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Almora News: नौले-धारों का संरक्षण जरूरी
Thu, 01 Jun 2023 11:59 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Thu, 01 Jun 2023 11:59 PM IST
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सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय भारत सरकार के संयुक्त सचिव और वित्त सलाहकार राजेश सिंह ने जल शक्ति
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अल्मोड़ा। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय भारत सरकार के संयुक्त सचिव और वित्त सलाहकार राजेश सिंह ने जल शक्ति अभियान (कैच द रेन) के तहत बृहस्पतिवार को हवालबाग और ताड़ीखेत विकासखंड में बनाए गए अमृत सरोवर और जल संरक्षण के कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि अमृत सरोवरों के आसपास पौधे लगाने होंगे ताकि इन सरोवरों में पानी की उपलब्धता बनी रहे।
उन्होंने हवालबाग के वल्सा गांव, ताड़ीखेत के सोनी बिनसर में बने अमृत सरोवरों सहित निर्माणाधीन गगास बांध और रानीझील का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि इन सरोवर और बांध के पास पौधरोपण करने के साथ उनकी देखभाल करनी होगी। जल संवर्द्धन के लिए कई जगह खाल का निर्माण किया जाना चाहिए। नौले-धारों के संरक्षण की भी जरूरत है। इन कार्यों के भरोसे हम जल को संरक्षित कर भविष्य में जल संकट की गंभीर समस्या से निपट सकेंगे।
इसके बाद संयुक्त सचिव ने विकास भवन सभागार में अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान कोसी पुनर्जनन अभियान के समन्वयक शिवेंद्र प्रताप सिंह ने कोसी पुनर्जनन अभियान के तहत किए गए जल संरक्षण कार्यों की जानकारी दी। इस दौरान सीडीओ अंशुल सिंह, केंद्रीय भूजल बोर्ड के इबादुर रहमान, परियोजना निदेशक चंद्रा फर्ल्याल आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने हवालबाग के वल्सा गांव, ताड़ीखेत के सोनी बिनसर में बने अमृत सरोवरों सहित निर्माणाधीन गगास बांध और रानीझील का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि इन सरोवर और बांध के पास पौधरोपण करने के साथ उनकी देखभाल करनी होगी। जल संवर्द्धन के लिए कई जगह खाल का निर्माण किया जाना चाहिए। नौले-धारों के संरक्षण की भी जरूरत है। इन कार्यों के भरोसे हम जल को संरक्षित कर भविष्य में जल संकट की गंभीर समस्या से निपट सकेंगे।
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इसके बाद संयुक्त सचिव ने विकास भवन सभागार में अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान कोसी पुनर्जनन अभियान के समन्वयक शिवेंद्र प्रताप सिंह ने कोसी पुनर्जनन अभियान के तहत किए गए जल संरक्षण कार्यों की जानकारी दी। इस दौरान सीडीओ अंशुल सिंह, केंद्रीय भूजल बोर्ड के इबादुर रहमान, परियोजना निदेशक चंद्रा फर्ल्याल आदि मौजूद रहे।
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