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Almora News: बटन मशरूम की पैदावार बढ़ाने के लिए जीवाणु का जादू
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बागेश्वर। मशरूम उगाने वाले किसानों के लिए यह खोज किसी जादू से कम नहीं। मशरूम के कंपोस्ट में जैव अभिवृद्धि कारक जीवाणु एनएआरएस-9 को मिलाकर प्रयोग सफल रहा है।
परिणाम देख वैज्ञानिक भी चकित रह गए। सामान्य कंपोस्ट ने 20.5 किलो उपज दी। एक क्विंटल सामान्य कंपोस्ट में एनएआरएस-9 की महज 0.01% मात्रा मिलाने पर उपज 27.5 किलो (34 फीसदी) हो गई। वृद्धि हार्मोन वाले कंपोस्ट से भी बढ़ोतरी मिली लेकिन सबसे सफल एनएआरएस-9 ही रहा। इकृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक इस मिश्रित कंपोस्ट को अब किसानों तक पहुंचाने की तैयारियाें में जुटे हैं।
मशरूम कंपोस्ट पर किए गए तीन प्रयोग
केंद्र के विशेषज्ञ हरीश चंद्र जोशी ने मशरूम कंपोस्ट पर तीन दिलचस्प प्रयोग किए। पहला सामान्य कंपोस्ट पर, दूसरे में उसी कंपोस्ट में जैव अभिवृद्धिकारक जीवाणु एनएआरएस-9 की बेहद मामूली 0.01% मात्रा मिलाई गई। तीसरे प्रयोग में कंपोस्ट को इंडोल ब्यूटारिक अम्ल जैसे वृद्धि हार्मोन से संवारा गया।
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विवेकानंद संस्थान में विकसित हुआ है एनएआरएस-9
एनएआरएस-9 जीवाणु कमाल का है। यह कोई आम खोज नहीं है। इसे दो साल पहले विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान अल्मोड़ा के सूक्ष्मजीव विशेषज्ञ डॉ. पंकज कुमार मिश्रा ने विकसित किया था। यह न सिर्फ उपज बढ़ाता है बल्कि मशरूम को ग्रीन मोल्ड जैसी बीमारी से भी बचाता है। इतना ही नहीं इससे मशरूम का कवक जाल पांच दिन पहले फैलने लगता है और उत्पादन गति पकड़ लेता है।
सब्सिडी के बाद 900 रुपये प्रति किलो दाम
अब बात करते हैं खर्च की। सामान्य कंपोस्ट 1400 रुपये प्रति क्विंटल मिलता है। सब्सिडी के बाद 700 रुपये में मिल जाता है। यदि किसान एनएआरएस-9 मिला कंपोस्ट लेते हैं तो उन्हें बस 200 रुपये अतिरिक्त देने होंगे। बदले में प्रति क्विंटल 7 किलो से ज्यादा अतिरिक्त मशरूम की उपज यानी थोड़े से खर्च में बड़ा फायदा। छोटे किसानों के लिए यह आय बढ़ाने का एक सरल और शानदार तरीका साबित हो सकता है।
वर्जन
बटन मशरूम का उत्पादन बढ़ाने के लिए केंद्र के वैज्ञानिकों की ओर से किया गया परीक्षण सफल रहा। जिले में कई किसान मशरूम उत्पादन कर आजीविका चलाते हैं। यह प्रयोग उनकी उपज और आय बढ़ाने में मददगार सिद्ध होगा। अब मशरूम उत्पादकों को अभिवृद्धिकारक जीवाणु वाले कंपोस्ट का प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। -डॉ. राजकुमार, केंद्र प्रभारी, कृषि विज्ञान केंद्र काफलीगैर
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परिणाम देख वैज्ञानिक भी चकित रह गए। सामान्य कंपोस्ट ने 20.5 किलो उपज दी। एक क्विंटल सामान्य कंपोस्ट में एनएआरएस-9 की महज 0.01% मात्रा मिलाने पर उपज 27.5 किलो (34 फीसदी) हो गई। वृद्धि हार्मोन वाले कंपोस्ट से भी बढ़ोतरी मिली लेकिन सबसे सफल एनएआरएस-9 ही रहा। इकृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक इस मिश्रित कंपोस्ट को अब किसानों तक पहुंचाने की तैयारियाें में जुटे हैं।
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मशरूम कंपोस्ट पर किए गए तीन प्रयोग
केंद्र के विशेषज्ञ हरीश चंद्र जोशी ने मशरूम कंपोस्ट पर तीन दिलचस्प प्रयोग किए। पहला सामान्य कंपोस्ट पर, दूसरे में उसी कंपोस्ट में जैव अभिवृद्धिकारक जीवाणु एनएआरएस-9 की बेहद मामूली 0.01% मात्रा मिलाई गई। तीसरे प्रयोग में कंपोस्ट को इंडोल ब्यूटारिक अम्ल जैसे वृद्धि हार्मोन से संवारा गया।
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विवेकानंद संस्थान में विकसित हुआ है एनएआरएस-9
एनएआरएस-9 जीवाणु कमाल का है। यह कोई आम खोज नहीं है। इसे दो साल पहले विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान अल्मोड़ा के सूक्ष्मजीव विशेषज्ञ डॉ. पंकज कुमार मिश्रा ने विकसित किया था। यह न सिर्फ उपज बढ़ाता है बल्कि मशरूम को ग्रीन मोल्ड जैसी बीमारी से भी बचाता है। इतना ही नहीं इससे मशरूम का कवक जाल पांच दिन पहले फैलने लगता है और उत्पादन गति पकड़ लेता है।
सब्सिडी के बाद 900 रुपये प्रति किलो दाम
अब बात करते हैं खर्च की। सामान्य कंपोस्ट 1400 रुपये प्रति क्विंटल मिलता है। सब्सिडी के बाद 700 रुपये में मिल जाता है। यदि किसान एनएआरएस-9 मिला कंपोस्ट लेते हैं तो उन्हें बस 200 रुपये अतिरिक्त देने होंगे। बदले में प्रति क्विंटल 7 किलो से ज्यादा अतिरिक्त मशरूम की उपज यानी थोड़े से खर्च में बड़ा फायदा। छोटे किसानों के लिए यह आय बढ़ाने का एक सरल और शानदार तरीका साबित हो सकता है।
वर्जन
बटन मशरूम का उत्पादन बढ़ाने के लिए केंद्र के वैज्ञानिकों की ओर से किया गया परीक्षण सफल रहा। जिले में कई किसान मशरूम उत्पादन कर आजीविका चलाते हैं। यह प्रयोग उनकी उपज और आय बढ़ाने में मददगार सिद्ध होगा। अब मशरूम उत्पादकों को अभिवृद्धिकारक जीवाणु वाले कंपोस्ट का प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। -डॉ. राजकुमार, केंद्र प्रभारी, कृषि विज्ञान केंद्र काफलीगैर