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Almora News: अल्मोड़ा की ऐतिहासिक जेल को अब तक नहीं मिला राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा
Wed, 09 Aug 2023 12:31 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Wed, 09 Aug 2023 12:31 AM IST
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अल्मोड़ा। आजादी के इतिहास को सहेजे जिले की ब्रिटिशकालीन ऐतिहासिक जिला जेल को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा नहीं मिल सका है। इसे पर्यटकों के लिए खोलने की योजना सरकारी फाइलों में गुम हो गई है। आंदोलनकारियों के इतिहास को जानने की जिज्ञासा लिए कई पर्यटक यहां पहुंचते हैं लेकिन उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ रहा है।
ब्रिटिश शासनकाल में 1872 में अल्मोड़ा जेल का निर्माण किया गया, जो अब भी आजादी का इतिहास सहेजे है। स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन के दौरान देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू दो बार इस जेल में रहे। उनके अलावा पं. गोविंद बल्लभ पंत, विक्टर मोहन जोशी, देवी दत्त पंत, बद्री दत्त पांडे, आचार्य नरेंद्र देव, हरगोविंद पंत, दुर्गा सिंह रावत, खान अब्दुल गफ्फार खान, सैयद अली जहीर आदि समेत कई महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को इस जेल में कैद किया गया। इन स्वतंत्रता के नायकों ने यहां निरुद्ध रहकर आजादी के लिए आंदोलन की रणनीति बनाई थी। आजादी के बाद से इसे राष्ट्रीय स्मारक घोषित कर इसे पर्यटकों के लिए खोलने की मांग की जा रही है लेकिन यह योजना अब भी धरातल पर नहीं उतर सकी है और यह सरकारी फाइलों में दबकर रह गई है। संवाद
पंडित नेहरू ने अपनी पुस्तक डिस्कवरी ऑफ इंडिया में साझा किए हैं अनुभव
अल्मोड़ा। जेल के जिस वार्ड में पंडित नेहरू रहे उसे नेहरू वार्ड के नाम से तो प्रसिद्धि मिली लेकिन इस वार्ड को पर्यटकों के लिए नहीं खोला जा सका है। जेल में रहने के दौरान पंडित नेहरू ने खादी की कताई के लिए चरखा भी चलाया था जो आज भी वार्ड में रखा है। वहां पंडित नेहरू के उजाले के लिए प्रयोग में लाए गए दीपक, खाने के बर्तन, पीतल की थाली, कटोरा, गिलास, लोटा, कुर्सी, मेज, चारपाई आदि को धरोहर के रूप में सहेजा गया है। पंडित नेहरू ने अपनी पुस्तक डिस्कवरी ऑफ इंडिया में यहां के अनुभवों को साझा किया है।
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जेल की क्षमता 102 और बंद हैं 372 कैदी
अल्मोड़ा। अल्मोड़ा के साथ ही कुमाऊं के चंपावत, पिथौरागढ़, बागेश्वर जिलों के कैदियों को इस ऐतिहासिक जेल में रखा जाता है। यहां 102 रखने की क्षमता है लेकिन 372 कैदी यहां मौजूद हैं।
कोट
निश्चित तौर पर यह ऐतिहासिक जेल है। जेल को राष्ट्रीय स्मारक बनाने संबंधी जानकारी मेरे संज्ञान में नहीं है।
-जयंत पांगती, जेल अधीक्षक, अल्मोड़ा।
कोट
अल्मोड़ा की ऐतिहासिक जेल की उपेक्षा हो रही है। लंबे समय से इसे राष्ट्रीय स्मारक के रूप में विकसित करने की मांग की जा रही है, जिसके लिए सरकार गंभीर नहीं है।
- मनोज तिवारी, विधायक, अल्मोड़ा।
ब्रिटिश शासनकाल में 1872 में अल्मोड़ा जेल का निर्माण किया गया, जो अब भी आजादी का इतिहास सहेजे है। स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन के दौरान देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू दो बार इस जेल में रहे। उनके अलावा पं. गोविंद बल्लभ पंत, विक्टर मोहन जोशी, देवी दत्त पंत, बद्री दत्त पांडे, आचार्य नरेंद्र देव, हरगोविंद पंत, दुर्गा सिंह रावत, खान अब्दुल गफ्फार खान, सैयद अली जहीर आदि समेत कई महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को इस जेल में कैद किया गया। इन स्वतंत्रता के नायकों ने यहां निरुद्ध रहकर आजादी के लिए आंदोलन की रणनीति बनाई थी। आजादी के बाद से इसे राष्ट्रीय स्मारक घोषित कर इसे पर्यटकों के लिए खोलने की मांग की जा रही है लेकिन यह योजना अब भी धरातल पर नहीं उतर सकी है और यह सरकारी फाइलों में दबकर रह गई है। संवाद
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पंडित नेहरू ने अपनी पुस्तक डिस्कवरी ऑफ इंडिया में साझा किए हैं अनुभव
अल्मोड़ा। जेल के जिस वार्ड में पंडित नेहरू रहे उसे नेहरू वार्ड के नाम से तो प्रसिद्धि मिली लेकिन इस वार्ड को पर्यटकों के लिए नहीं खोला जा सका है। जेल में रहने के दौरान पंडित नेहरू ने खादी की कताई के लिए चरखा भी चलाया था जो आज भी वार्ड में रखा है। वहां पंडित नेहरू के उजाले के लिए प्रयोग में लाए गए दीपक, खाने के बर्तन, पीतल की थाली, कटोरा, गिलास, लोटा, कुर्सी, मेज, चारपाई आदि को धरोहर के रूप में सहेजा गया है। पंडित नेहरू ने अपनी पुस्तक डिस्कवरी ऑफ इंडिया में यहां के अनुभवों को साझा किया है।
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जेल की क्षमता 102 और बंद हैं 372 कैदी
अल्मोड़ा। अल्मोड़ा के साथ ही कुमाऊं के चंपावत, पिथौरागढ़, बागेश्वर जिलों के कैदियों को इस ऐतिहासिक जेल में रखा जाता है। यहां 102 रखने की क्षमता है लेकिन 372 कैदी यहां मौजूद हैं।
कोट
निश्चित तौर पर यह ऐतिहासिक जेल है। जेल को राष्ट्रीय स्मारक बनाने संबंधी जानकारी मेरे संज्ञान में नहीं है।
-जयंत पांगती, जेल अधीक्षक, अल्मोड़ा।
कोट
अल्मोड़ा की ऐतिहासिक जेल की उपेक्षा हो रही है। लंबे समय से इसे राष्ट्रीय स्मारक के रूप में विकसित करने की मांग की जा रही है, जिसके लिए सरकार गंभीर नहीं है।
- मनोज तिवारी, विधायक, अल्मोड़ा।