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पालिका के सफाई कर्मचारी गए हड़ताल पर, जगह-जगह लगे कूड़े के ढेर
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अल्मोड़ा के नगर पालिका परिषद में नारेबाजी करते सफाई कर्मचारी।फोटो- संवाद
- फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा। प्रांतीय आह्वान पर देवभूमि उत्तराखंड सफाई कर्मचारी संघ के बैनर तले पालिका के स्वच्छक कर्मचारी सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। कार्मिकों के हड़ताल पर चले जाने से सोमवार को शहर का कूड़ा नहीं उठा। कूड़ेदानों के आसपास, बाजार और मार्गों में कूड़ेदान के बाहर भी जगह-जगह कूड़े के ढेर पड़े हुए हैं। कूड़े से उठ रही बदबू से लोगों को आवागमन में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मांगों को लेकर पालिका के स्वच्छक कर्मियों ने पालिका प्रांगण में धरना दिया और नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। मांग पूरी होने तक कार्मिकों ने आंदोलन जा रखने और मंगलवार 20 जुलाई को जुलूस निकालने का ऐलान किया है।
नगर क्षेत्र में कूड़ा उठाने की जिम्मेदारी पालिका परिषद की है। पालिका में 200 स्वच्छक, सफाई नायक और चालक कार्यरत हैं। पालिका कर्मियों ने पूर्व में सोमवार से हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी थी। यह सभी कार्मिक अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। इससे सोमवार को शहर क्षेत्र में कूड़ा नहीं उठा है। जगह-जगह कूड़े के ढेर पड़े हुए हैं। बारिश से कूड़ा फैल गया है।
आंदोलित कर्मियों ने पालिका प्रांगण में धरना दिया और सभा की। उन्होंने कहा कि संगठन 15 मार्च से आंदोलन चलाए हुए है। दो दौर की वार्ता के बाद भी शासन ने मांगों का समाधान नहीं किया है। आरोप लगाया कि सरकार सफाई कर्मियों की मांगों के प्रति गंभीर नहीं है। संगठन के प्रदेश महामंत्री राजपाल पवार ने कहा कि मंगलवार 20 जुलाई को मांगों के समर्थन में जुलूस निकाला जाएगा। सभा में जिलाध्यक्ष दीपक चंदेल, शाखा अध्यक्ष सुरेश केशरी, महासचिव राजेश टॉक, उपाध्यक्ष सतीश कुमार, राजेंद्र पवार, कमल चौहान, विमला देवी, सरला देवी, आशा, शीला, मंजू देवी, रेखा देवी, अनीता, कुलवंती, किरन आदि ने भाग लिया।
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सात से आठ टन कूड़ा शहर में है बिखरा पड़ा हुआ
अल्मोड़ा। नगर पालिका अल्मोड़ा के अंतर्गत तेरह वार्डों में साढ़े छह हजार से अधिक मकान हैं। नगर क्षेत्र में करीब 70 हजार लोग निवास करते हैं। लोगों के घरों से करीब सात से आठ टन कूड़ा निकलता है। जिसे पालिका परिषद आठ वाहनों के जरिए डंपिंग जोन में डालती है। सोमवार को स्वच्छक कर्मिकों की हड़ताल से जहां तहां कूड़ा बिखरा पड़ा हुआ है। यदि जल्द हड़ताली कर्मियों की मांगों का समाधान नहीं निकलता है तो स्थिति बिगड़ने की आशंका है।
पर्यावरण मित्रों की सभी मांगें शासन स्तर की हैं। अल्मोड़ा पालिका में कोई भी कर्मचारी ठेका प्रथा पर तैनात नहीं है। कर्मचारियों के हड़ताल के नोटिस के बाद इस संबंध में शनिवार को मुख्यमंत्री, शहरी विकास मंत्री, सचिव और निदेशक को पत्र भेज दिए गए हैं। शासन से हड़ताली कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान निकालने की भी मांग की गई है। - प्रकाश चंद्र जोशी, अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद अल्मोड़ा।
पर्यावरण मित्रों के आंदोलन को दिया समर्थन
अल्मोड़ा। राज्य सफाई कर्मचारी आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष दर्जा राज्य मंत्री और वाल्मीकि महासभा के प्रदेश अध्यक्ष एके सिकंदर पवार ने सफाई कर्मचारियों के आंदोलन को समर्थन दिया है। उन्होंने कहा कि सफाई कार्य में लागू ठेका प्रथा वाल्मीकि समाज के लिए भिशाप बन गई है। उन्होंने कहा कि सरकार एक ओर इन पर्यावरण मित्रों (स्वच्छक कर्मियों) को कोरोना वॉरियर की उपाधि दे रही है। वहीं दूसरी तरफ ठेके पर मात्र दो हजार रुपये में उनसे काम कराया जा रहा है, जबकि सफाई कार्य आपातकालीन सेवा में आता है। उन्होंने दु:ख जताया कि वर्तमान में राज्य में निकायों में पर्यावरण मित्रों के चार संगठन चल रहे हैं, जो एक दूसरे का विरोध करते हैं। उन्होंने चारों संगठनों के अध्यक्षों से एक मंच पर आकर वाल्मीकि समाज और वाल्मीकि महासंघ के साथ मिलकर पर्यावरण मित्रों की समस्याओं के समाधान के लिए एकजुटता से प्रयास करने की अपील की है।
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नगर क्षेत्र में कूड़ा उठाने की जिम्मेदारी पालिका परिषद की है। पालिका में 200 स्वच्छक, सफाई नायक और चालक कार्यरत हैं। पालिका कर्मियों ने पूर्व में सोमवार से हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी थी। यह सभी कार्मिक अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। इससे सोमवार को शहर क्षेत्र में कूड़ा नहीं उठा है। जगह-जगह कूड़े के ढेर पड़े हुए हैं। बारिश से कूड़ा फैल गया है।
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आंदोलित कर्मियों ने पालिका प्रांगण में धरना दिया और सभा की। उन्होंने कहा कि संगठन 15 मार्च से आंदोलन चलाए हुए है। दो दौर की वार्ता के बाद भी शासन ने मांगों का समाधान नहीं किया है। आरोप लगाया कि सरकार सफाई कर्मियों की मांगों के प्रति गंभीर नहीं है। संगठन के प्रदेश महामंत्री राजपाल पवार ने कहा कि मंगलवार 20 जुलाई को मांगों के समर्थन में जुलूस निकाला जाएगा। सभा में जिलाध्यक्ष दीपक चंदेल, शाखा अध्यक्ष सुरेश केशरी, महासचिव राजेश टॉक, उपाध्यक्ष सतीश कुमार, राजेंद्र पवार, कमल चौहान, विमला देवी, सरला देवी, आशा, शीला, मंजू देवी, रेखा देवी, अनीता, कुलवंती, किरन आदि ने भाग लिया।
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सात से आठ टन कूड़ा शहर में है बिखरा पड़ा हुआ
अल्मोड़ा। नगर पालिका अल्मोड़ा के अंतर्गत तेरह वार्डों में साढ़े छह हजार से अधिक मकान हैं। नगर क्षेत्र में करीब 70 हजार लोग निवास करते हैं। लोगों के घरों से करीब सात से आठ टन कूड़ा निकलता है। जिसे पालिका परिषद आठ वाहनों के जरिए डंपिंग जोन में डालती है। सोमवार को स्वच्छक कर्मिकों की हड़ताल से जहां तहां कूड़ा बिखरा पड़ा हुआ है। यदि जल्द हड़ताली कर्मियों की मांगों का समाधान नहीं निकलता है तो स्थिति बिगड़ने की आशंका है।
पर्यावरण मित्रों की सभी मांगें शासन स्तर की हैं। अल्मोड़ा पालिका में कोई भी कर्मचारी ठेका प्रथा पर तैनात नहीं है। कर्मचारियों के हड़ताल के नोटिस के बाद इस संबंध में शनिवार को मुख्यमंत्री, शहरी विकास मंत्री, सचिव और निदेशक को पत्र भेज दिए गए हैं। शासन से हड़ताली कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान निकालने की भी मांग की गई है। - प्रकाश चंद्र जोशी, अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद अल्मोड़ा।
पर्यावरण मित्रों के आंदोलन को दिया समर्थन
अल्मोड़ा। राज्य सफाई कर्मचारी आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष दर्जा राज्य मंत्री और वाल्मीकि महासभा के प्रदेश अध्यक्ष एके सिकंदर पवार ने सफाई कर्मचारियों के आंदोलन को समर्थन दिया है। उन्होंने कहा कि सफाई कार्य में लागू ठेका प्रथा वाल्मीकि समाज के लिए भिशाप बन गई है। उन्होंने कहा कि सरकार एक ओर इन पर्यावरण मित्रों (स्वच्छक कर्मियों) को कोरोना वॉरियर की उपाधि दे रही है। वहीं दूसरी तरफ ठेके पर मात्र दो हजार रुपये में उनसे काम कराया जा रहा है, जबकि सफाई कार्य आपातकालीन सेवा में आता है। उन्होंने दु:ख जताया कि वर्तमान में राज्य में निकायों में पर्यावरण मित्रों के चार संगठन चल रहे हैं, जो एक दूसरे का विरोध करते हैं। उन्होंने चारों संगठनों के अध्यक्षों से एक मंच पर आकर वाल्मीकि समाज और वाल्मीकि महासंघ के साथ मिलकर पर्यावरण मित्रों की समस्याओं के समाधान के लिए एकजुटता से प्रयास करने की अपील की है।

सफाई कर्मियों की हड़ताल से अल्मोड़ा के चौक बाजार बाजार में डंप पड़ा कूड़ा। आवाजाही के दौरान लोगो?- फोटो : ALMORA