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भारत के लिए भारी न पड़ जाए सीमांत क्षेत्र की उपेक्षा : माहरा 

Thu, 24 Aug 2017 09:30 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो  रानीखेत (अल्मोड़ा)।
अमर उजाला ब्यूरो  रानीखेत (अल्मोड़ा)। Updated Thu, 24 Aug 2017 09:30 PM IST
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India should not be burdened by marginalized areas: Mahara
आपदा प्रभावित सिमखोला गांव में ग्रामीणों से वार्ता करते विधायक करन माहरा।  - फोटो : अमर उजाला

कांग्रेस विधानमंडल दल के उपनेता विधायक करन माहरा ने कहा है कि केंद्र और राज्य सरकारें सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्रों में आपदा को लेकर गंभीर नहीं हैं। यह उपेक्षा भविष्य में भारत के लिए भारी भी पड़ सकती है। कहा कि मालपा और मांगती क्षेत्र में आई आपदा में 50 से अधिक नेपाली श्रमिक और कई अन्य स्थानीय लोग लापता हैं, लेकिन सरकार इनकी खोजबीन तक नहीं कर पाई है। जबकि, यह क्षेत्र भारत, नेपाल और चीन की सीमा से सटा हुआ है। सरकारों की उपेक्षा को लेकर सीमांत क्षेत्र के लोगों में भारी आक्रोश है। 

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आपदा प्रभावित सीमांत क्षेत्र मालपा और मांगती का दौरा कर लौटने के बाद बृहस्पतिवार को यहां पत्रकारों से बातचीत में विधायक माहरा ने कहा कि उन इलाकों में हेलीकॉप्टर तक की व्यवस्था नहीं की गई है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने जून में ही संवेदनशील क्षेत्रों में यह व्यवस्था कर दी थी। व्यवस्थाएं होतीं तो वहां कई लोगों की जानें बचाई जा सकती थीं। उन्होंने बताया कि आपदा के बाद अभी तक वहां जनजीवन सामान्य नहीं हो सका है। प्रभावित क्षेत्रों में दवाएं और रसद तक नहीं पहुंच पा रही है। माहरा ने बताया कि तल्ला जिप्ती, मल्ला जिप्ती में जानमाल और सिमखोला में भूमि और संपत्ति का भारी नुकसान हुआ है। आपदा के दौरान सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले कई नेपाली श्रमिक लापता हैं, लेकिन सरकार सिर्फ दो श्रमिक दिखा रही है। सेना के छह जवान इस दुर्घटना में मारे गए हैं। आरोप लगाया कि सरकार की तरफ से गठित तीन सदस्यीय दल ने भी आपदा प्रभावित क्षेत्रों की भारी उपेक्षा की है। 
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आपदा पर अब मौन क्यों हैं अजय भट्ट 
विधायक करन माहरा ने कहा कि 13 अगस्त को आपदा आई थी, लेकिन 22 अगस्त तक वहां डीएम भी नहीं पहुंचे थे। सिर्फ सीडीओ और उपराजस्व निरीक्षक ने मोर्चा संभाला था। उन्होंने कहा कि केदारनाथ आपदा में शवों की गिनती कराने वाले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट इस प्रकरण पर पूरी तरह से मौन साधे हुए हैं, जो कि भाजपा संगठन और सरकार की गंभीरता को दर्शाता है। 
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लापता नेपाली श्रमिकों के परिजनों को सहायता दे सरकार 
विधायक माहरा ने कहा कि सिमखोला सहित तमाम गांवों के ग्रामीणों के साथ उनकी वार्ता हुई। कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों की सरकारें उपेक्षा कर रही हैं। भारत और चीन की तनातनी बढ़ रही है, ऐसे में नेपाली श्रमिकों की उपेक्षा भारत के लिए गंभीर हो सकती है। केंद्र सरकार को शीघ्र इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए और लापता नेपाली श्रमिकों की जानकारी लेकर उनके परिवारों को सहायता पहुंचानी चाहिए। 

 

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