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जीवन के अंतिम पड़ाव में पहुंचा मृग विहार का नटखट मोंटी

Fri, 05 Oct 2018 11:45 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो  अल्मोड़ा।
अमर उजाला ब्यूरो  अल्मोड़ा। Updated Fri, 05 Oct 2018 11:45 PM IST
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Monty Vaughan's Naughty Monty arrived at the last stop of life
मृग विहार में घूमता सफेद रंग का आकर्षक हिरन। - फोटो : अमर उजाला
 
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अल्मोड़ा। अल्मोड़ा मृग विहार की शान सफेद रंग का नटखट मोंटी (बंदर) अब बूढ़ा हो चुका है। मृग विहार पहुंचने वाले बच्चे नटखट मोंटी के पास दौड़े चले आते थे लेकिन बुढ़ापे के कारण पिछले कुछ समय से मोंटी में नटखटपन भी नहीं दिखाई पड़ रहा है। पिछले कुछ महीनों से वह ज्यादातर वह अपने बाड़े में लेटा रहता है। अब वह वृद्धावस्था के दिन बिता रहा है और यह माना जा रहा है कि वह कुछ ही समय का मेहमान है।      

मोंटी बंदर (एल्विनो) को मार्च 2004 में एक विदेशी पर्यटक अपने साथ अल्मोड़ा लाया था। वही इसे मृग विहार को सौंप गया। तब से यह नटखट बंदर मृग विहार में आने वाले पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन गया। खास तौर पर बच्चे मोंटी से काफी आकर्षित होते थे। वह अपने नटखटपन से बच्चों को खुश कर देता था। मोंटी स्वभाव से काफी शांत है और कभी भी किसी की तरफ झपटने नहीं आता। अब मोंटी की उम्र करीब 18 साल हो चुकी है और वह वृद्धावस्था में पहुंच चुका है। इसी कारण पिछले दो-तीन सालों से उसकी फुर्ती के साथ ही नटखटपन भी देखने को नहीं मिल रहा है।  इधर दो-तीन महीनों से वह काफी रुग्ण हो चुका है। कई बार वह बाड़े में एक वृद्ध मनुष्य की मुद्रा में लेट जाता है। 
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मोंटी..कहने पर वह सिर ऊपर उठाकर लोगों की तरफ देखता जरूर है। कभी-कभार वह धीरे से टहलने लगता है। मृग विहार के रेंज अधिकारी मोहन राम बताते हैं कि अब मोंटी की भूख भी कम हो चुकी है और कई बार वह केले आदि भी बाड़े में ही पड़े रह जाते हैं।  
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अब सफेद रंग का डीयर बन रहा आकर्षण का केंद्र  
अल्मोड़ा। मोंटी जहां बुढ़ापे के चलते अपना आकर्षण खो चुका है लेकिन वहीं दो-तीन साल पहले मृग विहार में ही पैदा हुआ एक सफेद हिरन यहां आने वाले पर्यटकों के लिए कोतूहल बन रहा है। अब मोंटी की जगह पर्यटक मृग विहार आने वाले पर्यटक इस सफेद हिरन की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। मृग विहार के कर्मचारियों के मुताबिक यहां आने वाले पर्यटक सफेद हिरन को देखकर काफी खुश हो जाते हैं। मृग विहार के कर्मचारियों के मुताबिक इसे तीन-चार साल पहले मृग विहार के भीतर ही एक मादा चीतल (हिरन की प्रजाति) ने जन्म दिया अब यह बड़ा हो चुका है।  

कोट- 
सफेद रंग का बंदर और हिरन (एल्विनो) कोई विशेष प्रजाति के नहीं हैं। शरीर में मिलेनोसाइट नहीं होने के कारण त्वचा का प्राकृतिक रंग गायब हो जाता है और इनका रंग सफेद हो जाता है। ह्वाइट टाइगर भी इसी तरह का उदाहरण है।  
प्रो.इला बिष्ट, विभागाध्यक्ष जंतु विज्ञान विभाग एसएसजे परिसर अल्मोड़ा 
   
 
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