Farmer Success Story: जैविक सब्जियों ने खोले सोनू की सफलता के रास्ते, बनाई पहचान; कई लोगों को दे रहे रोजगार
अल्मोड़ा जिले के कुटगोली तोक के दमुवाकनेली गांव निवासी सोनू बिष्ट ने जैविक सब्जी की खेती कर रहे है। सोनू अपने चार परिजनों सहित गांव के कई लोगों को रोजगार भी दिला रहे हैं।
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मेरे देश की मिट्टी उगले सोना, उगले हीरे-मोती। यह पंक्तियां जिले के कुटगोली तोक के दमुवाकनेली गांव निवासी सोनू बिष्ट पर एकदम फिट बैठती हैं। विरासत में मिली 100 नाली जमीन में लगन और मेहनत से आधुनिक तकनीक से सब्जी की खेती कर रहे हैं। वह अपने चार परिजनों सहित गांव के कई लोगों को रोजगार भी दिला रहे हैं।
सोनू ने 12वीं तक पढ़ाई करने के बाद परिवार की जिम्मेदारी उठाने के लिए सब्जियां उगानी शुरू कीं। उन्होंने मात्र 16 साल की उम्र में स्थानीय छोटे बाजार कोसी और हवालबाग आदि जगहों में 8 से 10 किमी तक पैदल चलकर सब्जी बेचने का काम किया। वहां उन्हें मेहनत कर आमदनी का अनुभव मिला। तब उन्हें खेती और उपज बेचने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। इसलिए सोनू ने राह बदली। फिर उन्होंने अपने गांव से जिला मुख्यालय अल्मोड़ा बाजार का सफर तय किया लेकिन शुरुआती दौर उनके लिए बहुत मुश्किल भरा था। वह लगातार बेहतरी का प्रयास करते रहे। समय मेहनत करने वालों पर हमेशा मेहरबान रहता है। इसलिए धीरे-धीरे उनका सब्जी का कारोबार बढ़ता गया। अब सोनू सालाना चार लाख रुपये से अधिक कमा रहे हैं।
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उगाते हैं जैविक सब्जियां
सोनू ने अपने खेतों पर कई तरह की जैविक सब्जियां उगाई हैं। इनमें तुरई, चिचन, कद्दू, बैगन, लौकी, टमाटर, आलू आदि सब्जियां प्रमुख हैं। इनका जायका इनकी सब्जियों में मिलता है।
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जहां गांवों में बंदरों और सुअरों का आतंक बढ़ने से किसान काफी परेशान हैं। वहीं सोनू ने जैविक सब्जियां उगा कर ये सिद्ध किया की कोई चीज करने में लगन व परिश्रम से किया जा सकता हैं।
जैविक खेती करने वाले किसानों को कृषि विभाग से उन्हें प्रशिक्षण और प्रमाणपत्र भी दिया किया जाता हैं। जिससे उन्हें योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ मिल पाए। बड़ी संख्या में किसान इस योजना का पूरा लाभ ले रहे हैं। इसका लाभ किसान ले रहे हैं।
-विनोद शर्मा, मुख्य कृषि अधिकारी अल्मोड़ा