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कुमाऊं में सात दिनों में सामान्य से दोगुना हुई बारिश
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अल्मोड़ा। इस बार गर्मियों के मौसम में अच्छी बारिश हो रही है। पिछले तीन सप्ताह से बारिश अनवरत जारी है। कुमाऊं के सभी जनपदों में बीते सात दिनों में अच्छी बारिश हुई है।
उत्तराखंड मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के अनुसार कुमाऊं में पांच मई से 12 मई तक सामान्य तौर पर कम ही बारिश होती थी। सामान्य दिनों में कुमाऊं के सभी छह जनपदों में कुल 87.8 मिमी बारिश दर्ज होती है। जबकि इस बीच सभी छह जनपदों में कुल 172.8 मिमी बारिश हो गई है। यह सामान्य से करीब दोगुना है। बारिश होने से जंगलों को तो फायदा मिल रहा है लेकिन बारिश के साथ गिर रहे ओले की वजहों से काश्तकारों के चेहरे पर मायूसी है।
पांच मई से 12 मई तक कुमाऊं में हुई बारिश
जनपद सामान्य वर्षा इस बार हुई बारिश
अल्मोड़ा 14.1 मिमी 26.1 मिमी
बागेश्वर 14.1 मिमी 36.9 मिमी
चंपावत 11.7 मिमी 26.9 मिमी
पिथौरागढ़ 21.2 मिमी 39 मिमी
नैनीताल 19.6 मिमी 29 मिमी
यूएसनगर 7.1मिमी 14.9 मिमी
नोट- आंकड़े उत्तराखंड मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार
अल्मोड़ा में शाम को हुई झमाझम बारिश
अल्मोड़ा। मंगलवार शाम की हुई बारिश के बाद बुधवार को भी अल्मोड़ा में बारिश के आसार बने रहे। यहां दिन भर बादल छाए रहे। और शाम होते ही बारिश शुरू हो गई। लॉकडाउन होने की वजह से सड़कों पर पहले से ही सन्नाटा पसरा हुआ था। बारिश के दौरान और सन्नाटा बढ़ गया। यहां बीते कई दिनों से बारिश होने की वजह से अल्मोड़ा में ठंड काफी बढ़ गई है। यहां पर अधिकतम तापमान सामान्य से नौ डिग्री सेल्सियस कम चल रहा है। लोग मई में भी स्वेटर पहन रहे हैं और रजाई ओढ़ रहे हैं।
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जंगलों में आई नई घास
अल्मोड़ा। बारिश होने की वजह से जंगलों में आग की घटनाएं थम चुकीं हैं। अप्रैल के दूसरे पखवाड़े तक वनाग्नि की घटनाएं पिछले कई रिकार्ड तोड़ चुकी थीं। जंगल की आग गांव, कस्बों और शहरों तक पहुंचने लगी थी। लाखों की वन संपदा जलकर राख हो गई थी। वन विभाग के अनुसार पिछले तीन सप्ताह से हो रही बारिश के चलते अब जंगलों में नई हरी घास आने लगी है। हरियाली का स्तर बढ़ने लगा है। आग से झुलसे जंगलों को नया जीवन मिल रहा है। साथ ही बारिश की वजह से जमीन में भी काफी नमी बनी हुई है। इस वजह से वनाग्नि की घटनाओं पर फिलहाल नियंत्रण है।
बागेश्वर में बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि, फसलों को नुकसान
बागेश्वर। जिले में बारिश का सिलसिला जारी है। बुधवार को जिला मुख्यालय के साथ ही विभिन्न स्थानों में बारिश और हल्की ओलावृष्टि हुई। वहीं मंगलवार की शाम को धरमघर के बास्ती गांव में ओलावृष्टि से गेहूं की खड़ी फसल के साथ ही अखरोट और आड़ू को नुकसान पहुंचा है।
बास्ती के ग्राम प्रधान केदार सिंह महर ने बताया कि उनके गांव में लगातार ओलावृष्टि हो रही है। ओलावृष्टि से हर सिंह, कुंवर सिंह, नेत्र सिंह, मोहनी देवी, जवाहर सिंह, मोहन सिंह, नंदन सिंह, खुशाल सिंह, भगवान सिंह समेत तमाम किसानों की फसल को भारी नुकसान हुआ है। गांव में अखरोट का अच्छा उत्पादन होता है। ओलावृष्टि से अखरोट के साथ ही आड़ू और गेहूं की फसल भी नष्ट हो गई है। उन्होंने प्रशासन से किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की है।
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उत्तराखंड मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के अनुसार कुमाऊं में पांच मई से 12 मई तक सामान्य तौर पर कम ही बारिश होती थी। सामान्य दिनों में कुमाऊं के सभी छह जनपदों में कुल 87.8 मिमी बारिश दर्ज होती है। जबकि इस बीच सभी छह जनपदों में कुल 172.8 मिमी बारिश हो गई है। यह सामान्य से करीब दोगुना है। बारिश होने से जंगलों को तो फायदा मिल रहा है लेकिन बारिश के साथ गिर रहे ओले की वजहों से काश्तकारों के चेहरे पर मायूसी है।
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पांच मई से 12 मई तक कुमाऊं में हुई बारिश
जनपद सामान्य वर्षा इस बार हुई बारिश
अल्मोड़ा 14.1 मिमी 26.1 मिमी
बागेश्वर 14.1 मिमी 36.9 मिमी
चंपावत 11.7 मिमी 26.9 मिमी
पिथौरागढ़ 21.2 मिमी 39 मिमी
नैनीताल 19.6 मिमी 29 मिमी
यूएसनगर 7.1मिमी 14.9 मिमी
नोट- आंकड़े उत्तराखंड मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार
अल्मोड़ा में शाम को हुई झमाझम बारिश
अल्मोड़ा। मंगलवार शाम की हुई बारिश के बाद बुधवार को भी अल्मोड़ा में बारिश के आसार बने रहे। यहां दिन भर बादल छाए रहे। और शाम होते ही बारिश शुरू हो गई। लॉकडाउन होने की वजह से सड़कों पर पहले से ही सन्नाटा पसरा हुआ था। बारिश के दौरान और सन्नाटा बढ़ गया। यहां बीते कई दिनों से बारिश होने की वजह से अल्मोड़ा में ठंड काफी बढ़ गई है। यहां पर अधिकतम तापमान सामान्य से नौ डिग्री सेल्सियस कम चल रहा है। लोग मई में भी स्वेटर पहन रहे हैं और रजाई ओढ़ रहे हैं।
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जंगलों में आई नई घास
अल्मोड़ा। बारिश होने की वजह से जंगलों में आग की घटनाएं थम चुकीं हैं। अप्रैल के दूसरे पखवाड़े तक वनाग्नि की घटनाएं पिछले कई रिकार्ड तोड़ चुकी थीं। जंगल की आग गांव, कस्बों और शहरों तक पहुंचने लगी थी। लाखों की वन संपदा जलकर राख हो गई थी। वन विभाग के अनुसार पिछले तीन सप्ताह से हो रही बारिश के चलते अब जंगलों में नई हरी घास आने लगी है। हरियाली का स्तर बढ़ने लगा है। आग से झुलसे जंगलों को नया जीवन मिल रहा है। साथ ही बारिश की वजह से जमीन में भी काफी नमी बनी हुई है। इस वजह से वनाग्नि की घटनाओं पर फिलहाल नियंत्रण है।
बागेश्वर में बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि, फसलों को नुकसान
बागेश्वर। जिले में बारिश का सिलसिला जारी है। बुधवार को जिला मुख्यालय के साथ ही विभिन्न स्थानों में बारिश और हल्की ओलावृष्टि हुई। वहीं मंगलवार की शाम को धरमघर के बास्ती गांव में ओलावृष्टि से गेहूं की खड़ी फसल के साथ ही अखरोट और आड़ू को नुकसान पहुंचा है।
बास्ती के ग्राम प्रधान केदार सिंह महर ने बताया कि उनके गांव में लगातार ओलावृष्टि हो रही है। ओलावृष्टि से हर सिंह, कुंवर सिंह, नेत्र सिंह, मोहनी देवी, जवाहर सिंह, मोहन सिंह, नंदन सिंह, खुशाल सिंह, भगवान सिंह समेत तमाम किसानों की फसल को भारी नुकसान हुआ है। गांव में अखरोट का अच्छा उत्पादन होता है। ओलावृष्टि से अखरोट के साथ ही आड़ू और गेहूं की फसल भी नष्ट हो गई है। उन्होंने प्रशासन से किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की है।