{"_id":"627566995ee855467c0881ca","slug":"irregularities-in-district-hospital-almora-almora-news-hld461785563","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिला अस्पताल का हाल, आयुष्मान कार्ड के बाद भी बाहर से लेनी पड़ी रही दवा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिला अस्पताल का हाल, आयुष्मान कार्ड के बाद भी बाहर से लेनी पड़ी रही दवा
विज्ञापन
अल्मोड़ा का जिला अस्पताल
- फोटो : ALMORA
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अल्मोड़ा। जिला अस्पताल पर जिले भर के सैकड़ों मरीज निर्भर हैं लेकिन यहां की व्यवस्थाओं की सेहत कुछ ठीक नहीं है। मरीजों के पास आयुष्मान कार्ड होने के बाद भी उन्हें अस्पताल से दवाएं नहीं मिल रही हैं। अस्पताल में वेंटिलेटर तो हैं लेकिन उन्हें चलाने के लिए तकनीशियन नहीं हैं, जिससे मरीज हायर सेंटर रेफर किए जा रहे हैं।
जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को स्वास्थ्य विभाग हर तरह की स्वास्थ्य सुविधा देने का दावा करता है लेकिन यहां की सच्चाई कुछ और ही है। यहां आने वाले किसी मरीज को दवा बाहर से खरीदनी पड़ रही है तो किसी को वेंटिलेटर न चलने के कारण हायर सेंटर रेफर होना पड़ रहा है। तोली गांव से अपनी मां का इलाज कराने जिला अस्पताल पहुंचे जगदीश का कहना है कि उनकी मां दुर्गा देवी के कान में तकलीफ थी। पिछले शनिवार को उन्होंने अपनी मांग को अस्पताल में भर्ती किया। मंगलवार को मां के कान का ऑपरेशन हुआ। मां के इलाज के लिए उसने अस्पताल में आयुष्मान कार्ड लगाया था लेकिन उसके बाद भी उसे अस्पताल के स्टोर से दवा नहीं दी गई। मजबूरी में उसे बाहर से अपनी मां के लिए महंगी दवा लेनी पड़ रही है। जगदीश का कहना है कि अगर गरीबों को आयुष्मान कार्ड का लाभ अस्पताल में नहीं दिया जाना है तो उनका आयुष्मान कार्ड बनाना ही नहीं चाहिए। वहीं, फेफड़ों से संबंधित परेशानी के लिए अपने मामा को जिला अस्पताल में भर्ती कराने वाले फल्यूड़ा गांव के राजेंद्र सिंह भाकुनी ने बताया कि उनके मामा रंजीत सिंह को कुछ समय से फेफड़ों में परेशानी थी। चार मई को उन्होंने अपने मामा को जिला अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया, तब उन्होंने डाक्टरों से पूछा कि मामा का इलाज इस अस्पताल संभव है या नहीं। अगर नहीं है तो वे मामा को रेफर करा दें। डॉक्टरों ने इलाज हो जाने की बात कही लेकिन शुक्रवार सुबह डाक्टरों ने उसके मामा को हल्द्वानी सुशीला तिवारी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। डाक्टरों ने बताया कि अस्पताल में वेंटिलेटर है लेकिन उन्हें चलाने के लिए तकनीशियन नहीं है। उनके मरीज को वेंटिलेटर की जरूरत है। राजेंद्र का यह भी आरोप है इतने दिन अस्पताल में इलाज कराने के दौरान उनके मामा की जांचें भी बाहर से करवाई गई और दवा भी उन्हें अस्पताल के बाहर से ही लेनी पड़ीं।
आयुष्मान कार्ड पर जिला अस्पताल से दवाएं दी जा रही हैं। जो दवाएं नहीं हैं उन्हें भी मरीजों को उपलब्ध करा दिया जाएगा। फेफड़ों की परेशानी से संबंधित जिस मरीज को रेफर किया गया है उसे निमोनिया की शिकायत थी और बीपी भी नियंत्रित नहीं हो रहा था। दो दिन मरीज को ऑक्सीजन पर रखा गया था। हालत गंभीर होने पर मरीज को रेफर किया गया।
विज्ञापन
- डॉ. कुसुमलता, पीएमएस जिला अस्पताल।
विज्ञापन
जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को स्वास्थ्य विभाग हर तरह की स्वास्थ्य सुविधा देने का दावा करता है लेकिन यहां की सच्चाई कुछ और ही है। यहां आने वाले किसी मरीज को दवा बाहर से खरीदनी पड़ रही है तो किसी को वेंटिलेटर न चलने के कारण हायर सेंटर रेफर होना पड़ रहा है। तोली गांव से अपनी मां का इलाज कराने जिला अस्पताल पहुंचे जगदीश का कहना है कि उनकी मां दुर्गा देवी के कान में तकलीफ थी। पिछले शनिवार को उन्होंने अपनी मांग को अस्पताल में भर्ती किया। मंगलवार को मां के कान का ऑपरेशन हुआ। मां के इलाज के लिए उसने अस्पताल में आयुष्मान कार्ड लगाया था लेकिन उसके बाद भी उसे अस्पताल के स्टोर से दवा नहीं दी गई। मजबूरी में उसे बाहर से अपनी मां के लिए महंगी दवा लेनी पड़ रही है। जगदीश का कहना है कि अगर गरीबों को आयुष्मान कार्ड का लाभ अस्पताल में नहीं दिया जाना है तो उनका आयुष्मान कार्ड बनाना ही नहीं चाहिए। वहीं, फेफड़ों से संबंधित परेशानी के लिए अपने मामा को जिला अस्पताल में भर्ती कराने वाले फल्यूड़ा गांव के राजेंद्र सिंह भाकुनी ने बताया कि उनके मामा रंजीत सिंह को कुछ समय से फेफड़ों में परेशानी थी। चार मई को उन्होंने अपने मामा को जिला अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया, तब उन्होंने डाक्टरों से पूछा कि मामा का इलाज इस अस्पताल संभव है या नहीं। अगर नहीं है तो वे मामा को रेफर करा दें। डॉक्टरों ने इलाज हो जाने की बात कही लेकिन शुक्रवार सुबह डाक्टरों ने उसके मामा को हल्द्वानी सुशीला तिवारी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। डाक्टरों ने बताया कि अस्पताल में वेंटिलेटर है लेकिन उन्हें चलाने के लिए तकनीशियन नहीं है। उनके मरीज को वेंटिलेटर की जरूरत है। राजेंद्र का यह भी आरोप है इतने दिन अस्पताल में इलाज कराने के दौरान उनके मामा की जांचें भी बाहर से करवाई गई और दवा भी उन्हें अस्पताल के बाहर से ही लेनी पड़ीं।
विज्ञापन
आयुष्मान कार्ड पर जिला अस्पताल से दवाएं दी जा रही हैं। जो दवाएं नहीं हैं उन्हें भी मरीजों को उपलब्ध करा दिया जाएगा। फेफड़ों की परेशानी से संबंधित जिस मरीज को रेफर किया गया है उसे निमोनिया की शिकायत थी और बीपी भी नियंत्रित नहीं हो रहा था। दो दिन मरीज को ऑक्सीजन पर रखा गया था। हालत गंभीर होने पर मरीज को रेफर किया गया।
विज्ञापन
- डॉ. कुसुमलता, पीएमएस जिला अस्पताल।