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मानसरोवर के प्राचीन यात्रा मार्गों को विश्व धरोहर घोषित कराने की पहल

Mon, 02 Oct 2017 11:00 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा Updated Mon, 02 Oct 2017 11:00 PM IST
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Initiative to declare Manasarovar's ancient travel routes as World Heritage
kailash mount
कैलाश मानसरोवर के लिए जाने वाले सभी प्राचीन मार्गों और इनसे जुड़े पवित्र तीर्थ स्थलों को विश्व धरोहर घोषित कराने के लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। भारत, चीन और नेपाल के संयुक्त प्रयासों आईसीमोड के तहत पिछले पांच साल से चलाई जा रही पवित्र कैलाश भू क्षेत्र संरक्षण एवं विकास पहल परियोजना के तहत यह प्रस्ताव आने वाले दिनों में यूनेस्को को भेजा जाएगा। यूनेस्को में नामांकन के बाद यह इलाका विश्व पर्यटन मानचित्र से जुड़ जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में देशी-विदेशी पर्यटकों की तादात कई गुना बढ़ जाएगी। साथ ही इस क्षेत्र में रहने वाले लोगों को रोजगार के काफी अवसर मिलेंगे।  
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 बता दें कि भारत, चीन और नेपाल अंतर्राष्ट्रीय संस्था (आईसीमोड) के तहत 2013 से हिमालय के कैलाश भू-क्षेत्र संरक्षण के लिए आपसी सहयोग से काम कर रहे हैं। पवित्र कैलाश भू क्षेत्र संरक्षण एवं विकास पहल परियोजना के तहत अब तक तीनों देश कैलाश पर्वत के आसपास अपने-अपने क्षेत्रों में विभिन्न तरह के अध्ययन और लोगों को आजीविका से जोड़ने की दिशा में काम कर रहे हैं। परियोजना के पहले चरण का काम अंतिम दौर में है और दूसरे चरण का कार्य दिसंबर से शुरू होगा। इसके तहत तीनों देश पर्यावरण संरक्षण के कार्यों के साथ ही परियोजना क्षेत्र में रहने वाले लोगों को आजीविका से जोड़ने का काम भी करेंगे।
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 यह भी तय हुआ है कि तीनों देश अपने-अपने क्षेत्रों में विश्व धरोहर के स्थानों को चिन्हित करके इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर भेजेंगे। आईसीमोड परियोजना में भारत की ओर से नोडल एजेंसी जीबी पंत हिमालय पर्यावरण विकास संस्थान, कोसी कटारमल के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आरएस रावल ने बताया कि कैलाश मानसरोवर जाने वाले सभी प्राचीन मार्गों जागेश्वर-गंगोलीहाट-पाताल भुवनेश्वर मार्ग, पूर्णागिरि से रामेश्वर-हाट कालिका होकर कैलाश मानसरोवर जाने वाला मार्ग, पिथौरागढ़ से झूलाघाट नेपाल होकर जाने वाले मार्ग को विश्व धरोहर घोषित करने के लिए प्रस्ताव में शामिल किया जा रहा है। इधर, भारतीय वन्य जीव संस्थान के डीन डॉ. जीएस रावत ने बताया कि प्रदेश सरकार ने यात्रा मार्गों और पवित्र स्थलों को विश्व धरोहर घोषित करने की पहल में काफी रुचि दिखाई है। जल्द ही मुख्य सचिव के माध्यम से यह प्रस्ताव केंद्र सरकार को जाएगा और केंद्र की सहमति मिल जाने के बाद इन प्रस्तावित धरोहरों का विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। इसमें इनकी खासियत, महत्व आदि के बारे में विवरण भी होगा। फिर इस विस्तृत प्रस्ताव को नामांकन के लिए यूनेस्को भेज दिया जाएगा। यूनेस्को में नामांकन हो जाने के बाद इन धरोहरों के रखरखाव और संतुलित विकास का कार्य शुरू होगा। जिससे इन स्थलों की गरिमा भी बनी रहेगी तथा विश्व पर्यटन मानचित्र में शामिल हो जाने से क्षेत्र के लोगों को रोजगार के नए अवसर भी मिल सकेंगे।  
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कई तीर्थ स्थल भी विश्व धरोहर के प्रस्ताव में शामिल  
अल्मोड़ा। भारतीय वन्य जीव संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक और डीन डा. जीएस रावत के मुताबिक विश्व धरोहर के लिए प्रस्तावित स्थान में कैलाश मानसरोवर के प्राचीन मार्गों के अलावा इन मार्गों में पड़ने वाले पवित्र तीर्थ स्थलों पाताल भुवनेश्वर, छिपलाकेदार, थल केदार, पंचेश्वर, छोटा कैलाश, कालापानी सहित कई अन्य स्थलों को भी विश्व धरोहर के प्रस्ताव में शामिल किया जाएगा। यदि इन्हें विश्व धरोहर घोषित किया गया तो आने वाले वर्षों में इन स्थलों के विकास की संभावनाएं काफी बढ़ जाएंगी।  
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