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संस्कृति के संरक्षण में स्थानीय मेलों का बड़ा महत्व
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भिकियासैंण के चनुली सरपटा गिरै कौतिक में बाल प्रहरी के संपादक उदय किरौला को सम्मानित करते पूर्व ?
- फोटो : ALMORA
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भिकियासैंण (अल्मोड़ा)। विकासखंड भिकियासैंण के चनुली सरपटा में ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, पौराणिक, व्यापारिक गिरै कौतिक का समापन पारंपरिक झोड़ा गायन के साथ हुआ। मुख्य अतिथि पूर्व दर्जा मंत्री कैलाश पंत ने कहा कि संस्कृति के संरक्षण में स्थानीय मेलों का बड़ा महत्व है। इस अवसर पर हुई वॉलीबाल प्रतियोगिता में रानीखेत विजेता और स्याल्दे की टीम उपविजेता रही।
पंत ने कहा कि वर्तमान दौर में पाश्चात्य संस्कृति हावी होती जा रही है। ऐसे में संस्कृति, बोली और भाषा को बचाए रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। विशिष्ट अतिथि राज्य आंदोलनकारी नरेंद्र सौतियाल ने कहा कि चनुली सरपटा का गिरै कौतिक ऐतिहासिक मेला है। बालप्रहरी के संपादक उदय किरौला ने कुमाऊंनी में संबोधन करते हुए कहा कि प्रतियोगिता के वर्तमान दौर में अंग्रेजी और दूसरी भाषा सीखें, परंतु अपनी बोली को नहीं भूलना चाहिए। मेले में टीम घुघुती जागर में शामिल राजेंद्र ढैला, राजेंद्र प्रसाद, गिरीश शर्मा, प्रेम सिंह रावत, संजय, गिरीश मोहन, नंदन सिंह नयाल आदि ने कुमाऊंनी लोकगीत प्रस्तुत किए। दीपिका किरौला ने कुमाऊंनी लोकनृत्य प्रस्तुत किया। आरसीएम पब्लिक स्कूल बासोट, जूनियर हाईस्कूल सीम सहित विभिन्न स्कूलों के बच्चों के साथ ही सुरेंद्र रावत, चंदन प्रकाश, मंगल सिंह आदि लोक कलाकारों ने गीत प्रस्तुत किए।
इस अवसर पर गिरै कौतिक और सांस्कृतिक विकास समिति की ओर से बाल प्रहरी के संपादक उदय किरौला, रूप सिंह कड़ाकोटी, दर्शन सिंह कड़ाकोटी, जसवंत सिंह, रेनू मनराल, शिव सिंह, भगीरथ लाल, मदनमोहन सिंह बिष्ट, नरेंद्र सिंह सौतियाल, कांति देवी को सम्मानित किया गया। दर्शन कड़ाकोटी, जसवंत सिंह, संदीप खुल्बे, भुवन सिंह, त्रिलोक सिंह भंडारी, गिरीश चंद्र, डिकर सिंह, दिनेश जोशी, कार्तिक पंत, नंदन सिंह नेगी, अंबादत्त खुल्बे आदि उपस्थित रहे। संचालन करते हुए समिति के अध्यक्ष कृपाल सिंह शीला ने सभी का आभार जताया।
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पंत ने कहा कि वर्तमान दौर में पाश्चात्य संस्कृति हावी होती जा रही है। ऐसे में संस्कृति, बोली और भाषा को बचाए रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। विशिष्ट अतिथि राज्य आंदोलनकारी नरेंद्र सौतियाल ने कहा कि चनुली सरपटा का गिरै कौतिक ऐतिहासिक मेला है। बालप्रहरी के संपादक उदय किरौला ने कुमाऊंनी में संबोधन करते हुए कहा कि प्रतियोगिता के वर्तमान दौर में अंग्रेजी और दूसरी भाषा सीखें, परंतु अपनी बोली को नहीं भूलना चाहिए। मेले में टीम घुघुती जागर में शामिल राजेंद्र ढैला, राजेंद्र प्रसाद, गिरीश शर्मा, प्रेम सिंह रावत, संजय, गिरीश मोहन, नंदन सिंह नयाल आदि ने कुमाऊंनी लोकगीत प्रस्तुत किए। दीपिका किरौला ने कुमाऊंनी लोकनृत्य प्रस्तुत किया। आरसीएम पब्लिक स्कूल बासोट, जूनियर हाईस्कूल सीम सहित विभिन्न स्कूलों के बच्चों के साथ ही सुरेंद्र रावत, चंदन प्रकाश, मंगल सिंह आदि लोक कलाकारों ने गीत प्रस्तुत किए।
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इस अवसर पर गिरै कौतिक और सांस्कृतिक विकास समिति की ओर से बाल प्रहरी के संपादक उदय किरौला, रूप सिंह कड़ाकोटी, दर्शन सिंह कड़ाकोटी, जसवंत सिंह, रेनू मनराल, शिव सिंह, भगीरथ लाल, मदनमोहन सिंह बिष्ट, नरेंद्र सिंह सौतियाल, कांति देवी को सम्मानित किया गया। दर्शन कड़ाकोटी, जसवंत सिंह, संदीप खुल्बे, भुवन सिंह, त्रिलोक सिंह भंडारी, गिरीश चंद्र, डिकर सिंह, दिनेश जोशी, कार्तिक पंत, नंदन सिंह नेगी, अंबादत्त खुल्बे आदि उपस्थित रहे। संचालन करते हुए समिति के अध्यक्ष कृपाल सिंह शीला ने सभी का आभार जताया।
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