फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Almora News ›   Lwali Village of MS Dhaoni

Almora News: धोनी का गांव विकास के चौके-छक्के के लिए तरसा

Mon, 19 Jun 2023 12:09 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा Updated Mon, 19 Jun 2023 12:09 AM IST
विज्ञापन
Lwali Village of MS Dhaoni
क्रिकेटर महेंद्र सिंह धौनी का पैतृक गांव ल्वाली।। संवाद
जैंती (अल्मोड़ा)। अपने हेलिकॉप्टर शॉट से विपक्षी टीम के छक्के छुड़ाने वाले भारतीय टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के पैतृक गांव में विकास के चौके और छक्के की बारिश नहीं हो पाई है। उनका गांव अब तक सड़क से नहीं जुड़ सका है। अस्पताल न होने से ग्रामीण उपचार के लिए पांच किमी दूर पहुंच रहे हैं। गांव में खेल के मैदान की सुविधा नहीं है। मूलभूत सुविधाओं के अभाव में एक दशक में गांव के 20 परिवार पलायन कर चुके हैं।
विज्ञापन

धोनी मूलरूप से अल्मोड़ा जिले की जैंती तहसील के ल्वाली गांव के निवासी हैं। इस गांव का सबसे बड़ा तोक बिराड़ सड़क से नहीं जुड़ सका है। गांव के लोग छह किमी पैदल चलकर नजदीकी स्टेशन जैंती पहुंचते हैं। बुजुर्गों और मरीजों को दिक्कत का सामना करना पड़ता है। बारिश में बदहाल पैदल रास्ता उनकी कठिन परीक्षा लेता है।
विज्ञापन




मरीजों का डोली का सहारा

जैंती। धोनी के गांव में स्वास्थ्य केंद्र नहीं खुल सका है। ऐसे में मरीजों और गर्भवतियों को उपचार और प्रसव के लिए पांच किमी दूर जैंती की दौड़ लगानी पड़ रही है। ग्रामीण किसी तरह गंभीर मरीजों और गर्भवतियों को डोली के सहारे अस्पताल पहुंचा रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

मांग

पूरे तहसील क्षेत्र में खेल मैदान तक नहीं है। युवाओं का कहना है कि धोनी के नाम से क्षेत्र में एक स्टेडियम बन जाता तो यह पूरे क्षेत्र और जिले के गौरव की बात होती और वे भी उनकी तरह खेलों में बेहतर भविष्य बनाकर जिले और देश का नाम रोशन कर पाते।



2003 में गांव आए थे धोनी

अल्मोड़ा। वर्ष 1970 के दशक में धोनी के पिता पान सिंह धोनी नौकरी के लिए रांची जाकर बस गए लेकिन उनका गांव से जुड़ाव अब भी है। महेंद्र सिंह धोनी वर्ष 2003 में अपने गांव आए थे।
बोले ग्रामीण



गांव में बंदर, सुअरों के आतंक से खेती करना मुश्किल हो गया है। रोजगार न होने से गांव से लोग पलायन कर रहे हैं। गांव ने देश को महेंद्र सिंह धोनी जैसा क्रिकेटर दिया है लेकिन आज गांव का सुधलेवा कोई नहीं है। - दिनेश धोनी, ग्राम प्रधान।


गांव के कई युवा धोनी की तरह ही क्रिकेटर बनना चाहते हैं लेकिन गांव में मैदान तक नहीं है। इस कारण खेल प्रतिभाएं बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पा रहीं हैं। रोजगार आदि सुविधाओं के लिए युवा पलायन करने के लिए मजबूर हैं। - दीपक धोनी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed