फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Almora News ›   King would sit in Almora spring kamdev

अल्मोड़ा में विराजे हैं वसंत ऋतु के राजा कामदेव

Sat, 13 Feb 2016 12:16 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा। Updated Sat, 13 Feb 2016 12:16 AM IST
विज्ञापन
King would sit in Almora spring kamdev

कामदेव को वसंत ऋतु का राजा माना जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि वसंत ऋतु के दौरान प्रकृति में उल्लास और मधुरता कामदेव के कारण ही आती है। शास्त्रों के मुताबिक कामदेव को भगवान शिव ने भस्म कर दिया था इसलिए आम तौर पर कामदेव के पूजन की परंपरा नहीं रही है।

विज्ञापन


 उत्तराखंड में भी कामदेव का कोई मंदिर नहीं है, लेकिन तीन दशक पहले कत्यूरघाटी क्षेत्र में कामदेव की दसवीं शताब्दी की एक दुर्लभ मूर्ति  मिली। यह मूर्ति अब अल्मोड़ा में स्थित राजकीय संग्रहालय में मौजूद है। उत्तराखंड में कामदेव की यह एकमात्र मूर्ति मानी जाती है।
विज्ञापन


 जिससे यह माना जाता है कि इस इलाके में कभी कामदेव का कोई मंदिर अवश्य रहा होगा। तपस्या भंग करने पर भगवान शिव द्वारा कामदेव को भस्म कर दिए जाने की कथा शास्त्रों में  काफी लोकप्रिय है। हिंदू धर्म में कामदेव को अशरीर माना जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


वह किसी विशेष अंग में न रहकर जीवन को ऊर्जावान और मधुर बनाने के लिए प्रकृति के बदलते स्वरूप में खुद के मौजूद रहने का अहसास कराते रहते हैं।

आमतौर पर कामदेव का न पूजन होता है और न ही उनका कोई मंदिर मिलता है, लेकिन कत्यूर घाटी में गरुड़ (बैजनाथ) के पास गढ़सेर गांव में खुदाई के दौरान पुरातत्व विभाग के लोगों को 1984-85 में कामदेव की एक दुर्लभ मूर्ति प्राप्त हुई।

पुराविद कौशल किशोर सक्सेना बताते हैं कि इस स्थान पर तब मंदिर के अवशेष भी मिले थे जिससे यह माना जाता है कि यहां कामदेव का कोई मंदिर अवश्य रहा होगा। यह भी उल्लेखनीय है कि बैजनाथ (कत्यूर घाटी) को कत्यूर शासकों की राजधानी भी माना जाता है। इस इलाके में कत्यूर काल के कई मंदिर और मूर्तियां आदि आज भी मौजूद हैं।

 पत्थर की बनी कामदेव की यह मूर्ति दसवीं शताब्दी की है। यह मूर्ति शिल्प कला की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस प्रतिमा में कामदेव कमल और ललित आसन में हैं। उनके दोनों तरफ उनकी पत्नियां प्रीति और रति को त्रिभंग मुद्रा में दर्शाया गया है।


कामदेव के हाथों में मकरध्वज और धनुष है और माथे पर रत्नजड़ित मुकुट पहने हैं। हिंदू शास्त्रों के मुताबिक प्रद्युम्न को कामदेव का दूसरा अवतार माना जाता है। उन्होंने भगवान कृष्ण और रुकमणि के पुत्र के रूप में जन्म लिया। इसी वजह से कुछ विद्वान इसे प्रद्युम्न की मूर्ति भी मानते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed