{"_id":"5fc3d3888ebc3e9b8134a78e","slug":"no-gram-pradhan-in-almora-almora-news-hld40562621","type":"story","status":"publish","title_hn":"एक साल के ग्राम प्रधान के बगैर चल रही हैं अल्मोड़ा की 25 ग्राम सभाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एक साल के ग्राम प्रधान के बगैर चल रही हैं अल्मोड़ा की 25 ग्राम सभाएं
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अल्मोड़ा/बागेश्वर। अल्मोड़ा की 25 और बागेश्वर की 10 ग्राम पंचायतों में सालभर से ग्राम प्रधान नहीं चुने गए हैं। अक्तूबर 2019 में हुए पंचायत चुनावों में इन ग्राम पंचायतों में कई कारणों से प्रधान के पदों के लिए नामांकन ही नहीं हो पाए। ग्राम पंचायतें गठित न होने के कारण पंचायतों की खुली बैठकें भी नहीं हो पा रहीं हैं। इसके चलते विकास कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों को मनरेगा, राशन कार्ड, परिवार रजिस्टर, जन्म-मृत्यु आदि प्रमाणपत्र बनवाने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पंचायत चुनाव को साल से अधिक का समय बीत चुका है। जिले में कुल 1160 ग्राम सभाएं हैं, लेकिन पंचायत चुनाव को एक साल से अधिक समय बीतने के बाद भी जिले की 25 ग्राम सभाएं बिना प्रधान के हैं। शुरुआत में दो से अधिक बच्चों वाले लोगों के अयोग्य होने के नियमों के कारण भी कई दावेदार चुनाव से हट गए। जातिगत और महिला आरक्षित सीटों की भी बाधा है। पास्तोड़ा ग्राम पंचायत के लोगों ने सड़क की मांग को लेकर चुनाव बहिष्कार किया था। उधर बागेश्वर जिले में गरुड़ ब्लॉक में सात और बागेश्वर ब्लॉक में तीन ग्राम पंचायतें प्रधान विहीन हैं।
कोरोना के कारण नहीं हो सके उपचुनाव
कोरोना के कारण हुए लॉकडाउन के चलते भी उपचुनाव नहीं हो सके, जबकि पहले छह माह से खाली पदों पर उपचुनाव हो जाते थे। ग्राम प्रधानों के बगैर गांवों में विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। ग्राम पंचायत की खुली बैठक न हो पाने से विकास कार्यों को लेकर कोई प्रस्ताव भी पास नहीं हो पाए हैं। कोरोना संकट के कारण सालभर का समय बीतने के बावजूद निकट भविष्य में प्रधानों के उपचुनाव की संभावना नहीं दिख रही है।
विज्ञापन
छोटे-छोटे कार्यों के लिए ब्लॉक मुख्यालयों के काटने पड़ रहे चक्कर
अल्मोड़ा। जिले में 25 ग्राम सभाओं को प्रधान न मिलने से ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। गांव में विकास कार्य तो रुके हैं। जरूरी कार्यों के लिए भी ग्रामीणों को दूरस्थ ब्लॉक मुख्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। ब्लॉक मुख्यालय में सहायक विकास अधिकारियों (एडीओ) को प्रशासक के रूप में तैनात किया गया है। ग्रामीणों को दस्तावेज संबंधित कार्यों के लिए कई किमी दूर खंड विकास कार्यालयों में जाकर एडीओ अथवा ग्राम पंचायत विकास अधिकारी से संपर्क करना मुश्किल हो रहा है।
बगैर प्रधान के लॉकडाउन में भी हुईं समस्याएं
अल्मोड़ा। कोरोना काल में ग्राम प्रधानों के हवाले कई व्यवस्था रहीं। गांवों में गरीब, जरूरतमंदों को राशन बांटने से लेकर क्वारंटीन लोगों की देखरेख भी प्रधानों ने की लेकिन जिले के 25 ग्राम पंचायतों में प्रधान न होने से ये व्यवस्थाएं अधूरी रहीं। ग्राम पंचायत अधिकारियों को प्रशासक के रूप में इन गांवों की बागडोर सौंपी गई, लेकिन कई किमी दूर तैनात ग्राम पंचायत अधिकारियों के लिए लंबे क्षेत्र में व्यवस्थाएं कर पाना संभव नहीं रहा।
इन गांवों में नहीं हैं प्रधान
अल्मोड़ा जिले में खरक, पल्यूला, बम्योली, निगराली, रोल, मलाड़, आरासल्पड़, महतगांव, केस्ता, सैंज, दलमोटी, डढुली, कांडे, उभ्याड़ी, सिमोली, मड़कूबाखल, बोहरागांव, खड़खेत, डढूली, पालीनदुली, पास्तौड़ावार, जालीखान, गुदलेख, क्वेटा और पोखरी में ग्राम प्रधान का पद खाली है। बागेश्वर जिले में खुनौली, नाघरसाहू, रावतसेरा, फल्यांटी, जिजौली, बिनखोली, परकोटी, रतमटिया, दर्शानी और कटारमल ग्राम पंचायत में प्रधान नहीं हैं।
जिले के 25 गांवों में पिछले साल पंचायती चुनावों में अलग-अलग कारणों से ग्राम प्रधान नहीं चुने जा सके। कोरोना काल में लागू कोविड गाइडलाइन के कारण भी उपचुनाव नहीं हो सके। एक दो माह में उपचुनाव होने की संभावना है। -गोपाल सिंह अधिकारी, डीपीआरओ अल्मोड़ा।
आरक्षण के गलत निर्धारण भी चुनाव न होने की वजह
बागेश्वर। बागेश्वर जिले में 10 ग्राम प्रधानों के पद खाली हैं। अधिकतर ग्राम पंचायतों में आरक्षण का गलत निर्धारण होने से प्रधान के चुनाव नहीं हो पाए। जहां एससी, एसटी का कोई परिवार नहीं है, वहां भी इस वर्ग के लिए सीटें आरक्षित कर दी गई थी। बीते मार्च में डीएम के निर्देश पर इन ग्राम पंचायतों में प्रशासक नियुक्त कर दिए थे। प्रशासक ग्राम पंचायतों का संचालन कर रहे हैं। जिला पंचायतराज कार्यालय ने शासन को खाली पदों की सूचना वर्ष 2019 में पंचायती चुनाव होने के बाद ही दे दी गई थी। इन ग्राम पंचायतों में नए सिरे से आरक्षण का निर्धारण होने के बाद ही चुनाव होंगे।
विज्ञापन
पंचायत चुनाव को साल से अधिक का समय बीत चुका है। जिले में कुल 1160 ग्राम सभाएं हैं, लेकिन पंचायत चुनाव को एक साल से अधिक समय बीतने के बाद भी जिले की 25 ग्राम सभाएं बिना प्रधान के हैं। शुरुआत में दो से अधिक बच्चों वाले लोगों के अयोग्य होने के नियमों के कारण भी कई दावेदार चुनाव से हट गए। जातिगत और महिला आरक्षित सीटों की भी बाधा है। पास्तोड़ा ग्राम पंचायत के लोगों ने सड़क की मांग को लेकर चुनाव बहिष्कार किया था। उधर बागेश्वर जिले में गरुड़ ब्लॉक में सात और बागेश्वर ब्लॉक में तीन ग्राम पंचायतें प्रधान विहीन हैं।
विज्ञापन
कोरोना के कारण नहीं हो सके उपचुनाव
कोरोना के कारण हुए लॉकडाउन के चलते भी उपचुनाव नहीं हो सके, जबकि पहले छह माह से खाली पदों पर उपचुनाव हो जाते थे। ग्राम प्रधानों के बगैर गांवों में विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। ग्राम पंचायत की खुली बैठक न हो पाने से विकास कार्यों को लेकर कोई प्रस्ताव भी पास नहीं हो पाए हैं। कोरोना संकट के कारण सालभर का समय बीतने के बावजूद निकट भविष्य में प्रधानों के उपचुनाव की संभावना नहीं दिख रही है।
विज्ञापन
छोटे-छोटे कार्यों के लिए ब्लॉक मुख्यालयों के काटने पड़ रहे चक्कर
अल्मोड़ा। जिले में 25 ग्राम सभाओं को प्रधान न मिलने से ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। गांव में विकास कार्य तो रुके हैं। जरूरी कार्यों के लिए भी ग्रामीणों को दूरस्थ ब्लॉक मुख्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। ब्लॉक मुख्यालय में सहायक विकास अधिकारियों (एडीओ) को प्रशासक के रूप में तैनात किया गया है। ग्रामीणों को दस्तावेज संबंधित कार्यों के लिए कई किमी दूर खंड विकास कार्यालयों में जाकर एडीओ अथवा ग्राम पंचायत विकास अधिकारी से संपर्क करना मुश्किल हो रहा है।
बगैर प्रधान के लॉकडाउन में भी हुईं समस्याएं
अल्मोड़ा। कोरोना काल में ग्राम प्रधानों के हवाले कई व्यवस्था रहीं। गांवों में गरीब, जरूरतमंदों को राशन बांटने से लेकर क्वारंटीन लोगों की देखरेख भी प्रधानों ने की लेकिन जिले के 25 ग्राम पंचायतों में प्रधान न होने से ये व्यवस्थाएं अधूरी रहीं। ग्राम पंचायत अधिकारियों को प्रशासक के रूप में इन गांवों की बागडोर सौंपी गई, लेकिन कई किमी दूर तैनात ग्राम पंचायत अधिकारियों के लिए लंबे क्षेत्र में व्यवस्थाएं कर पाना संभव नहीं रहा।
इन गांवों में नहीं हैं प्रधान
अल्मोड़ा जिले में खरक, पल्यूला, बम्योली, निगराली, रोल, मलाड़, आरासल्पड़, महतगांव, केस्ता, सैंज, दलमोटी, डढुली, कांडे, उभ्याड़ी, सिमोली, मड़कूबाखल, बोहरागांव, खड़खेत, डढूली, पालीनदुली, पास्तौड़ावार, जालीखान, गुदलेख, क्वेटा और पोखरी में ग्राम प्रधान का पद खाली है। बागेश्वर जिले में खुनौली, नाघरसाहू, रावतसेरा, फल्यांटी, जिजौली, बिनखोली, परकोटी, रतमटिया, दर्शानी और कटारमल ग्राम पंचायत में प्रधान नहीं हैं।
जिले के 25 गांवों में पिछले साल पंचायती चुनावों में अलग-अलग कारणों से ग्राम प्रधान नहीं चुने जा सके। कोरोना काल में लागू कोविड गाइडलाइन के कारण भी उपचुनाव नहीं हो सके। एक दो माह में उपचुनाव होने की संभावना है। -गोपाल सिंह अधिकारी, डीपीआरओ अल्मोड़ा।
आरक्षण के गलत निर्धारण भी चुनाव न होने की वजह
बागेश्वर। बागेश्वर जिले में 10 ग्राम प्रधानों के पद खाली हैं। अधिकतर ग्राम पंचायतों में आरक्षण का गलत निर्धारण होने से प्रधान के चुनाव नहीं हो पाए। जहां एससी, एसटी का कोई परिवार नहीं है, वहां भी इस वर्ग के लिए सीटें आरक्षित कर दी गई थी। बीते मार्च में डीएम के निर्देश पर इन ग्राम पंचायतों में प्रशासक नियुक्त कर दिए थे। प्रशासक ग्राम पंचायतों का संचालन कर रहे हैं। जिला पंचायतराज कार्यालय ने शासन को खाली पदों की सूचना वर्ष 2019 में पंचायती चुनाव होने के बाद ही दे दी गई थी। इन ग्राम पंचायतों में नए सिरे से आरक्षण का निर्धारण होने के बाद ही चुनाव होंगे।