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Almora News: खोल दे माता खोल भवानी धार में केवाड़...
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अल्मोड़ा। सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा में इन दिनों नंदादेवी महोत्सव की धूम मची हुई है। भाद्रपद मास की नवमी के अवसर पर रविवार को मां नंदादेवी मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही। साप्ताहिक अवकाश होने के कारण दूर-दराज गांवों सहित दूसरे जिले के लोग भी अपने परिवार के साथ मेले में पहुंचे और मां नंदा-सुनंदा के दर्शन कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।
रविवार सुबह मंदिर में विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद दिनभर दर्शन के लिए श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। सुबह से ही मंदिर परिसर मंत्रोच्चार, शंख और घंटों की मधुर ध्वनि से गूंजता रहा। मां नंदा देवी के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। महोत्सव में उमड़ी भीड़ के कारण मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में खासा उत्साह देखने को मिला। मेले में लगी विभिन्न दुकानों और स्टालों पर भी श्रद्धालुओं ने जमकर खरीदारी की। अवकाश के चलते बड़ी संख्या में युवा और बच्चे भी अपने परिजनों के साथ मेले में पहुंचे। नवमी के दिन देर शाम तक मंदिर में पूजा-अर्चना और मां के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही।
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पारंपरिक परिधान में सजी महिलाओं ने प्रस्तुत किए मनमोहक झोड़े
अल्मोड़ा। नंदादेवी मेले में रविवार दोपहर झोड़ा प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस मौके पर महिलाओं ने खोल दे माता खोल भवानी धार में केवाड़...समेत कई गीत प्रस्तुत किए। प्रतियोगिता का शुभारंभ मल्ला महल से हुआ। यहां से विभिन्न झोड़ा टीमें बाजार से होते हुए नंदादेवी मंदिर परिसर पहुंचीं।
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मंदिर परिसर में विभिन्न महिला समितियों के बीच झोड़ा प्रतियोगिता कराई गई । पारंपरिक कुमाऊंनी परिधान में सजी महिलाओं ने सामूहिक रूप से झोड़ा गायन और नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। पारंपरिक धुनों और लोकगीतों से पूरा वातावरण कुमाऊं की लोक संस्कृति के रंग में रंग गया। प्रस्तुतियों को देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे।
प्रतियोगिता के दौरान मंच पर कुमाऊं की पारंपरिक झोड़ा नृत्य शैली की आकर्षक झलक देखने को मिली। प्रस्तुतियों में पहाड़ की जीवनशैली, सामाजिक सरोकार और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रभावी ढंग से दर्शाया गया। महिलाओं के सामूहिक नृत्य और लोकगीतों ने दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। प्रतियोगिता का उद्देश्य महिलाओं को अपनी लोक संस्कृति से जोड़ने के साथ पारंपरिक लोक विधाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना रहा। कार्यक्रम का संचालन गीता मेहरा ने किया। इस दौरान दायित्वधारी गंगा बिष्ट, राजेंद्र बिष्ट, मुख्य सांस्कृतिक संयोजक अर्जुन बिष्ट, अध्यक्ष मनोज वर्मा, सचिव मनोज सनवाल, मुख्य संयोजक तारा चंद्र जोशी, गोविंद मेहरा के अलावा अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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कवि सम्मेलन में कविताओं ने गुदगुदाया, सामाजिक कुरीतियों पर किया कटाक्ष
एडम्स में हुआ कवि सम्मेलन का आयोजन
अल्मोड़ा। नंदादेवी मेले के तहत एडम्स मैदान में रविवार को विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। दोपहर में कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ, जिसमें स्थानीय कवियों ने अपनी स्वरचित कविताओं का प्रभावी अंदाज में पाठ किया। कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों और विसंगतियों पर व्यंग्यात्मक कटाक्ष किया।
कविता पाठ के दौरान नंदादेवी मेले की गतिविधियों, उसके महत्व और मेले के प्रति लोगों के उत्साह को भी रचनाओं में स्थान दिया गया। वहीं जीजा-साली के बीच मेले में जाने को लेकर हुई मजेदार बातचीत का कविताई अंदाज में चित्रण कर कवियों ने खूब ठहाके लगवाए। कई कविताओं में पहाड़ की संस्कृति, सामाजिक जीवन और रोजमर्रा की परिस्थितियों की झलक भी देखने को मिली। कवियों की हास्य-व्यंग्य से भरपूर प्रस्तुतियों पर दर्शकों ने जमकर तालियां बजाईं। कवि सम्मेलन के दौरान एडम्स मैदान का माहौल देर तक हंसी-खुशी और साहित्यिक रंग से सराबोर रहा।
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कुमाऊंनी गीतों पर देर रात तक थिरके युवा
अल्मोड़ा। नंदादेवी मेले के तहत देर रात तक सांस्कृतिक कार्यक्रमों और स्टार नाइट का आयोजन किया गया। विभिन्न सांस्कृतिक दलों ने कुमाऊं की समृद्ध लोक संस्कृति की रंगारंग प्रस्तुतियां देकर दर्शकों का मन मोह लिया। लोकगीतों और पारंपरिक नृत्यों की प्रस्तुतियों ने मेले में चार चांद लगा दिए।
इसके बाद देर शाम आयोजित स्टार नाइट में गायकों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। लोकप्रिय गीतों के साथ कुमाऊंनी गीतों की प्रस्तुतियों पर दर्शक देर रात तक झूमते रहे। संगीत की थाप पर युवाओं ने जमकर नृत्य किया और कार्यक्रम का आनंद लिया। मेले में देर रात तक चले सांस्कृतिक कार्यक्रमों के कारण माहौल उत्सवमय बना रहा। लोक संस्कृति और आधुनिक संगीत के संगम ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। स्टार नाइट के दौरान युवाओं में खासा उत्साह देखने को मिला और पूरा आयोजन स्थल संगीत की धुनों से गूंजता रहा।
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रविवार सुबह मंदिर में विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद दिनभर दर्शन के लिए श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। सुबह से ही मंदिर परिसर मंत्रोच्चार, शंख और घंटों की मधुर ध्वनि से गूंजता रहा। मां नंदा देवी के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। महोत्सव में उमड़ी भीड़ के कारण मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में खासा उत्साह देखने को मिला। मेले में लगी विभिन्न दुकानों और स्टालों पर भी श्रद्धालुओं ने जमकर खरीदारी की। अवकाश के चलते बड़ी संख्या में युवा और बच्चे भी अपने परिजनों के साथ मेले में पहुंचे। नवमी के दिन देर शाम तक मंदिर में पूजा-अर्चना और मां के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही।
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पारंपरिक परिधान में सजी महिलाओं ने प्रस्तुत किए मनमोहक झोड़े
अल्मोड़ा। नंदादेवी मेले में रविवार दोपहर झोड़ा प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस मौके पर महिलाओं ने खोल दे माता खोल भवानी धार में केवाड़...समेत कई गीत प्रस्तुत किए। प्रतियोगिता का शुभारंभ मल्ला महल से हुआ। यहां से विभिन्न झोड़ा टीमें बाजार से होते हुए नंदादेवी मंदिर परिसर पहुंचीं।
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मंदिर परिसर में विभिन्न महिला समितियों के बीच झोड़ा प्रतियोगिता कराई गई । पारंपरिक कुमाऊंनी परिधान में सजी महिलाओं ने सामूहिक रूप से झोड़ा गायन और नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। पारंपरिक धुनों और लोकगीतों से पूरा वातावरण कुमाऊं की लोक संस्कृति के रंग में रंग गया। प्रस्तुतियों को देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे।
प्रतियोगिता के दौरान मंच पर कुमाऊं की पारंपरिक झोड़ा नृत्य शैली की आकर्षक झलक देखने को मिली। प्रस्तुतियों में पहाड़ की जीवनशैली, सामाजिक सरोकार और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रभावी ढंग से दर्शाया गया। महिलाओं के सामूहिक नृत्य और लोकगीतों ने दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। प्रतियोगिता का उद्देश्य महिलाओं को अपनी लोक संस्कृति से जोड़ने के साथ पारंपरिक लोक विधाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना रहा। कार्यक्रम का संचालन गीता मेहरा ने किया। इस दौरान दायित्वधारी गंगा बिष्ट, राजेंद्र बिष्ट, मुख्य सांस्कृतिक संयोजक अर्जुन बिष्ट, अध्यक्ष मनोज वर्मा, सचिव मनोज सनवाल, मुख्य संयोजक तारा चंद्र जोशी, गोविंद मेहरा के अलावा अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कवि सम्मेलन में कविताओं ने गुदगुदाया, सामाजिक कुरीतियों पर किया कटाक्ष
एडम्स में हुआ कवि सम्मेलन का आयोजन
अल्मोड़ा। नंदादेवी मेले के तहत एडम्स मैदान में रविवार को विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। दोपहर में कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ, जिसमें स्थानीय कवियों ने अपनी स्वरचित कविताओं का प्रभावी अंदाज में पाठ किया। कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों और विसंगतियों पर व्यंग्यात्मक कटाक्ष किया।
कविता पाठ के दौरान नंदादेवी मेले की गतिविधियों, उसके महत्व और मेले के प्रति लोगों के उत्साह को भी रचनाओं में स्थान दिया गया। वहीं जीजा-साली के बीच मेले में जाने को लेकर हुई मजेदार बातचीत का कविताई अंदाज में चित्रण कर कवियों ने खूब ठहाके लगवाए। कई कविताओं में पहाड़ की संस्कृति, सामाजिक जीवन और रोजमर्रा की परिस्थितियों की झलक भी देखने को मिली। कवियों की हास्य-व्यंग्य से भरपूर प्रस्तुतियों पर दर्शकों ने जमकर तालियां बजाईं। कवि सम्मेलन के दौरान एडम्स मैदान का माहौल देर तक हंसी-खुशी और साहित्यिक रंग से सराबोर रहा।
कुमाऊंनी गीतों पर देर रात तक थिरके युवा
अल्मोड़ा। नंदादेवी मेले के तहत देर रात तक सांस्कृतिक कार्यक्रमों और स्टार नाइट का आयोजन किया गया। विभिन्न सांस्कृतिक दलों ने कुमाऊं की समृद्ध लोक संस्कृति की रंगारंग प्रस्तुतियां देकर दर्शकों का मन मोह लिया। लोकगीतों और पारंपरिक नृत्यों की प्रस्तुतियों ने मेले में चार चांद लगा दिए।
इसके बाद देर शाम आयोजित स्टार नाइट में गायकों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। लोकप्रिय गीतों के साथ कुमाऊंनी गीतों की प्रस्तुतियों पर दर्शक देर रात तक झूमते रहे। संगीत की थाप पर युवाओं ने जमकर नृत्य किया और कार्यक्रम का आनंद लिया। मेले में देर रात तक चले सांस्कृतिक कार्यक्रमों के कारण माहौल उत्सवमय बना रहा। लोक संस्कृति और आधुनिक संगीत के संगम ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। स्टार नाइट के दौरान युवाओं में खासा उत्साह देखने को मिला और पूरा आयोजन स्थल संगीत की धुनों से गूंजता रहा।