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जागेश्वर को आध्यात्म केंद्र के रूप में विकसित करेंगे
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
Updated Thu, 05 Nov 2015 10:45 PM IST
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परमार्थ निकेतन के स्वामी चिदानंद स्वामी ने कहा कि भोलेनाथ की तपस्थली आध्यात्म और प्राकृतिक सुंदरता से पूर्ण है। इस स्थली को आध्यात्म और योग केंद्र के तौर पर विकसित करने को परामर्थ निकेतन प्रयास करेगा। उन्होंने कहा कि हरिद्वार में होने वाले अर्द्धकुंभ में योग का महाकुंभ भी लगेगा। इसमें विश्व के 100 देशों के प्रतिनिधि पहुंचेंगे।
पहली बार जागेश्वर पहुंचे स्वामी चिदानंद यहां की प्राकृतिक छटा और शांत वातावरण से प्रभावित दिखे। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र है। इस क्षेत्र को विकसित करने में वह स्वयं प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि कई कारणों से मनुष्य के जीवन में रिश्तों की डोर कमजोर होतेे जा रही है। रिश्तों की मिठास और पवित्रता को समृद्ध बनाने में योग जरूरी है। प्राचीन काल से ही भारतीय संस्कृति का गौरवमयी स्थान रहा है। इसे समृद्ध बनाकर ही देश विश्व के सर्वोच्च शिखर पर पहुंचा सकता है।
स्वामी चिदानंद ने कहा कि जागेश्वर में फाइव स्टार कल्चर की नहीं अपितु अपनी संस्कृति, व्यंजन और संस्कारों के संवर्धन की जरूरत है। परमार्थ निकेतन यहां हर साल योग महोत्सव का आयोजन करेगा। इन कार्यक्रमों में काफी संख्या में विदेशी मेहमान पहुंचेंगे। उनके लिए स्थानीय ग्रामीणों के घरों में होम स्टे, कुमाऊंनी व्यंजन परोसने के साथ ही मनोरंजन के लिए समृद्ध लोक संस्कृति की व्यवस्था करनी होगी।
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पहली बार जागेश्वर पहुंचे स्वामी चिदानंद यहां की प्राकृतिक छटा और शांत वातावरण से प्रभावित दिखे। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र है। इस क्षेत्र को विकसित करने में वह स्वयं प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि कई कारणों से मनुष्य के जीवन में रिश्तों की डोर कमजोर होतेे जा रही है। रिश्तों की मिठास और पवित्रता को समृद्ध बनाने में योग जरूरी है। प्राचीन काल से ही भारतीय संस्कृति का गौरवमयी स्थान रहा है। इसे समृद्ध बनाकर ही देश विश्व के सर्वोच्च शिखर पर पहुंचा सकता है।
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स्वामी चिदानंद ने कहा कि जागेश्वर में फाइव स्टार कल्चर की नहीं अपितु अपनी संस्कृति, व्यंजन और संस्कारों के संवर्धन की जरूरत है। परमार्थ निकेतन यहां हर साल योग महोत्सव का आयोजन करेगा। इन कार्यक्रमों में काफी संख्या में विदेशी मेहमान पहुंचेंगे। उनके लिए स्थानीय ग्रामीणों के घरों में होम स्टे, कुमाऊंनी व्यंजन परोसने के साथ ही मनोरंजन के लिए समृद्ध लोक संस्कृति की व्यवस्था करनी होगी।
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