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संजोई जाएंगी 134 रणबांकुरों की कुर्बानियां
ब्यूरो, अमर उजाला/ बागेश्वर
Updated Fri, 30 Jan 2015 12:16 AM IST
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विभिन्न युद्धों और आपरेशनों में शहीद हुए जिले के सैनिकों के सम्मान के लिए नगर क्षेत्र में स्मारक बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री हरीश रावत के निर्देश के बाद प्रशासन ने इसके लिए भूमि चयन की कोशिश शुरू कर दी है। स्मारक में जिले के 134 जांबाजों की स्मृतियां संजोई जाएंगी। पर्यटन विकास में भी इससे मदद मिलेगी।
अभी तक जिले के 134 सैनिक देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दे चुके हैं। बागेश्वर जिले के 12000 नौजवान इस समय सेना में रहकर देश की सेवा कर रहे हैं। 11 हजार पूर्व सैनिक जिले के विभिन्न हिस्साें में निवास कर रहे हैं। विभिन्न मोर्चों पर यहां के 134 सैनिकों ने शहादत दी है। 30 सैनिक अपंगता के साथ सेवानिवृत्त हुए। कारगिल युद्ध में तीन लोग शहीद हुए थे। कर्तव्य परायणता और बहादुरी के लिए सात लोगों को वीर चक्र, नौ लोगों को शौर्य चक्र, 34 को सेना मैडल और नौ को मेंशन इन डिस्पैच प्रदान किया गया।
बागेश्वर जिला सैनिक बाहुल्य है। यहां के अधिकतर लोग सेना में हैं, लेकिन बागेश्वर में अभी तक सैनिकों की सुविधा के नाम पर मात्र एक कैंटीन है। यहां अभी तक शहीद सैनिकों के लिए स्मारक नहीं बनाया जा सका है। सैनिक परिवारों और जिले के लोगों की भावनाओं को देखते हुए अब मुख्यमंत्री हरीश रावत ने यहां स्मारक बनाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रशासन इसकी तैयारी मेें जुट गया है।
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स्मारक के लिए भूमि चयन की प्रक्रिया शुरू
बागेश्वर। बागेश्वर में शहीद स्मारक बनाने के संबंध में एसडीएम हरवीर सिंह ने अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होेंने स्मारक के लिए भूमि का चयन करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भूमि चयन के बाद सरकार को आगणन भेजा जाएगा। स्मारक का रखरखाव नगर पालिका करेगी। बैठक में जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल डीके कौशिक, अधिशासी अधिकारी ईश्वर सिंह रावत सहित पर्यटन और संस्कृति विभाग के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
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अभी तक जिले के 134 सैनिक देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दे चुके हैं। बागेश्वर जिले के 12000 नौजवान इस समय सेना में रहकर देश की सेवा कर रहे हैं। 11 हजार पूर्व सैनिक जिले के विभिन्न हिस्साें में निवास कर रहे हैं। विभिन्न मोर्चों पर यहां के 134 सैनिकों ने शहादत दी है। 30 सैनिक अपंगता के साथ सेवानिवृत्त हुए। कारगिल युद्ध में तीन लोग शहीद हुए थे। कर्तव्य परायणता और बहादुरी के लिए सात लोगों को वीर चक्र, नौ लोगों को शौर्य चक्र, 34 को सेना मैडल और नौ को मेंशन इन डिस्पैच प्रदान किया गया।
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बागेश्वर जिला सैनिक बाहुल्य है। यहां के अधिकतर लोग सेना में हैं, लेकिन बागेश्वर में अभी तक सैनिकों की सुविधा के नाम पर मात्र एक कैंटीन है। यहां अभी तक शहीद सैनिकों के लिए स्मारक नहीं बनाया जा सका है। सैनिक परिवारों और जिले के लोगों की भावनाओं को देखते हुए अब मुख्यमंत्री हरीश रावत ने यहां स्मारक बनाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रशासन इसकी तैयारी मेें जुट गया है।
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स्मारक के लिए भूमि चयन की प्रक्रिया शुरू
बागेश्वर। बागेश्वर में शहीद स्मारक बनाने के संबंध में एसडीएम हरवीर सिंह ने अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होेंने स्मारक के लिए भूमि का चयन करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भूमि चयन के बाद सरकार को आगणन भेजा जाएगा। स्मारक का रखरखाव नगर पालिका करेगी। बैठक में जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल डीके कौशिक, अधिशासी अधिकारी ईश्वर सिंह रावत सहित पर्यटन और संस्कृति विभाग के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।