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मेडिकल कालेज में फैकल्टी की कमी रही मान्यता नहीं मिलने की मुख्य वजह
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अल्मोड़ा। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) से अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस प्रथम वर्ष की कक्षाएं शुरू करने की अनुमति न मिलने की मुख्य वजह मानकों के अनुसार फैकल्टी उपलब्ध न हो पाना रहा।
प्रदेश सरकार अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज में 2019 में ही एमबीबीएस प्रथम वर्ष की कक्षाएं शुरू करवाना चाहती थी लेकिन भवनों का निर्माण पूरा न होने और फैकल्टी में डॉक्टरों की कमी के कारण पिछले साल अनुमति नहीं मिल सकी। उसके बाद सरकार ने 2020 में एमबीबीएस प्रथम वर्ष के लिहाज से भवनों और अन्य तैयारियों को पूरा करने के निर्देश दिए थे लेकिन इस बार भी तैयारियां पूरी नहीं हो सकी। इधर, एनएमसी ने पिछले सप्ताह अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरजी नौटियाल से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये मेडिकल कॉलेज में प्रगति की जानकारी ली। सोमवार को आयोग ने तैयारियों को नाकाफी बताते हुए लिखित रूप में मान्यता देने से इंकार कर दिया।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरजी नौटियाल ने बताया कि राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग ने मान्यता न देने के करणों का उल्लेख नहीं किया है लेकिन मुख्य रूप से फैकल्टी की कमी ही इसमें आड़े आई है। डॉ. नौटियाल ने बताया कि आयोग ने फैकल्टी की उपलब्धता के बारे में जानकारी मांगी थी लेकिन हल्द्वानी से छह डॉक्टरों की ज्वाइनिंग के बावजूद एमबीबीएस प्रथम वर्ष के हिसाब से फैकल्टी में 48 प्रतिशत डॉक्टरों की कमी थी। संभवत: मुख्य रूप से इसी कारण मान्यता नहीं मिल पायी।
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फैकल्टी की कमी पूरी करने का शीघ्र प्रयास किया जाएगा। अन्य तैयारियां भी जल्द पूरी की जाएंगी और अब अगले साल एमबीबीएस की कक्षाएं शुरू करने को दोबारा मान्यता के लिए आवेदन किया जाएगा। - डॉ. आरजी नौटियाल, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज अल्मोड़ा।
जल निगम करेगा मेडिकल कॉलेज के भवनों का निर्माण
अल्मोड़ा। मेडिकल कॉलेज के भवनों का निर्माण उत्तर प्रदेश सरकार की एजेंसी यूपी निर्माण निगम को दिया गया था लेकिन इस निर्माण एजेंसी की मनमानी के कारण काम में काफी विलंब हो गया। इस कारण सरकार ने अब यह काम उत्तराखंड जल निगम की निर्माण और डिजाइन शाखा को सौंपने का फैसला किया है। पर्याप्त बजट उपलब्ध होने के बावजूद अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज के भवनों का 65 से 70 प्रतिशत ही निर्माण हो सका है। दरअसल यूपी सरकार के अधीन होने के कारण निर्माण एजेंसी के अधिकारी उत्तराखंड के अफसरों की बात ही नहीं सुनते थे। इस कारण फरवरी के बाद से निर्माण कार्य ठप है। अनलॉक के बाद सभी सरकारी और गैर सरकारी निर्माण शुरू हो चुके हैं लेकिन मेडिकल कॉलेज का काम दोबारा शुरू नहीं हो पाया है। इसे देखते हुए अब प्रदेश सरकार ने एमबीबीएस कक्षाएं शुरू करने के लिए जरूरी भवनों का निर्माण कार्य जल निगम की निर्माण और डिजाइन शाखा को सौंपने का फैसला कर लिया है। जल निगम ने इसके लिए टेंडर भी जारी कर दिए हैं और अब जल्द कार्य शुरू होने की संभावना है। सौंपे गए कार्य समय पर हुए तो भविष्य में अन्य कार्य भी जल निगम को सौंपे जाने की संभावना है।
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प्रदेश सरकार अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज में 2019 में ही एमबीबीएस प्रथम वर्ष की कक्षाएं शुरू करवाना चाहती थी लेकिन भवनों का निर्माण पूरा न होने और फैकल्टी में डॉक्टरों की कमी के कारण पिछले साल अनुमति नहीं मिल सकी। उसके बाद सरकार ने 2020 में एमबीबीएस प्रथम वर्ष के लिहाज से भवनों और अन्य तैयारियों को पूरा करने के निर्देश दिए थे लेकिन इस बार भी तैयारियां पूरी नहीं हो सकी। इधर, एनएमसी ने पिछले सप्ताह अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरजी नौटियाल से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये मेडिकल कॉलेज में प्रगति की जानकारी ली। सोमवार को आयोग ने तैयारियों को नाकाफी बताते हुए लिखित रूप में मान्यता देने से इंकार कर दिया।
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मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरजी नौटियाल ने बताया कि राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग ने मान्यता न देने के करणों का उल्लेख नहीं किया है लेकिन मुख्य रूप से फैकल्टी की कमी ही इसमें आड़े आई है। डॉ. नौटियाल ने बताया कि आयोग ने फैकल्टी की उपलब्धता के बारे में जानकारी मांगी थी लेकिन हल्द्वानी से छह डॉक्टरों की ज्वाइनिंग के बावजूद एमबीबीएस प्रथम वर्ष के हिसाब से फैकल्टी में 48 प्रतिशत डॉक्टरों की कमी थी। संभवत: मुख्य रूप से इसी कारण मान्यता नहीं मिल पायी।
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फैकल्टी की कमी पूरी करने का शीघ्र प्रयास किया जाएगा। अन्य तैयारियां भी जल्द पूरी की जाएंगी और अब अगले साल एमबीबीएस की कक्षाएं शुरू करने को दोबारा मान्यता के लिए आवेदन किया जाएगा। - डॉ. आरजी नौटियाल, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज अल्मोड़ा।
जल निगम करेगा मेडिकल कॉलेज के भवनों का निर्माण
अल्मोड़ा। मेडिकल कॉलेज के भवनों का निर्माण उत्तर प्रदेश सरकार की एजेंसी यूपी निर्माण निगम को दिया गया था लेकिन इस निर्माण एजेंसी की मनमानी के कारण काम में काफी विलंब हो गया। इस कारण सरकार ने अब यह काम उत्तराखंड जल निगम की निर्माण और डिजाइन शाखा को सौंपने का फैसला किया है। पर्याप्त बजट उपलब्ध होने के बावजूद अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज के भवनों का 65 से 70 प्रतिशत ही निर्माण हो सका है। दरअसल यूपी सरकार के अधीन होने के कारण निर्माण एजेंसी के अधिकारी उत्तराखंड के अफसरों की बात ही नहीं सुनते थे। इस कारण फरवरी के बाद से निर्माण कार्य ठप है। अनलॉक के बाद सभी सरकारी और गैर सरकारी निर्माण शुरू हो चुके हैं लेकिन मेडिकल कॉलेज का काम दोबारा शुरू नहीं हो पाया है। इसे देखते हुए अब प्रदेश सरकार ने एमबीबीएस कक्षाएं शुरू करने के लिए जरूरी भवनों का निर्माण कार्य जल निगम की निर्माण और डिजाइन शाखा को सौंपने का फैसला कर लिया है। जल निगम ने इसके लिए टेंडर भी जारी कर दिए हैं और अब जल्द कार्य शुरू होने की संभावना है। सौंपे गए कार्य समय पर हुए तो भविष्य में अन्य कार्य भी जल निगम को सौंपे जाने की संभावना है।