत हो रही है। लोगों को सुविधा नहीं मिल रही है, ऐसे में उनके रहने का कोई लाभ नहीं है। अगर एक सप्ताह में निश्चेतक की तैनाती नहीं होती है तो वह इस्तीफा दे देंगे। अक्तूबर से जिला अस्पताल में ऑपरेशन नहीं हो रहे हैं। प्रशासन और सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। इसको लेकर जनता में नाराजगी है।
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रोजाना रेफर हो रहे आठ से दस मरीज
बागेश्वर। डॉ. आशीष परगई का कहना है कि जिला अस्ताल में रोजाना औसतन हड्डी के आठ से दस छोटे-बड़े ऑपरेशन किए जाते हैं। अक्तूबर से निश्चेतक नहीं होने से रोजाना मरीजों को हायर सेंटर रेफर किया जा रहा है।