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सौ किमी दूर रामनगर जाना रोगियों की मजबूरी
पंकज मेहरा /अमर उजाला, मौलेखाल (अल्मोड़ा)।
Updated Wed, 09 Dec 2015 11:01 PM IST
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सल्ट ब्लॉक के दूरस्थ गांव देवायल में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की हालत बदतर है। इस अस्पताल में डाक्टरों के आठ पद स्वीकृत हैं, लेकिन बुधवार को एक ही डॉक्टर ड्यूटी पर थे। अस्पताल में अन्य सुविधाएं तो दूर खून की जांच तक की सुविधा नहीं है। अस्पताल की हालत देखते हुए क्षेत्रवासियों को उपचार के लिए सौ किमी दूर रामनगर जाना पड़ता है।
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देवायल अस्पताल में डॉक्टरों के आठ पद स्वीकृत हैं। इनमें से यहां तीन पदों पर डॉक्टर तैनात हैं। बुधवार को अमर उजाला की टीम ने अस्पताल में जाकर पड़ताल की। सुबह 10 बजे पंजीकरण काउंटर में कुछ लोग पर्चा कटा रहे थे। इस समय तक 10 पर्चे कट चुके थे। दो डॉक्टरों के कक्ष बंद मिले। सुबह 10:20 बजे एक कक्ष में कुछ मरीज लाइन में लगे थे। कमरे के भीतर डॉ. सौरभ सिंह एक मरीज का परीक्षण कर रहे थे। उन्होंने बताया कि अस्पताल में तैनात तीन डॉक्टरों में से दो छुट्टी पर थे।
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सुबह 10:30 बजे वार्डों का जायजा लिया, लेकिन कोई भी मरीज भर्ती नहीं था। अस्पताल में पर्याप्त व्यवस्थाएं नहीं हैं। स्टाफ नर्स के स्वीकृत चार पद, लिपिक के दो पद खाली चल रहे हैं। फार्मेसिस्ट के तीन पदों में से एक पर ही कार्मिक तैनात हैं, दो पद खाली हैं। वार्ड ब्वाय के चार पदों के सापेक्ष एक तैनाती है।
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स्वच्छक के दो पदों में से एक खाली है। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे, खून की जांच की भी सुविधा नहीं है। चहारदीवारी और स्टाफ क्वार्टर भी नहीं बने हैं। अस्पताल में पानी की भी परेशानी है। यहां जल संस्थान ने लाइन तो बिछाई है, लेकिन पानी की आपूर्ति नियमित नहीं है।
यहां आने वाले मरीजों और कर्मचारियों को एक किमी दूर हैंडपंप से पानी लाना पड़ता है। अस्पताल में पर्याप्त सुविधाएं नहीं होने से मामूली बीमारी में भी रोगियों को सौ किमी दूर उपचार कराने जाना मजबूरी है। अस्पताल के डॉक्टर सौरभ सिंह ने बताया कि खाली पदों पर तैनाती को लेकर समय-समय पर शासन को रिपोर्ट भेजी जाती है।