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ग्लेशियरों के लिए सेहतमंद रही यह बर्फबारी
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
Updated Mon, 09 Jan 2017 10:34 PM IST
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पिछले साल जाड़े केे सीजन में बारिश और हिमपात नहीं होने से जहां दिसंबर-जनवरी में हिमालय की चोटियां सूखी नजर आ रही थीं वहीं इस बार दिसंबर आखिर और जनवरी पहले सप्ताह में हुई बर्फबारी से हिमालय के ग्लेशियर भी बर्फ से लकदक हो चुके हैं। इसे वैज्ञानिक हिमालय की सेहत के लिए अच्छा संकेत मान रहे हैं। मौसम वैज्ञानिकों ने इस बार जनवरी-फरवरी में भी बारिश और बर्फबारी की संभावना बताई है।
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मालूम हो कि पिछले साल जाड़े के पूरे सीजन में बारिश नहीं हुई। वैज्ञानिकों के मुताबिक पिछले साल पश्चिमी विक्षोभ के नहीं आने के कारण पूरे जाड़े के सीजन में मौसम शुष्क रहा। हिमालय पर भी इसका खराब असर देखने को मिला था। इस कारण दिसंबर से फरवरी तक पूरे जाड़े के सीजन में हिमालय में बर्फ नहीं गिरी और ग्लेशियरों में बर्फ नहीं जम सकी। बाद में गर्मियों में भी इसका असर देखने को मिला और नमी कम होने से जंगलों में आग की घटनाएं भी अधिक हुईं। वैज्ञानिकों का मानना है कि जनवरी से मार्च के बीच हिमपात होने पर ग्लेशियरों में अच्छी बर्फ टिक जाती है। जबकि मार्च के बाद हिमपात होने के बावजूद तापमान बढ़ जाने के कारण ग्लेशियरों में बर्फ का जमना संभव नहीं हो पाता।
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लंबे समय से ग्लेशियरों पर अध्ययन कर रहे जीबी पंत हिमालय पर्यावरण संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक किरीट कुमार ने हाल में हुई बर्फबारी को ग्लेशियरों के लिए बहुत उपयोगी बताया है। उन्होंने कहा कि दिसंबर से फरवरी के बीच होने वाली बर्फबारी ग्लेशियरों के लिए काफी अच्छी कही जा सकती है क्योंकि इन दिनों ग्लेशियरों में अच्छी बर्फ जमती है। उधर मौसम वैज्ञानिकों ने इस बार जनवरी-फरवरी में अच्छी बारिश और हिमपात होने का अनुमान लगाया है। जिससे आने वाले दिनों में हिमालय के ग्लेशियर और भी बर्फ से भर जाएंगे। इससे आने वाली गर्मियों में नदियों में पानी की कमी नहीं रहेगी।
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